नीना गुप्ता
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करियर की शुरुआत में हुईं टाइपकास्ट
नीना गुप्ता ने जब फिल्म करियर की शुरुआत की तो उन्हें गाइड करने वाला कोई नहीं था। ऐसे में उन्हें जो रोल मिले, वह करती गईं। इस वजह से शुरुआत में ही वैंप और नेगेटिव कैरेक्टर में टाइपकास्ट हो गईं। इसी इमेज को तोड़ने के लिए उन्होंने अलग-अलग जॉनर की फिल्में और रोल भी किए। वह गांधी (1982), मिर्जा गालिब (1989), इन कस्टडी (1993), कॉटन मैरी (1999), मंडी (1983) और सूरज का सातवां घोड़ा (1992) जैसी पैरलल सिनेमा में भी नजर आईं। इन फिल्मों को करने के बावजूद नीना गुप्ता को मनचाही सफलता नहीं मिली। टीवी पर भी नीना गुप्ता ने कई सीरियल किए, जिसमें ‘सांस’, ‘सिसकी’, ‘क्यों होता है प्यार’, ‘लेडीज स्पेशल’ और ‘दिल से दिया वचन’ जैसे सीरियल शामिल हैं।