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मौत से कुछ घंटे पहले ही मोहम्मद रफी ने रिकॉर्ड किया था आखिरी गाना, फीस में लेते थे 1 रुपए

Mon, 24 Dec 2018 07:56 AM IST
शिप्रा सक्सेना एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मोहम्मद रफी - फोटो : File Photo
चार दशक से भी ज्यादा गायकी से लोगों के दिलों पर कब्जा जमाने वाले मशहूर गायक मुहम्मद रफी की 24 दिसंबर को बर्थ एनिवर्सरी है। वैसे तो मुहम्मद रफी के ज्यादातर गाने सुपरहिट रहे लेकिन उनके गाए कुछ नगमें आज भी दिल की धड़कनों को बढ़ा देते हैं। यह गाने हैं आज मौसम बड़ा बेईमान है, तारीफ करूं क्या उसकी, चाहूंगा मैं तुझे, अभी ना जाओ छोड़कर। तो चलिए आपको फिल्म इंडस्ट्री के महान गायक मुहम्मद रफी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से बताते हैं। 
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मोहम्मद रफी - फोटो : File Photo
बहुत ही कम लोग इस बात को जानते हैं कि मधुर आवाज के धनी मोहम्मद रफी को प्यार से लोग 'फेकू' कहकर बुलाते थे। कहा जाता है कि रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कंसर्ट में गाने की अनुमति दी थी। 
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मोहम्मद रफी - फोटो : File Photo
साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।

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Mohammed Rafi - फोटो : File Photo
मुहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया है। मुहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते है। उस वक्त करीब 10 हजार लोग यात्रा में शरीक हुए थे।
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मोहम्मद रफी - फोटो : File Photo
मोहम्मद रफी ने न केवल गायिकी बल्कि एक्टिंग में भी हाथ आजमाया था। रफी साहब ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' फिल्म में बतौर एक्टर काम किया था। यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और ताबड़तोड़ कमाई की।
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Mohammed Rafi - फोटो : file photo
मोहम्मद रफी ने ज्यादातर गाने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए गाए। उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए करीब 369 गाने गाए थे जिसमें से 186 गाने सोलो शामिल हैं। यहां तक कि रफी ने आखिरी गाना भी इन्हीं के लिए गाया था। वह गाना था - 'श्याम फिर क्यों फिर उदास'। इस फिल्म का नाम 'आस पास' है। जिस वक्त मोहम्मद रफी ने यह गाना रिकॉर्ड किया था उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इस गाने की रिकॉर्डिंग के कुछ घंटे बाद भी रफी साहब का निधन हो गया था। 
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Mohammed Rafi - फोटो : File Photo
कहा जाता है कि रफी साहब किसी भी संगीतकार से यह नहीं पूछते थे कि उन्हें गाना गाने के लिए कितना पैसा देंगे। यहां तक कि कभी कभी सिर्फ 1 रुपए में भी कई फिल्मों में गाना गाया है। मोहम्मद रफी ने न केवल हिंदी बल्कि कई भाषाओं में गाना गाया है। इन भाषाओं में असमीज, कोंकणी, भोजपुरी, अंग्रेजी, तेलुगु, मैथिली और गुजराती शामिल हैं।
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