मनोज बाजपेयी, कहते हैं कि बस नाम ही काफी है। न कोई विशेषण और न कोई अलग से परिचय। फिल्म ‘सत्या’ का भीकू म्हात्रे आज भी बाहें पसाकर कर आवाज लगाता रहता है, ‘मुंबई का किंग कौन?’ तो पलटकर लाखों आवाजें एक साथ आती हैं, भीकू म्हात्रे। मनोज बाजपेयी को पद्मश्री मिल चुका है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी उनकी बैठक में सजे हैं। लेकिन, मुंबई आने के बाद जिस वनराई कॉलोनी के टी स्टाल पर मनोज सुबह शाम चाय पिया करते थे, वहां के लोग उन्हें अब बहुत मिस करते हैं।