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'मसकली 2.0' विवाद पर बोले सिद्धार्थ मल्होत्रा, हमारी फिल्म का कोई बुरा रीमेक बनाता तो...

Mon, 13 Apr 2020 01:22 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सिद्धार्थ मल्होत्रा - फोटो : ट्विटर
अभिषेक बच्चन और सोनम कपूर की फिल्म 'दिल्ली 6' के गाने 'मसकली' का रीमिक्स वर्जन 'मसकली 2.0' पर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रिलीज होने के बाद से ही इस गाने पर आलोचनाओं की बौछार हो रही है। एआर रहमान से लेकर गाने के बोल लिखने वाले प्रसून जोशी समते कई बड़े गायकों ने इसकी आलोचना की है। इस विवाद में पहली बार सिद्धार्थ मल्होत्रा का बयान सामने आया है।
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masakali 2.0 - फोटो : twitter

तनिष्क बागची ने सिद्धार्थ मल्होत्रा और तारा सुतारिया के साथ मिलकर नए वर्जन को बनाया है, जिसकी चौतरफा आलोचना हो रही है। एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कहा, 'यह गाना मरजावां के प्रचार के रूप में शूट किया गया था। इस विवाद में हमारा नाम लिया जाना लाजिमी है। हमें ट्वीट्स में टैग किया जाता है। हम इस गीत का हिस्सा हैं। लेकिन यह उस समय प्रमोशनल सॉन्ग के रूप में लिया गया था।'

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Masakali 2.0 - फोटो : twitter
सिद्धार्थ मल्होत्रा इस बात से सहमत हैं कि अगर उनकी फिल्मों का कोई बुरा रीमेक बनाता तो वह भी निराश होते। उन्होंने कहा- 'लोगों के लिए कहना बहुत आसान है। हर कोई एक टीम के रूप में इसके लिए दोषी है लेकिन मैंने विभिन्न कलाकारों के कई रीमेक में काम किया है चाहे वह 'काला चश्मा' हो या 'चुल'। वे सभी मनोरंजक रहे हैं और सभी ने फैंस का दिल जीता है।'

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सिद्धार्थ मल्होत्रा
सिद्धार्थ ने कहा, 'मैं एक अभिनेता के दृष्टिकोण से सोचता हूं, अगर किसी को एक फिल्म का रीमेक बनाना हो, जिसका मैं हिस्सा रहा हूं तो निश्चित रूप से यह दुखदायी हो सकता है। तो उस मामले में लोगों का गुस्सा पूरी तरह से ठीक है। रीमिक्स का चलन खत्म हो रहा है। मुझे नहीं लगता कि दर्शकों के पास अब धैर्य है। एक श्रोता के रूप में, मैं इस विरोध से पूरी तरह से सहमत हूं।'
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masakali 2.0 - फोटो : amar ujala mumbai
बता दें मूल गाने का संगीत देने वाले एआर रहमान से लेकर गाने के बोल लिखने वाले प्रसून जोशी और गायक मोहित चौहान ने भी इसकी आलोचना की है। एआर रहमान शुरू से ही रीमिक्स गानों के खिलाफ रहे हैं। 'मसकली' गाने के रीमिक्स पर रहमान ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'अच्छा गाना बनाने का कोई शॉर्टकट नहीं है। उसे अच्छे से सोचना पड़ता है, रातों की नींद खराब करनी पड़ती है, लिखकर मिटाया जाता है और फिर से लिखा जाता है। 200 से ज्यादा संगीतज्ञों ने एक साल तक एक रचनात्मक दिमाग के साथ काम किया, तब जाकर यह रचना हुई।'
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