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खतरे में मोहम्मद रफी का घर, पिता की निशानी बचाने के लिए बेेटे को लड़नी पड़ रही कानूनी लड़ाई

Sun, 13 Oct 2019 11:24 AM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
अपनी खूबसूरत आवाज से लाखों दिलों को जीतने वाले गायक मोहम्मद रफी साहब का परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा है। मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी इन दिनों अपने पैतृक घर को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रकम वापस ना करने के चलते बैंक ने उनके घर की पांचवी मंजिल पर कब्जा करने का दावा किया है। 
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
अंग्रेजी वेबसाइट मुंबई मिरर की खबर के अनुसार एचडीएफसी बैंक ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए रफी साहब के घर 'रफी मैशन्स' की इमारत की पांचवीं मंजिल पर कब्जा मांगा है। बैंक ने कोर्ट में दावा किया है कि मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद ने निंबस इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी के साथ फ्लैट बेचने का सौदा किया था। जिसके लिए कंपनी ने फ्लैट खरीदने के लिए 4.16 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
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मोहम्मद रफी - फोटो : file photo
अब जब निंबस इंडस्ट्रीज कंपनी रुपये वापस नहीं कर पाई है तो बैंक ने कोर्ट में संपत्ति पर दावा ठोंका है, जिसके चलते मोहम्मद रफी साहब का घर मुश्किलों में हैं। वहीं बैंक के उल्ट रफी साहब के बेटे शाहिद ने बैंक की दलीलों को गलत बताया है। शाहिद का कहना है कि उन्होंने संपत्ति बेची ही नहीं थी बल्कि कुछ वक्त के लिए समझौता किया था। उन्होंने कहा कि फ्लैट की कीमत 5 करोड़ रुपये है और वह निंबस को संपत्ति बेचना नहीं चाहते थे बल्कि साल 2017 में कुछ रुपयों की जरूरत के चलते समझौते पर देना चाहते थे।

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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
शाहिद ने आगे बताया कि निंबस इंडस्ट्रीज कंपनी ने जितने रुपये देने के लिए कहा था उतने दिए ही नहीं, जिसके चलते ये समझौता टूट गया था। वहीं जब शाहिद ने कोर्ट से इस मामले में मदद मांगी तो कोर्ट ने फिलहाल ये कहते हुए किसी भी तरह की मदद करने से मना कर दिया कि समझौता रद्द कर दिया गया है। इससे ये बात तो साफ है कि समझौता हुआ था। हालांकि डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल ने उन्हें स्टे दे दिया है।
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
मोहम्मद रफी साहब ने अपना ये घर साल 1970 में बनाया था। शाहिद ने बताया कि इस घर के साथ उनकी ढेरों यादें जुड़ी हुई हैं। वहीं एचडीएफसी बैंक का दावा है कि निंबस से समझौते में उन्हें सिर्फ 1.95 करोड़ रुपये मिले जबकि समझौते में 3.16 करोड़ रुपये का जिक्र है। बैंक ने बताया कि निंबस के डायरेक्टर ने उनसे कोई भी चेक डिपॉजिट नहीं करने के लिए कहा था।

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