Kunal Khemu: कुणाल खेमू ने बताया है कि वह अपनी बेटी की परवरिश कैसे करते हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि वह दूसरे धर्म की अपनी पत्नी से कैसे तालमेल बिठाते हैं।
एक्टर कुणाल खेमू ने अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू की परवरिश के सफर के बारे में बात की है। बातचीत में कुणाल ने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी पत्नी सोहा अली खान के साथ मिलकर हमेशा लोगों की राय या समाज की उम्मीदों की परवाह किए बिना, अपने तरीके से बेटी की परवरिश की है। यह सफर सहज समझ, आपसी सम्मान और दो धर्मों के खूबसूरत मेल का है।
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परिवार के साथ कुणाल खेमू
- फोटो : सोशल मीडिया
कुणाल को समझती हैं सोहा
कुणाल खेमू की शादी जनवरी 2015 में सोहा अली खान से हुई थी। उन्होंने कहा कि इस कपल ने कभी भी बाहरी बातों को इनाया की परवरिश पर असर नहीं डालने दिया। इनाया इस साल नौ साल की हो जाएंगी। कुणाल ने आइएनएस को बताया 'हमने हमेशा अपनी सहज समझ से काम लिया है। अच्छी बात यह है कि मुझे एक दोस्त, एक पार्टनर और अब एक पत्नी मिली है, जो समझती है कि मैं सहज समझ से चलने वाला इंसान हूं और वह भी वैसी ही है।'
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परिवार के साथ कुणाल खेमू
- फोटो : सोशल मीडिया
बेरी की परवरिश पर बोले कुणाल खेमू
कुणाल खेमू ने बेटी की परवरिश के बारे में कहा 'जहां तक परवरिश की बात है, अब हमें थोड़ा अनुभव हो गया है। वह (इनाया) इस साल नौ साल की हो जाएगी। मगर हमने जो कुछ भी सही समझा, उसे अपनी सहज समझ से किया। यह एक ऐसा सफर रहा है, जिसे लोगों ने पसंद किया है। लेकिन हमने कभी इस बारे में नहीं सोचा कि लोग क्या सोचेंगे। इस सफर में कुछ लोगों को बुरा भी लगा, कुछ लोगों को कुछ बातें पसंद नहीं आईं। लेकिन कोई बात नहीं। मुझे लगता है कि आप अपनी जिंदगी कैसे जीते हैं, यह आपके हाथ में है।'
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सोहा अली खान-कुणाल खेमू
- फोटो : इंस्टाग्राम
जो सही लगता है वही करते हैं
कुणाल ने आगे कहा 'हमने कभी भी यह सोचकर कुछ नहीं किया कि 'चलो यह करते हैं क्योंकि इससे हम बेहतर दिखेंगे' या इसलिए कि लोग समाज में क्या सोचेंगे कि हम सही कर रहे हैं या गलत। एक पेरेंट के तौर पर, वह वही करती हैं, जो उन्हें सही लगता है। मैं वही करता हूं जो मुझे सही लगता है।'
पैरेंट ने बेटी को दिया तोहफा
आपको बता दें कि सोहा अली खान मुस्लिम बैकग्राउंड से हैं, जबकि कुणाल हिंदू परिवार से हैं। इस बात को मुश्किल बनाने के बजाय, कपल ने इसे इनाया के लिए सबसे अच्छे तोहफों में से एक बना दिया है। ईद और क्रिसमस से लेकर दिवाली और महाशिवरात्रि तक, परिवार हर त्योहार को उतने ही प्यार और उत्साह के साथ मनाता है, ताकि उनकी बेटी दोनों परंपराओं की खूबियों को अपनाते हुए बड़ी हो।