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'गुलों में रंग भरे वादे- नौबहार चले' से लेकर 'रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ', यहां सुनिए मेहदी हसन के सदाबहार नगमे

Sat, 13 Jun 2020 01:47 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मेहदी हसन - फोटो : अमर उजाला

महान गजल गायक मेहदी हसन (Mehdi Hassan)  ने अपनी रूहानी आवाज में मोहब्बत और दर्द को जो गहराई दी थी, वो आज भी लोगों के दिलों को छू जाती है। 60 और 70 के दशक की शायद ही ऐसी कोई बड़ी फिल्म हो, जिसमें मेंहदी हसन का गाना न हो। आज उनकी पुण्यतिथि है। गायन के साथ उन्हें पहलवानी का भी शौक था। उन्हें 'किंग ऑफ गजल' और शहंशाह-ए-गजल भी कहा जाता था। पाकिस्तानी गजल गायक का आज ही के दिन साल 2012 में कराची के एक अस्पताल में निधन हो गया था। मेहदी हसन की पुण्यतिथि पर आइए आपको सुनाते हैं उनके शानदार नगमे।

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मेहदी हसन - फोटो : internet
'गुलों में रंग भरे वादे-नौबहार चले, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले'
ये ही वो गजल थी, जिसने रातों रात मेहदी हसन शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया था। मेहदी हसन को गायन विरासत में मिला था। उनके दादा इमाम खान बड़े कलाकार थे।

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मेहदी हसन - फोटो : BBC
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें...

मुहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे...
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रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ...

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
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