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बकरवालों की जिंदगी दिखाएगी 'करीम मोहम्मद', पता चलेगा कैसे करते हैं फौज की मदद

Thu, 16 Aug 2018 10:41 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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बकरवाल
इस साल कठुआ में एक शर्मनाक रेप केस के बाद देश की नजरें कश्मीर के पहाड़ों पर रहने वाली बकरवाल जनजाति पर गई। इस घुमंतु जनजाति के लोगों को लेकर निर्देशक पवन शर्मा इस महीने अपनी फिल्म 'करीम मोहम्मद' लेकर आ रहे हैं। यह उनकी पहली फिल्म है। फिल्म में यशपाल शर्मा, हर्षित राजावत, जूही सिंह और राजेश जैस ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
 
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मूल रूप से मंडी हिमाचल प्रदेश के निवासी पवन शर्मा इससे पहले दूरदर्शन के लिए कई धारवाहिकों का निर्माण कर चुके हैं। जिनके विषय मुख्य रूप से पहाड़ों और कश्मीर को लेकर रहे हैं। उन्होंने अपनी पहली फिल्म के लिए भी कश्मीर के पहाड़ों पर रहने वाली जानजाति की कहानी ही चुनी। फिल्म का निर्माण रवींद्र राजावत ने किया है।



 
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अमर उजाला से बातचीत में पवन शर्मा ने बताया कि 'करीम मोहम्मद' का कठुआ रेप केस से कोई संबंध नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि फिल्म हादसे के बाद सामने आए बकरवाल समुदाय के लोगों के जीवन पर रोशनी डालती है। शर्मा के अनुसार यह घुमंतु जाति देशभक्त है और पहाड़ों की जिन ऊंचाइयों पर फौज के लोग नहीं जा पाते, ये लोग वहां तक जाते हैं। वहां ये पाकिस्तान प्रायोजित आंतकी गतिविधियों पर न केवल नजर रखते हैं बल्कि कई बार फौज को अहम सूचनाएं भी देते हैं। 

 

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शर्मा ने बताया कि करीम मोहम्मद की कहानी खून का एक कतरा दिखाए बिना आतंकवाद के सवालों से जूझती है। फिल्म में एक बच्चे 'करीम मोहम्मद' की नजर से आतंकवाद के विरुद्ध सवाल खड़े किए गए हैं। इसलिए लिहाज से यह यूनिवर्सल फिल्म है। यही कारण है कि 'करीम मोहम्मद' को देश-विदेश के दर्जन भर फिल्म समारोहों में पुरस्कृत किया गया है। 



 
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पवन शर्मा ने कहा, 'कश्मीर को पूरी दुनिया में अशांत क्षेत्र के रूप में बदनाम किया गया है और इसे मुस्लिमों को जोड़ा गया है। यह गलत है क्योंकि आतंक का कोई चेहरा नहीं होता और उसकी कोई एक जगह नहीं होती। समस्या तो अमेरिका, चीन और सीरिया में भी है। फिर सिर्फ कश्मीर की बात क्यों होती है। उन्होंने कहा कि  फिल्म करीम मोहम्मद उन कश्मीरी लोगों की कहानी कहती है, जो अच्छे हैं। जिनका दर्द हमने कभी देखा नहीं। 

 
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karim mohmmed
बकरवाल ऐसा ही समुदाय है जिसके लोग मिलिट्री की मदद के लिए 14 हजार फीट की ऊंचाई तक जाते हैं। ताकि आतंकियों पर नजर रखें। उनकी खबरें ला सकें। ये लोग वहां सरहद के जवानों की तरह खड़े होते हैं। पवन शर्मा ने फिल्म बनाने के लिए उन जगहों पर जाकर शोध किया, उन लोगों से मिले। उन्होंने बताया कि देश के लिए मर मिटने वाले ये लोग खुद कई बार आतंकियों के शिकार हो जाते हैं। इनका खाना और पशु छीन लिए जाते हैं। बहु-बेटियों को बेइज्जत किया जाता है। इन्हें मार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समुदाय को सामने लाना मीडिया और फिल्मकारों का फर्ज बनता है। सिर्फ कश्मीर की समस्याग्रस्त बातें दिखाना ही सही नहीं है।
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