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Kiran Juneja: हर कोई नहीं बना सकता है शोले, जानिए महाभारत की गंगा ने क्यों कहा ऐसा

Wed, 08 Feb 2023 07:29 AM IST
पलक शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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किरन जुनेजा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किरन जुनेजा ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। उन्होंने कई धारावाहिकों और फिल्मों में काम किया,लेकिन आज भी लोग उन्हें 'महाभारत' की गंगा के रूप में ज्यादा जानते हैं। महाभारत में किरन जुनेजा को पहले गांधारी का रोल ऑफर कर दिया था, लेकिन उन्होंने यह रोल करने से मना कर दिया था, उसके बाद उन्हें गंगा की भूमिका निभाने का मौका मिला। अपने जन्मदिन की पूर्व संध्या पर किरन जुनेजा ने अमर उजाला से खास बातचीत की 
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किरन जुनेजा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनय में आप की शुरुआत इंडो इटैलियन फिल्म 'शाहीन' से हुई थी?
शुरुआत तो मेरी मॉडलिंग से हुई थी, उसके बाद 'शाहीन' का ऑफर आया था, उस फिल्म में काम करने का बहुत अच्छा अनुभव रहा है। हालांकि वह फिल्म इंडिया में रिलीज नहीं हुई थी। फिल्म का विषय भी भारत और पाकिस्तान की जड़ों से जुड़ी हुई थी। उस फिल्म के ज्यादातर एक्टर इटेलियन थे और निर्देशक खालिद अल सिद्दीकी कुबैत के थे। एक तरह देखा जाए तो फिल्म की पूरी टीम ही  इंटरनेशनल थी। विदेशो में इस फिल्म को काफी सराहा गया था। 
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किरन जुनेजा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
उसके बाद फिर राजश्री प्रोडक्शन के साथ आप का जुड़ना हुआ?
जी हां, राजश्री प्रोडक्शन के धारावाहिक 'पेइंग गेस्ट' से मेरी टीवी पर शुरुआत हुई थी। इस सीरियल के हर एपिसोड की अलग अलग कहानी थी, उसमे से एक एपिसोड में मैंने काम किया था। उस समय सीरियल की शुरुआत ही हो रही थी। बचपन से मैं स्कूल और कॉलेज में एक्टिंग करती रहती थी, मैंने  ;आषाढ़ का एक दिन; जैसे कई नाटक किए।  कहीं ना कहीं एक्टिंग का शौक तो था ही। जब एक्टिंग का ऑफर आया तो अच्छा लगा, क्योंकि मॉडलिंग में मेरी शुरुआत तो हो ही गई थी। उस समय के जितने भी बड़े बड़े ब्रांड थे सब कर लिया था, तो कहीं ना कहीं एक बोरियत सी आ गई थी कि अब कुछ नया करना चाहिए। हालांकि थिएटर करने का मुझे बहुत शौक रहा,लेकिन मुंबई में कभी थिएटर नहीं कर पाई। क्योंकि मॉडलिंग की वजह से ट्रैवलिंग बहुत होती थी। थिएटर के लिए तो समय देना पड़ता है। हालांकि की मुंबई मैं एक्टिंग करने की सोच कर नहीं आई थी।

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किरन जुनेजा - फोटो : social media
जब आप एक्टिंग करने की सोच कर नहीं आई तो फिर एक्टिंग का सिलसिला कैसे बना?
इसे आप मेरी किस्मत कह सकते हैं। दिल्ली में मॉडलिंग की शुरुआत कॉलेज के दिनों में ही  हो गई थी। वहां भी ऐसे ही था कि एक एजेंसी ने अप्रोच  किया फिर मॉडलिंग का सिलसिला शुरू हुआ। दिल्ली में मॉडलिंग करते करते फैशन शो के लिए मुंबई आ गई। दिल्ली में मॉडलिंग के दौरान ही मुंबई के कुछ मॉडलिंग एजेंसी से संपर्क बन गया था तो मॉडलिंग का सिलसिला यहां भी शुरू हो गया। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि मॉडलिंग करते करते बोर होने लगी थी, फिर जैसा ही एक्टिंग का मौका मिला तो सोचा कि इसमें भी एक बार कोशिश करनी चाहिए। 
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किरन जुनेजा - फोटो : social media
आप के पिताजी डॉक्टर थे, उन्होंने यह नहीं कहा कि कहां जा रही हो डॉक्टरी करो?
नहीं, डैड ने ऐसा कुछ नहीं कहा, वह थोड़े से आधुनिक सोच के इंसान था। लेकिन हां, उस जमाने में लड़कियों का ग्लैमर के क्षेत्र में आना थोड़ा सा गलत माना जाता था। मेरी जिंदगी में जो भी हुआ वह बहुत धीरे धीरे हुआ। डैड का यह जरूर कहना था कि पहले पढ़ाई पूरी कर लो। पढ़ाई के दौरान ही मॉडलिंग में शुरुआत हो गई थी तो वह कहने लगे  कि अगर यह सब पढ़ाई के बाद करो तो बेहतर होगा। उस समय एक्टिंग के बारे में कुछ सोचा ही नहीं था और ना ही उनको कभी एक्टिंग के बारे में कहा ही था, उनको भी नहीं लग रहा था कि मैं कभी एक्टिंग के फील्ड में भी आ सकती हूं।
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किरन जुनेजा - फोटो : social media
'महाभारत' से कैसे जुड़ना हुआ?
उस समय मैं  'बुनियाद'  कर रही थी। बी आर चोपड़ा साहब को मैं जानती थी। एक दिन वहां से फोन आया कि महाभारत में एक बहुत अच्छा सा रोल है, हम चाहते हैं कि आप वह करें। उन्होंने पहले मुझे गांधारी की भूमिका के लिए कहा था, लेकिन उन दिनों 'बुनियाद' कर रही थी तो गांधारी की भूमिका के लिए समय निकाल पाना मेरे लिए संभव नहीं था। क्योंकि वह लंबा रोल था, तो मैने मना कर दिया और बात वहीं खत्म हो गई।  दो महीने के बाद फिर बी आर चोपड़ा के ऑफिस से फोन आया और चोपड़ा जी ने कहा, 'तुम्हारे लिए मैंने बहुत ही खूबसूरत रोल सोचा है। यह छोटा सा रोल है जो शुरू रात में आता है और तुम्हारा काम ज्यादातर एक ही शेड्यूल में पूरी हो जाएगा।'  इस तरह से 'महाभारत' में गंगा बनने का मौका मिला।
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किरन जुनेजा - फोटो : social media
लेकिन बाद में गंगा का रोल बढ़ा भी दिया गया?
गंगा का किरदार लोकप्रिय हुआ तो फिर बी आर चोपड़ा के यहां से  फोन आया और बताया गया कि आप का किरदार बढ़ा दिया गया है,अब आप का बेटा बडा हो गया है तो आप आती हो और उससे बात करती हूं। 'बुनियाद' में उम्र दराज महिला का किरदार निभा ही रही थी, इस तरह के उम्र दराज महिला का किरदार नहीं निभाना चाह रही थी।  मुझे लगा कि बेटा बड़ा हो गया है तो मां बूढी हो गई होगी, तो मैने मना कर दिया। फिर बी आर चोपड़ा साहब ने समझाया कि आप तो गंगा हो, आप क्यों बूढ़ी होंगी, आप की तो वहीं उम्र होगी। फिर मैं तैयार होकर गई, उस समय मैं ग्लैमरस दिख रही थी और मेरा बेटा मेरे सामने बूढ़ा दिख रहा था ।

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किरन जुनेजा - फोटो : social media
बी आर चोपड़ा के  'महाभारत' के बाद और भी कई महाभारत बने,लेकिन वो दर्शको से उतने कनेक्ट नहीं हो पाए, इसकी क्या वजह मानती हैं आप?
कभी कभी तुलना करना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगर आप कहें कि हर कोई 'शोले' बना ले तो नहीं बना पाएगा। जो चीज एक बार बन जाती है, दोबारा वैसा नहीं बन पाती। 'महाभारत' की लोगों के दिमाग में एक बार जो छाप पड़ गई वो पड़ गई। जब आप किसी और से तुलना करने जाएंगे तो नही कर पाएंगे और तुलना करना भी नहीं चाहिए, वह गलत है।

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'बुनियाद' की ही बात करें तो, उस दौर में जिस तरह से धारावाहिक बनते थे आज नहीं बन पा रहे हैं, इसकी क्या वजह मानती हैं आप?
ऐसा नहीं है कि अच्छे सीरियल नहीं बन रहे हैं। आज लोगों के पास चॉइस बहुत हो गई है। कोई कुछ देख रहा है तो कोई कुछ और देख रहा है। अब ओटीटी प्लेटफार्म आ गए हैं, इस पर जब आप का मन करे तब देख लो।ओटीटी प्लेटफार्म की सीरीज भी आजकल फिल्मों की तरह ही शूट की जाती हैं। थोड़ा जमा कर, सोच विचार कर, आराम से। एक कलाकार को भी समय मिलता है, कुछ सोचने के लिए, जिससे वह उसमे अपना कुछ इनपुट डाल सके। जबकि सीरियल में तो काफी प्रेशर होता है, चाहे वह निर्देशक हो,प्रोड्यूसर हो, कलाकार हो या फिर दूसरे टेकनीसियन, खास करके अगर डेली सोप सीरियल हुआ तो। टीवी के भी बहुत सारे सीरियल दूसरे दिन यूट्यूब पर आ जाते हैं। उस पर भी आप कभी भी देख सकते हैं। जो पहले का दौर था अब तो वह वापस आएगा नहीं,वह अपना दौर था और आज अपना एक अलग दौर चल रहा है।

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किरन जुनेजा - फोटो : social media
फिल्मों का चुनाव आप बहुत ही गिनी चुनी करती हैं, चाहे वो 'जमाना दीवाना', 'बंटी बबली', फिर 'कृष' या फिर 'बदमाश कंपनी' जैसी फिल्में हो?
मैं बहुत ही सोच समझकर फिल्मे करती हूं। अगर मुझे मेरा रोल और डायरेक्टर अच्छा लगा तो ही कोई फिल्म करती हूं। अगर चीजे समझ में आ है तो तुरंत फैसला कर लेती हूं। आज के कलाकार अपने काम पर बहुत ही फोकस करते हैं। अपने काम के प्रति बहुत ही समर्पित हैं। आज के एक्टर की खासियत यह है कि एक समय में एक ही फिल्म करते हैं तो सब्जेक्ट पर उनका पूरा फोकस होता है। पहले के एक्टर तो एक दिन में दो- दो फिल्मों की शूटिंग करते थे। एक फिल्म की शूटिंग कुछ किरदार तो दूसरे सेट पर कोई दूसरा किरदार निभा रहे होते हैं। आज के चाहे निर्देशक हो या एक्टर उनका फोकस एक बार सिर्फ एक ही सब्जेक्ट पर होता है, मेरी कोशिश यही रहती कि ऐसे लोगों के साथ ही जुड़कर काम करूं। 

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किरन जुनेजा - फोटो : social media
इन्ही फिल्मों के साथ 'खोसला का घोसला' का चर्चा ना हो तो बात थोड़ी सी अधूरी सी लगती है, इस फिल्म से जुड़ा कोई खास किस्सा शेयर करना चाहें?
इस फिल्म का बड़ा अजीब सा किस्सा यह है कि फिल्म के जो निर्देशक दिबाकर बनर्जी थे, पहले एड फिल्में बना चुके थे। 'खोसला का घोसला'  उनकी पहली हिंदी फिल्म थी। मैं और रमेश जी किसी कार्यक्रम के लिए शाम को निकल रहे थे तभी उनका अचानक से फोन आया। उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा, 'क्या मैं मिल सकता हूं।' मैंने उन्हें कहा कि दो दिन के बाद मेरे सेक्रेटरी आप को फोन कर लेंगे। उन्होंने कहा, 'मैडम, मै दिल्ली का हूं और वापस जा रहा हूं क्या हम आज सिर्फ आधे घंटे के मिल सकते हैं।', फिर मैंने रमेश जी से बात की उन्होंने कहा, 'कोई बात नहीं मिल लो।' वह आए और जब उन्होंने कहानी सुनाई तो मुझे लगा कि यह कुछ अलग है और अच्छा बनेगा। 
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'खोसला का घोसला' के सेट पर आप को  एक और डायरेक्टर मिल गया ?
जी, शायद आप का इशारा प्रवीन डबास की तरफ है। उनकी फिल्म 'सही धंधे गलत बंदे' में काम किया था। दरअसल,  जब मैंने  'खोसला का घोसला'  में काम किया था तभी प्रवीन डबास  को कह दिया था कि तुम्हें डायरेक्टर बनना चाहिए क्योंकि जिस तरह से शूटिंग के दौरान वह अपना सुझाव देते थे,बात करते थे,मुझे लगा था कि उनके अंदर निर्देशक बनने की क्षमता है। जब उन्होंने शुरू की तो सबसे पहले मेरे ही पास आए और मुझे याद दिलाया कि उनके बारे में मैंने ऐसा बोला था।'सही धंधे गलत बंदे' में मैंने चीफ मिनिस्टर का किरदार निभाया था। 
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