रफी साहब जैसा फनकार कोई दूसरा ना हो पाया। उनकी पुण्यतिथि पर कुछ ऐसी अनकही बातें आपके सामने लाए हैं जो उनकी गायकी के साथ व्यक्तिव को भी बयां कर रही हैं। रफी साहब के निधन के 8 साल बाद उनकी पत्नी बिलकिस रफी ने एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने रफी के बारे में कई बातें बताई थीं । बिलकिस की बड़ी बहन की शादी रफी के बड़े भाई से हुई थी। उस समय बिलकिस 13 साल की थीं और छठी क्लास का एग्जाम दे रही थीं।
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mohammad rafi
- फोटो : file photo
तभी उनकी बहन ने उनसे कहा था कि कल रफी से तुम्हारी शादी है। बिलकिस शादी का मतलब भी नहीं जानती थीं । उस समय रफी की उम्र 19 साल थी। रफी अपनी पहली पत्नी से अलग हो गए थे। तब रफी और बिलकिस की शादी कर दी गई थी। रफी साहब 10 साल की उम्र से गा रहे थे। लेकिन उनकी पत्नी को म्यूजिक में कोई इंट्रेस्ट नहीं था।
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Naushad, Rafi
- फोटो : social media
वो कभी रफी के गाने नहीं सुनती थीं। रफी और उनकी पत्नी डोंगरी के एक चॉल में रहा करते थे। कुछ समय बाद रफी और उनकी पत्नी भिंडी बजार के चॉल में शिफ्ट हो गए थे। लेकिन रफी को चॉल में रहना पसंद नहीं था। रफी सुबह साढ़े तीन बजे उठकर रियाज करते थे। रियाज के लिए रफी मरीन ड्राइव तक पैदल जाते थे। क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि उनके रियाज की वजह से आस-पास के लोगों की नींद खराब हो।
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mohammad rafi
- फोटो : file photo
मरीन ड्राइव पर एक्ट्रेस सुरैया का घर था। जब उन्होंने कई दिनों तक रफी को रियाज करते हुए देखा तो उन्होंने पूछा कि वो यहां क्यों रियाज करते हैं। तब रफी ने अपनी परेशानी बताई। इसके बाद सुरैया ने अपने घर का एक कमरा रफी को रियाज करने के लिए दे दिया था। रफी को जब काम मिलने लगा था तब उन्होंने कोलाबा में फ्लैट खरीद लिया था। यहां वो अपने सात बच्चों के साथ रहते थे।
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मोहम्मद रफी
रफी साहब को पब्लिसिटी बिल्कुल पसंद नहीं थी। वो जब भी किसी शादी में जाते थे तो ड्राइवर से कहते थे कि यहीं खड़े रहो। रफी सीधे कपल के पास जाकर उन्हें बधाई देते थे और फिर अपनी कार में आ जाते थे। वो जरा देर भी शादी में नहीं रुकते थे। रफी साहब ने कभी कोई इंटरव्यू नहीं दिया। उनके सभी इंटरव्यू उनके बड़े भाई अब्दुल अमीन हैंडल करते थे। गाने के अलावा मोहम्मद रफी को बैडमिंटन और पतंग उड़ाने का बहुत शौक था। रफी साहब ने कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया।
रफी साहब के निधन से कुछ दिन पहले ही कोलकाता से कुछ लोग उनसे मिलने पहुंचे थे। वो चाहते थे कि रफी साहब काली पूजा के लिए गाना गाएं। जिस दिन रिकॉर्डिंग थी उस दिन रफी के सीने में बहुत दर्द हो रहा था। लेकिन उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। हालांकि रफी साहब बंगाली गाना नहीं गाना चाहते थे। लेकिन फिरभी उन्होंने गया। वो दिन रफी साहब का आखिरी दिन था। उन्हें हार्ट अटैक आया था।