फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांधी जी ने इस सिंगर से गाने की सिफारिश की थी, बाद में संगीत की दुनिया में ऐसे बिखेरा जादू

Tue, 11 Dec 2018 07:53 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
ms subbulakshmi - फोटो : file photo
भारत रत्न से सम्मानित एमएस सुब्बुलक्ष्मी (Madurai Shanmukhavadivu Subbulakshmi) संगीत की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। वो पहली भारतीय संगीतकार हैं जिन्हें मैग्सेसे अवॉर्ड दिया गया। सुब्बुलक्ष्मी ने आज ही के दिन यानी 11 दिसंबर 2004 को 88 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था। आगे की स्लाइड में देखिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
ms subbulakshmi - फोटो : file photo
सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। 8 साल की उम्र से ही उन्होंने कर्नाटक संगीत सीखना शुरू कर दिया था और महज 10 साल की उम्र में उनका पहला भक्ति संगीत एलबम आया। इसके बाद वो मद्रास संगीत एकेडमी चली गईं। दरअसल, इसकी बड़ी वजह यह थी कि उनका पूरा परिवार ही संगीतमय था। सुब्बुलक्ष्मी ने कर्नाटक संगीत की शिक्षा एस श्रीनिवास अय्यर से ली। वहीं उन्होंने हिंदुस्तानी संगीत की शिक्षा पंडित नारायण राव व्यास से सीखी। 
विज्ञापन

3 of 5
ms subbulakshmi - फोटो : file photo
साल 1936 में सुब्बुलक्ष्मी की मुलाकात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सदाशिवम से हुई। सदाशिवम पहले से शादीशुदा थे। पहली पत्नी के निधन के बाद सदाशिवम ने 1940 में सुब्बुलक्ष्मी से शादी की। कहा जाता है सुब्बुलक्ष्मी के करियर में सदाशिवम का अहम रोल था। सुब्बुलक्ष्मी को गाते हुए तो सभी ने सुना लेकिन कम ही लोगों को पता है कि उन्होंने फिल्मों में एक्टिंग भी की है।

4 of 5
ms subbulakshmi - फोटो : file photo
सुब्बुलक्ष्मी ने तमिल फिल्मों में एक्टिंग की। उनकी पहली फिल्म सेवासदनमय साल 1938 में रिलीज हुई। फिल्म मीरा में उन्होंने मीराबाई का किरदार निभाया। कुछ समय बाद उन्होंने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया और केवल गाने पर ध्यान देने लगीं। सुब्बुलक्ष्मी ने पूरे जीवन में जितना कमाया उतना ही दान करने में भी यकीन रखती थीं। कहा जाता है वो सामाजिक कार्यों में दान के लिए ज्यादा से ज्यादा कॉन्सर्ट करती थीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ms subbulakshmi - फोटो : file photo
एमएस सुब्बुलक्ष्मी से जुड़ा एक किस्सा मशहूर है कि जब महात्मा गांधी ने उनसे भजन गाने का निवेदन किया। साल 1940 में सुब्बुलक्ष्मी को एक समारोह में आमंत्रित किया गया। यहां महात्मा गांधी भी आए थे। समारोह में 'हरि तुम हरो जन की पीर' भजन गाना था। सुब्बुलक्ष्मी को ठीक से हिन्दी नहीं आती थी। पहले तो उन्होंने गाने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि जिसे ठीक से हिन्दी आती हो उसे ही ये गाना चाहिए। तब गांधी जी ने उनसे कहा कि 'अगर आप केवल पढ़ भी देंगी तो ये और सुरीला हो जाएगा।' ऐसे में भला सुब्बुलक्ष्मी कैसे मना करतीं और उन्होंने गांधी जी के इस पसंदीदा भजन को गाया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें