कंगना रणौत
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इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कंगना कहती हैं, 'मेरी भारत सरकार से गुजारिश है कि इस्रायल की तरह यहां भी हर युवा के लिए आर्मी में सेवा देना अनिवार्य कर दें। हम भी करना चाहते हैं, हम भी करेंगे। जिस भी धर्म की किताब में लिखा है कि उसी धर्म के लोग आपके अपने हैं केवल वही इंसान हैं बाकी सब मायने ही नहीं रखते, उसको हटा दीजिए उन किताबों में से। अंत में कंगना कहती हैं कि चाहे आप किसी भी धर्म के हैं चाहे जैन, इस्लाम, सिख, आपके लिए सर्वोपरि धर्म होना चाहिए भारतीयता का। हमारा-आपका जो संबंध है देश के नागरिक होने का वह सर्वोपरि होना चाहिए, इंसानियत का नाता सर्वोपरि होना चाहिए। हम भारतीय एक-दूसरे के लिए मायने रखते हैं, जब हम आगे बढ़ेंगे तब देश आगे बढ़ेगा। जय हिंद।'