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आज की फिल्मों में खत्म हो रही हैं प्रेम कहानियां !, जानें इससे पहले ऐसा और कब हुआ

Mon, 27 Jan 2020 10:39 PM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
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bollywood movies - फोटो : social media
हिन्दी सिनेमा में सालों तक प्रेम कहानियां फिल्म की 'रीढ़ की हड्डी' रही हैं। कहानी के खत्म होते-होते हीरो हीरोइन से मिल ही जाता है। बीच में कोई गुंडा या विलेन होता है या लड़की के पिताजी गले की हड्डी बन जाते हैं। 'मुगल-ए-आजम' में शहंशाह अकबर ने अनारकली और सलीम के प्यार में खूब रोड़े अटकाए, लेकिन इसके बावजूद हीरो हीरोइन मिले, पेड़ के आसपास गाना गाए और देखते-देखते तीन घंटे बीत गए- द एंड। लेकिन अब इस प्यार को लग गया है झटका।
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bollywood movies - फोटो : social media
2019 में आई फिल्मों पर ध्यान दीजिए। 'उरी' एक वॉर फिल्म है। ऋतिक रोशन की 'वॉर' में फिल्म के नाम से ही पता चल जाता है कि आख़िर मुख्य कहानी क्या है। ऐसा नहीं है कि इन फिल्मों से प्यार पूरी तरह गायब था लेकिन कहानी का प्लॉट कुछ और ही था। यानी लोगों को अगर सिनेमा हॉल तक लाना है तो सिर्फ प्यार से काम नहीं चलेगा। और भी उदाहरण हैं जैसे ऋतिक रोशन की 'सुपर 30', अक्षय कुमार की 'मिशन मंगल', जॉन अब्राहम की 'बाटल हाउस', रानी मुखर्जी की 'मर्दानी' और आयुष्मान खुराना की 'आर्टिकल 15'। इन सब के पोस्टर्स से नायक या नायिका गायब थे।
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bollywood movies - फोटो : amar ujala
इसका एक कारण ये भी है कि अब साउथ की फिल्मों को हिन्दी में बनाने का चलन जोरों पर है और वहां बहुत सारा एक्शन होता है । एक और कारण ये भी है कि अब लोगों की जिंदगी की कहानी बड़े पर्दे पर दिखाई जा रही हैं । पिछले कई सालों से बायोपिक बहुत कामयाब हुईं जैसे 'भाग मिल्खा भाग', 'मेरी कॉम', 'डर्टी पिक्चर' और 'संजू'। अब 2020 में आने वाली फिल्मों को ही ले लीजिए । दीपिका की 'छपाक', कंगना की 'पंगा', और आमिर खान की 'लाल सिंह चड्ढा' के पोस्टर्स में प्यार मोहब्बत का नामों निशान है ही नहीं।

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बॉलीवुड का क्रिकेट कनेक्शन - फोटो : सोशल मीडिया
ये आम लोगों की कहानियां हैं जो उनका व्यक्तित्व बयान करती हैं। रणवीर सिंह की '83' भारत के साल 1983 में क्रिकेट विश्व कप की जीत पर आधारित है तो वहीं कंगना की 'थलइवा' एक मशहूर नेता की कहानी है। ऐसा नहीं है कि प्यार को झटका पहली बार लगा है। 70 और 80 के दशक में अमिताभ बच्चन के अवतार में आया 'एंग्री यंग मैन' और उनकी फिल्म 'कालिया',' जंजीर', 'त्रिशूल' जैसी फिल्मों में प्यार की कहानी थी तो जरूर पर साइड ट्रैक पर चलती रही।
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bollywood movies - फोटो : social media
80 के दशक के खत्म होते होते फिर प्यार की कहनियों ने वापसी की और 'मैने प्यार किया' और 'कयामत से कयामत तक' जैसी फिल्मों के साथ इसकी शुरुआत की। इन दोनों दशकों में जहाँ सुनहरे पर्दे पर 'एंग्री यंग मैन' की छवि बनी तो उसके साथ ही आए सिनेमा के सबसे मशहूर विलन 'गब्बर सिंह', 'लॉयन' और 'शाकाल'। हिन्दी सिनेमा का रुझान 90 के दशक में प्यार की तरफ रहा।
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bollywood movies - फोटो : amar ujala
दर्शकों ने 'हम आपके हैं कौन', 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे', 'दिल तो पागल है' और 'कुछ कुछ होता है' जैसी फिल्मों को बहुत पसंद किया। पर 2010 के बाद सलमान खान की 'दबंग', रोहित शेट्टी की 'सिंघम' और अक्षय कुमार की ढेर सारी देश भक्ति से सराबोर फिल्मों से एक बार फिर एक्शन ने अपनी पकड़ मजबूत की। पर एक्शन कितनी देर तक हिंदी सिनेमा में बना रहेगा ये सब फिल्मों के शौकीनों पर निर्भर करता है जिनकी रूचि सिनेमा को लेकर निरंतर बदलती रहती है।

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