जंजीर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जावेद अख्तर बताते हैं, ‘फिल्म ‘जंजीर’ के हिट होने के बाद हमें नौ महीने तक कोई काम नहीं मिला। इसी दौरान एक पार्टी में एक निर्माता ने उनसे बात की और ये पता चलने पर कि हमारे पास एक तैयार स्क्रिप्ट है, उन्होंने अगले दिन दफ्तर आने को कहा। मैंने कहानी सुनाने से पहले ही अपनी फीस इसलिए बता दी ताकि निर्माता बाद में ये न कह सकें कि कहानी पसंद आने के चलते मैंने फीस बढ़ा चढ़ाकर बता दी है। जैसे ही मैंने उन्हें अपनी फीस बताई, वह चुप हो गए। लंबे सन्नाटे के बाद उन्होंने घंटी बजाई और दफ्तर के एक कर्मचारी से अपने पार्टनर को बुलाने को कहा।’