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'रंजिश ही सही' से लेकर 'अब के हम बिछड़े तो', मेहदी हसन की पुण्यतिथि पर सुनिए ये यादगार गजलें

Wed, 12 Jun 2019 06:59 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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mehdi hassan - फोटो : Self
राजस्थान के जयपुर से करीब 107 किलोमीटर दूर ‘लूना’ में जन्मे मेहदी हसन ने अपनी रूहानी आवाज में मोहब्बत और दर्द को जो गहराई दी थी, वो आज भी लोगों के दिलों को छू जाती है। 60 और 70 के दशक की शायद ही ऐसी कोई बड़ी फिल्म हो, जिसमें मेंहदी हसन का गाना न हो। ऐसे शानदार गायक ने 13 जून 2012 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मेहदी हसन की पुण्यतिथि पर आइए आपको सुनाते हैं उनके शानदार नगमें।
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रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ...

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'गुलों में रंग भरे वादे-नौबहार चले'
ये ही वो गजल थी, जिसने रातोंरात मेहदी हसन शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया था।

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें...
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मुहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे...

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दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं...

महफिलों में गायकी भी सपना बनकर रह गई और सुरों का ये शहंशाह 13 जून 1912 को इस दुनिया को अलविदा कह गया।
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