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Kathmandu Connection Review: अमित सियाल की दमदार अदाकारी लेकिन जमा नहीं सोनी लिव की अपराध कथा का रंग

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काठमांडू कनेक्शन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज रिव्यू: काठमांडू कनेक्शन
लेखक: सिद्धार्थ मिश्रा
निर्देशक: सचिन पाठक
कलाकार: अमित सियाल, अक्षा परदसनी, अंशुमान पुष्कर, गोपाल दत्त, विक्रम सिंह और जाकिर हुसैन
रेटिंग: **

ओटीटी की दुनिया में सोनी लिव का बड़ा नाम हुआ है ‘स्कैम 1992’ और ‘गुल्लक’ जैसी वेब सीरीज से। लेकिन, इस ओटीटी के साथ भी दिक्कत वही होती जा रही है जो अमेजन प्राइम वीडियो और नेटफ्लिक्स के साथ दिख रही है। ये दिक्कत है चेहरा देखकर पुड़िया बांधने की। जार पिक्चर्स वाले अजय राय ने सोनी लिव को भले तीन लाइनों की कहानी सुनाकर पुड़िया बांध दी हो लेकिन छह एपीसोड की इस वेब सीरीज में ऐसा कुछ है नहीं कि ये पुड़िया आखिर तक बंधी रहे। दो तीन एपीसोड में ही दर्शक हांफ जाता है। उसके बाद न लेखक को समझ आता है कि वह इतने ऊंचे ताने गए तंबू के बांस (टेंट पोल) वापस कैसे समेटे, न निर्देशक को कहानी का विस्तार समेटने में अपनी टीम से कोई मदद मिलती है।
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काठमांडू कनेक्शन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘काठमांडू कनेक्शन’ का ट्रेलर अगर आपने देखा है तो इस सीरीज को देखने की उत्सुकता भी आपकी सबकी जैसी ही रही होगी। सब देखना चाहते थे कि आखिर पूरे देश को हिला देने वाले बम धमाकों की तफ्तीश करने वाले अधिकारी की हत्या का काठमांडू कनेक्शन क्या है? बीच में एक होटल कारोबारी के अपहरण की गुत्थी है और एक टीवी पत्रकार को मिलने वाली फोन कॉल्स का भी गड़बड़झाला है। कुल मिलाकर माहौल बहुत अच्छा सजाया गया लेकिन कहानी के इस सार का विस्तार करने में इसके लेखक सिद्धार्थ मिश्रा फिर लडख़ड़ा गए। सिद्धार्थ ने इससे पहले ‘रंगबाज’ सीरीज में बड़ा मौका पाया था। लेकिन, वहां लगा तुक्का यहां तीर नहीं बन पाया। वेब सीरीज का विषय इस बार भी बहुत दिलचस्प उन्होंने चुना लेकिन अपराध कथाओं का ताना बाना बुनने के लिए अभी उन्हें और पढ़ना चाहिए।
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काठमांडू कनेक्शन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
निर्देशक सचिन पाठक का लचर निर्देशन वेब सीरीज ‘काठमांडू कनेक्शन’ को और बोरिंग बनाता है। निर्देशक ने यहां कहानी के छह हिस्से पहले से सोचे नहीं हैं। जहां कहानी एक एपीसोड भर की हो गई, वहीं उन्होंने उसको रोक दिया है। लेखन से बड़ी ये निर्देशन की गलती है। कहानी की शुरूआत बहुत ही दमदार तरीके से वह करते हैं, पहला एपीसोड देखकर लगता भी है कि एक अच्छी अपराध कथा इस सप्ताहांत देखने को मिली है, लेकिन तीसरे एपीसोड तक आते आते ही मामला ढीला पड़ जाता है। वेब सीरीज के संवाद भी अपेक्षित माहौल बनाने में निर्देशक की मदद नहीं कर पाते हैं।

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काठमांडू कनेक्शन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘काठमांडू कनेक्शन’ का पूरा दारोमदार इसकी लेखन शैली पर ही इसके निर्माता ने टिकाए रखा है। सितारे बहुत नामचीन नहीं हैं। अमित सियाल अपनी तरफ से किरदार की संजीदगी बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं, उनका काम भी शानदार है लेकिन कहानी के दूसरे ट्रैक उनके किरदार को कमजोर कर देते हैं। एक पुलिस अफसर और एक टीवी जर्नलिस्ट के ऐसे रिश्ते वेब सीरीज में अब बहुत घिस चुके हैं। लेखकों को इन पेशों के कुछ नए रंग तलाशने चाहिए। अमित सियाल के सहारे ही ये सीरीज घसीटने की पूरी कोशिश इसके मेकर्स करते हैं, लेकिन मामला जम नहीं पाता। सीरीज के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है अक्षा परदसनी की कास्टिंग। उनकी जगह किसी अनुभवी अभिनेत्री को लेने से सीरीज का कलेवर बदल सकता था।
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काठमांडू कनेक्शन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तकनीकी रूप से भी वेब सीरीज ‘काठमांडू कनेक्शन’ खास आकर्षित नहीं कर पाती। ‘ओए लकी लकी ओए’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ फेम स्नेहा खानविलकर का नाम किसी वेब सीरीज के म्यूजिक डिपार्टमेंट के साथ देखना कौतुहल तो जगाता है लेकिन सीरीज में ऐसा कुछ वह रच नहीं पाई हैं, जो सीरीज खत्म होने के बाद जेहन में अटका रह जाए। अरुण पांडे की सिनेमैटोग्राफी और निखिल परिहार की एडीटिंग भी औसत ही है, दोनों ने अपनी तरफ से कुछ ऐसा खास नहीं किया जो वेब सीरीज में वैल्यू एडीशन समझा जाए।
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