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तेज बारिश में निकली थी मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा, जानिए कई रोचक किस्से

Tue, 30 Jul 2019 04:20 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मोहम्मद रफी - फोटो : Twitter

अपनी गायकी से सबके दिलों पर राज़ करने वाले मोहम्मद रफी साहब की आज पुण्यतिथि है। उन्हें शहंशाह-ए-तरन्नुम भी कहा जाता था। रफी साहब बहुत कम बोलने वाले, जरूरत से ज्यादा विनम्र और मीठे इंसान थे। उनकी बहू यास्मीन खुर्शीद बताती हैं कि न तो वह शराब या सिगरेट पीते थे और न ही पान खाते थे। मोहम्मद रफी पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में जन्में थे और वहां से मुंबई ही नहीं दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई। इस महान शख्सियत की पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

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मोहम्मद रफी
हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 31 जुलाई 1980 को रमजान के महीने से दुनिया से विदा हो गए थे। रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था।
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मोहम्मद रफी
मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कॉन्सर्ट में गाने की अनुमति दी थी। साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।

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मोहम्मद रफी
मोहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया था। मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते हैं। उस वक्त करीब 10 हजार लोग यात्रा में शरीक हुए थे।
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रफी साहब के साथ महेंद्र कपूर
मोहम्मद रफी ने न केवल गायिकी बल्कि एक्टिंग में भी हाथ आजमाया था। रफी साहब ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' फिल्म में बतौर एक्टर काम किया था। यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और ताबड़तोड़ कमाई की। मोहम्मद रफी ने ज्यादातर गाने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए गाए। उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए करीब 369 गाने गाए थे, जिसमें 186 गाने सोलो शामिल हैं।
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मोहम्मद रफी
रफी साहब की सबसे खास बात यह थी कि उनकी आवाज हर एक्टर पर फिट हो जाती। दिलीप कुमार से लेकर देवानंद और शम्मी कपूर से लेकर राजेंद्र कुमार वो जिस किसी भी स्टार के लिए गाते पर्दे पर यही लगता कि रफी नहीं वो स्टार गा रहा है।
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