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कभी अमिताभ से मिलने को पहनी थी 50 रुपये की शर्ट, आज इनके गीतों से फिल्में बनती हैं 'बाहुबली'

Tue, 06 Feb 2018 09:12 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला़
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Manoj And Amitabh
गीतकार मनोज मुंतशिर ने अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में अपनी लेखनी और शायरी से जुड़ी तमाम बाते की। साथ ही जीवन से जुड़े कुछ अनुभवों को भी शेयर किया। इतना ही नहीं मनोज ने ये भी बयाता कि उनके इस सफर की शुरुआत कैसे हुई।
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Manoj Muntshir
चलिए आपको भी मनोज के इस सफर से रूबरू करवाते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि मनोज ने फिल्मों में लिखने का सिलसिला फिल्म 'द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई' से शुरू हुआ लेकिन इनको पहचान फिल्म 'एक विलेन' के सॉन्ग 'तेरी गलिया' से मिली। ये गाना आज भी नौजवानों की जुबां पर रटा हुआ है। 
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Manoj Muntshir
इंटरव्यू में जब मनोज से उनके इस सफर की शुरुआत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया था कि वे अपने मां-बाप के साथ एक रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े थे जहां उन्हें एक बुक स्टॉल दिखा और उन्होंने वहां किसी शायर की वो किताब खरीदने की जिद की। उस वक्त मनोज की उम्र लगभग 6 से 7 साल थी।

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Manoj Muntshir
आगे उन्होंने ये भी बताया कि वे ग्रेजुएट होने के बाद एक बार फिर एक रेलवे प्लेटफॉर्म पर गाड़ी खराब होने के कारण उनको रुकना पड़ा। जहां उनकी नजर फिर एक बुक स्टॉल पर पड़ी। ऐसे में ये सिलसिला आगे बढ़ा और मनोज का इस ओर रुझान बढ़ता ही चला गया और वे अपन इस शौक के चलते आज इस मुकाम तक पहुंचे।
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Manoj Munshir
आपको बता दें कि मनोज ने ही ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बाहुबली 2' के गीत 'गली-गली तेरी राह चली जियो रे बाहुबली' अपनी कलम से पिरोया है। इतना ही नहीं मनोज ने 'तेरे संग यारा', मैं फिर भी तुमको चाहूंगा, कौन तुझे यूं प्यार करेगा, तेरी गलियां जैसे सुपरहिट गाने लिखे हैं। शायद ही आपको पता हो कि राहत फतेह अली खान का 'तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी' और 'मेरे रश्के कमर' का नया वर्जन भी मनोज ने ही लिखा है। 
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