madhuri dixit
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कलंक एक पीरियड फिल्म है। इससे पहले भी आप पीरियड सिनेमा का हिस्सा रह चुकी हैं, कलंक करते समय कहीं लगा कि संजय लीला भंसाली का अक्स इसमें उभर रहा है?
अगर आप देवदास की बात कर रहे हैं तो मेरा किरदार यहां काफी अलग हैं। जैसा संजय कहानी को पर्दे पर उतारते हैं, उससे काफी अलग है। हां, कलंक के निर्देशक अभिषेक बर्मन भी संजय लीला भंसाली की तरह ही हर काम परफेक्ट चाहते हैं। हर सीन को बार-बार शूट करते हैं, उनके ओके बोलने का सेट पर मौजूद हर कलाकार को इंतजार रहता है। बहुत नापतौल कर करते हैं सबकुछ।