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देश में इमरजेंसी से लेकर बार गर्ल तक, मधुर भंडारकर की इन 7 फिल्मों में दिखाए गए असल मुद्दे

Sun, 26 Aug 2018 07:41 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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madhur
डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और स्क्रिप्ट राइटर मधुर भंडारकर 26 अगस्त 1968 को अपना जन्मदिन मनाते हैं। नेशनल अवॉर्ड विनर मधुर भंडारकर की फिल्में समाज और असल मुद्दों पर आधारित होती हैं। उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक बेहतरीन फिल्में दी हैं, हम आपको उनकी ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं।
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चांदनी बार
साल 2001 में रिलीज हुई 'चांदनी बार' को 4 नेशनल अवॉर्ड मिले थे। फिल्म की कहानी मुंबई के बार में काम करने वाली लड़कियों की जिंदगी पर आधारित थी। यह फिल्म मधुर भंडारकर के करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है। 
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सत्ता
साल 2003 में रिलीज हुई सत्ता में महाराष्ट्र की सियासत को दिखाया गया था। फिल्म में मुख्य भूमिका रवीना टंडन और अतुल कुलकर्णी ने निभाया था। फिल्म को क्रिटिक्स ने काफी सराहा था हालांकि बॉक्स ऑफिस पर यह उतनी सफल नहीं रही।

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पेज 3
जर्नलिज्म, पेज 3 और हाई सोसाइटी क्लचर पर आधारित इस फिल्म से मधुर भंडारकर को दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला। 2005 में रिलीज हुई इस फिल्म में मुख्य भूमिका कोंकणाा सेन ने निभाया था। इसके अलावा अतुल कुलकर्णी और बोमन ईरानी मुख्य भूमिका में थे।
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कॉरपोरेट
मधुर भंडारकर की इस फिल्म में कॉरपोरेट की दुनिया में साजिशों और काम के तरीकों को दिखाय गया है। 2006 में रिलीज हुई फिल्म में बिपाशा बसु और केके मेनन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। बिपाशा के किरदार को इसमें काफी सराहा गया था। इसके अलावा मिनिषा लांबा, राज बब्बर और किट्टू गिडवानी भी फिल्म में अहम किरदार में थे।
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ट्रैफिक सिग्नल
साल 2007 में रिलीज हुई इस फिल्म के लिए मधुर भंडारकर को बेस्ट डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था। फिल्म में कुणाल खेमू, नीतू चंद्रा और कोंकणा सेन अहम रोल में थे। फिल्म में मधुर ने ट्रैफिक सिग्नल पर कई तरह के लोगों की जिंदगियों को दिखाया गया था।
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जेल
एक्टर नील नितिन मुकेश अभिनीत इस फिल्म में जेल के भीतर की व्यवस्था और तौर तरीकों से रूबरू कराया गया है। 2009 में रिलीज हुई इस फिल्म में मुग्धा गोडसे, मनोज बाजपेयी और आर्य बब्बर मुख्य भूमिका में थे, हालांकि बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म कुछ खास कमाल नहीं कर पाई।
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इंदु सरकार
इमरजेंसी की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म का नाम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम से लिया गया है। यह फिल्म इमरजेंसी के दौरान देश में पैदा हुए हालात, उससे लड़ते संगठनों और उन सबके बीच इंदु नाम की लड़की की लड़ाई काफी अच्छे से बुनी गई। 
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