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Kamal Amrohi: पूरी फिल्मी है अमरोहा के अमीर हैदर की कहानी, जानिए पाकिस्तान से क्या रहा कनेक्शन

Wed, 10 Feb 2021 11:27 PM IST
स्वाति सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्मों का शौक रखने वाले लोग महान फिल्मकार कमाल अमरोही को तो जरूर जानते होंगे। फिल्मी दुनिया में कमाल अमरोही बहुत बड़ा नाम रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपने फिल्मी करियर में 'महल', 'पाकीजा' और 'रजिया सुल्तान' जैसी फिल्में बनाईं। उन्होंने मुंबई में कमालिस्तान स्टूडियोज को भी खड़ा किया जिसमें 'अमर अकबर एंथनी', 'कालिया', 'खलनायक', 'कोयला' जैसी फिल्मों की शूटिंग हुई। यहां तक कि सलमान खान ने अपनी 'दबंग' फ्रेंचाइजी की दूसरी फिल्म की शूटिंग भी इसी स्टूडियो में की।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

लाहौर जाकर की पढ़ाई
कमाल अमरोही के बचपन का नाम सैयद अमीर हैदर कमाल नकवी है जिनका जन्म 17 जनवरी 1918 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा शहर में हुआ। कमाल बचपन से ही बहुत शरारती थे और उनका पढ़ाई लिखाई में भी बहुत मन लगता था। पढ़ाई के लिए तो उन्होंने अपना शहर अमरोहा छोड़ दिया और लाहौर चले गए। यह किस्सा भी काफी मशहूर रहा कि कमाल अमरोही ने पढ़ाई के लिए अपना घर छोड़ा नहीं था, बल्कि वह घर से नाराज होकर भाग गए थे।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
घर से चोरी करके भागे थे कमाल
दरअसल, कमाल अमरोही की बहन की शादी थी और शादी में कमाल शरारतें कर रहे थे। इससे कमाल के बड़े भाई काफी नाराज हुए और उन्होंने एक थप्पड़ कमाल के जड़ दिया। सबके सामने थप्पड़ पड़ने के बाद कमाल अपने आप को नीचा महसूस करने लगे और खुद को कमरे में बंद कर दिया। तीन दिन तक कमाल ने कुछ खाया पीया तक नहीं और चौथे दिन अपनी बहन का चांदी का एक कड़ा लेकर लाहौर भाग गए। रहने को तो पाकिस्तान में कमाल के रिश्तेदार थे लेकिन उनका अता पता कमाल को नहीं था। इसलिए, वह एक स्कूल में जाकर बैठ गए। वहां अध्यापकों ने कमाल के रूठ कर बैठने की वजह पूछी तो कमाल ने पढ़ने की इच्छा जताई। और वहीं से शुरु हो गई कमाल अमरोही से पढ़ाई लिखाई।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

शेरो शायरी से हुए मशहूर
कमाल अमरोही पढ़ने लिखने में बहुत होशियार थे। उनकी पढ़ाई लिखाई इसलिए भी बहुत अच्छे से हो गई क्योंकि उनके ऊपर स्कूल के प्रधानाचार्य दंपत्ति का हाथ था। पढ़ने में कमाल ने कमाल ही कर दिया क्योंकि वह पंजाब यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे। इसी दौरान कमाल को शेरो शायरी पढ़ने और लिखने का शौक भी लग गया था। उनकी लिखी शायरियां और कहानियां अक्सर अखबारों में छपा करती थीं। इन्हीं पत्र-पत्रिकाओं की वजह से कमाल के हुनर पर नजर पड़ी मशहूर गायक के एल सहगल की।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सहगल ने कराई सोहराब मोदी से मुलाकात
के एल सहगल कमाल अमरोही के हुनर को पहचान गए और उन्होंने कमाल को मुंबई लाने का फैसला कर लिया। जब कमाल के एल सहगल के साथ मुंबई आए तो उनकी मुलाकात उस समय के महान फिल्मकार सोहराब मोदी से हुई। सोहराब ने कमाल के काम को देखते हुए उन्हें अपनी प्रोडक्शन कंपनी मिनर्वा मूवीटोन फिल्म कंपनी के साथ एक लेखक के तौर पर जुड़ने का मौका दिया। यहां से कमाल ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर दी। उन्होंने सोहराब मोदी के लिए 'जेलर', 'पुकार', 'भरोसा' जैसी फिल्मों की कहानी और पटकथा लिखी।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

‘महल’ से की निर्देशन में शुरुआत

कमाल अमरोही एक लेखक के तौर पर लगातार 'पागल', 'फूल', 'शाहजहां' जैसी फिल्मों में काम करते रहे। उन्होंने एक निर्देशक के रूप में अपनी शुरुआत वर्ष 1949 में ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘महल’ से की। यह वही फिल्म है जिसने अभिनेत्री मधुबाला को स्टार बना दिया। इस फिल्म की कहानी और पटकथा भी कमाल अमरोही ने ही लिखी। देश की यह पहली फिल्म रही जिसमें पुनर्जन्म का जिक्र किया गया। इसके बाद तो 'कर्ज', 'करण अर्जुन' जैसी कई मशहूर फिल्मों में पुनर्जन्म जैसी चीजों को दिखाया गया।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मीना कुमारी को दिल दे बैठे कमाल

अपनी पहली फिल्म खत्म करने के बाद कमाल अभिनेत्री मीना कुमारी पर फिदा हो गए थे और उनको लेकर एक फिल्म बनाना चाहते थे जिसका शीर्षक उन्होंने सोचा 'अनारकली'। बदकिस्मती से उस फिल्म को शुरू करने से पहले ही मीना कुमारी के साथ एक दुर्घटना हो गई और उस वजह से उस वक्त कमाल अमरोही वह फिल्म न बना सके। फिर भी उन्होंने अस्पताल में जाकर मीना कुमारी के हाथ पर लिख दिया था, 'मेरी अनारकली'। वह फिल्म तो न बना सके लेकिन उन्होंने मीना कुमारी को अपना जरूर बना लिया।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपनी प्रेम कहानी पर बनाई फिल्म

कमाल अमरोही और मीना कुमारी ने एक साथ वर्ष 1953 में रिलीज हुई फिल्म 'दायरा' पर काम करना शुरू किया। इस फिल्म में मीना कुमारी, नासिर खान और नाना पलसीकर मुख्य भूमिकाओं में रहे। फिल्म की कहानी कमाल अमरोही और मीना कुमारी की खुद की प्रेम कहानी पर आधारित रही। फिल्म में उन्होंने एक तरफ अपनी प्रेम कहानी दिखाई और दूसरी तरफ उन्होंने हकीकत में मीना कुमारी से शादी कर ली। हालांकि, यह फिल्म किसी को पसंद नहीं आई और साथ ही कमाल और मीना का रिश्ता भी बहुत ज्यादा लंबे समय तक न टिक सका।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

काम की वजह से बिगड़े रिश्ते

उस वक्त मीना कुमारी दिलीप कुमार के साथ फिल्म 'आजाद' में काम कर रही थीं। तो, कमाल अमरोही ने फैसला किया कि वह मीना को लेकर फिल्म 'पाकीजा' बनाएंगे। वर्ष 1956 में ही उन्होंने फिल्म पर काम शुरू कर दिया लेकिन तुरंत रोकना भी पड़ा। क्योंकि, वह ऐसा समय था जब रंगीन फिल्म की ओर रुझान बढ़ने लगा था। कमाल को लगा कि जब ऐसा कुछ है तो क्यों न वह अपनी फिल्म को भी रंगीन बनाएं। थोड़ा समय बीता और मीना कुमारी का करियर अपने शिखर पर था। मीना और कमाल काम की वजह से एक दूसरे को समय नहीं दे पा रहे थे। इस वजह से उनके रिश्ते में तनाव बढ़ गया। इसलिए, इन दोनों ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया और उस समय के लिए फिल्म 'पाकीजा' भी बंद हो गई।

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कमाल अमरोही - फोटो : कमाल अमरोही

दर्शकों को पसंद नहीं आई थी ‘पाकीजा’

कमाल अमरोही ने वर्ष 1969 में 'पाकीजा' फिल्म फिर से शुरू की। मीना कुमारी इस फिल्म में वापस आईं तो वह काफी बीमार थीं। जब 4 फरवरी 1972 को 'पाकीजा' रिलीज हुई तो इसे दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। लेकिन, अगले महीने 31 मार्च 1972 को जब मीना कुमारी का देहांत हो गया तब लोगों ने उनकी याद में फिल्म को देखना जरूरी समझा। फिर यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म का लेखन, निर्माण और निर्देशन सब कुछ कमाल ने किया।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपनी डॉक्टर से ही कर ली शादी

कमाल अमरोही की जिंदगी का यह अंतिम समय था और वह काफी बीमार रहने लगे थे। उनकी देखभाल के लिए एक डॉक्टर को रखा गया जिससे देखभाल करवाते करवाते कमाल ने शादी ही कर ली। यह कमाल का चौथा ब्याह था। अपनी तीन पत्नियों के गुजर जाने के बाद कमाल अकेलापन महसूस करते थे। और उनके ऊपर उनके बच्चों का भी भार था। इसलिए, उन्होंने शादी कर ली। हालांकि, जिंदगी के अंतिम समय में शादी करने पर उन्हें लोगों से तीखी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी। कमाल की पहली शादी बिलकिस बानो से हुई और दूसरी महमूदी से। तीसरी शादी उन्होंने मीना कुमारी से की और चौथी का नाम दीप कौर रहा।

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कमाल अमरोही - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कमाल अमरोही ने कीं चार शादियां

कमाल की पहली पत्नी बिलकिस बानो शादी के कुछ ही समय बाद गुजर गई थीं तो कमाल ने महमूदी से दूसरी शादी कर ली। महमूदी से ही उन्हें तीन बच्चे पैदा हुए। दो लड़के शानदार और ताजदार और एक लड़की रुखसार अमरोही। शानदार और ताजदार दोनों ने ही कमाल की अंतिम फिल्म 'रजिया सुल्तान' में काम किया है। उन्हें बिलकिस बानो, मीना कुमारी और चौथी पत्नी दीप कौर से कोई संतान नहीं है। कमाल का निधन 11 फरवरी 1993 को मुंबई में हुआ। उन्हें रहमताबाद कब्रिस्तान में मीना कुमारी की कब्र के बगल में ही दफनाया गया। कमाल ने अपनी जिंदगी में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे। उनकी जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं रही।

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