लता मंगेशकर अगर आज हमारे बीच होतीं तो अपना 94वां जन्मदिन मना रही होतीं। लेकिन, वक्त ने इस वर्ष फरवरी में स्वर कोकिला को हमसे छीन लिया। भले ही सशरीर लता दीदी आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज आज भी हमारे मन को तर करती है। उनके गाए गीतों के सहारे प्रशंसक हर पल उन्हें अपने करीब महसूस करते हैं। दिवंगत लता दीदी की आवाज ही उनकी पहचान बन गई और यह बनी रहेगी। सुरीला कंठ उन्हें कुदरती रूप से उपहार में मिला था। लेकिन, हैरानी की बात है कि जिन लता जी की गायिकी की दुनिया दीवानी है, वह अपने पिता के सामने गाना नहीं गा पाती थीं।