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Movie Review: इसे पिंक महसूस करें या ब्लू, यह 'रिबन' सही ढंग से नहीं बांधती

Fri, 03 Nov 2017 11:49 AM IST
रवि बुले
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Kalki Koechlin
-निर्माताः प्रकाश मंडल, स्वाति मंडल
-निर्देशकः राखी शांडिल्य
-सितारेः सुमित व्यास, कल्कि केकला, किआरा मजीठिया
रेटिंग **

इसे पिंक महसूस करें या ब्लू, यह रिबन सही ढंग से नहीं बांधती। महानगरीय जीवन में एक दंपति माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं होते लेकिन अचानक खुद को इस परिस्थिति में पाते हैं। दोनों का करिअर अच्छा चल रहा है और जिंदगी नया मोड़ ले लेती है। रिबन मुंबई में रह रहे करन मेहरा (सुमित व्यास) और सहाना मेहरा (कल्कि कोचलीन) की कहानी है।
 
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Kalki Koechlin
अति-मॉडर्न जिंदगी में जहां ठहरने के लिए वक्त नहीं, नन्हीं बच्ची के उनके जीवन में आते ही जैसे ब्रेक लग जाता है। सहाना को तीन महीने के मातृत्व अवकाश के बाद पता चलता है कि दफ्तर में उसका ओहदा कम कर दिया गया। चुकाने के लिए घर की तमाम ईएमआई ज्यों की त्यों हैं और परिवार का खर्च कुछ बढ़ गया है। नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं। आर्किटेक्ट करन लोनावाला में बन रहे प्रोजेक्ट से जुड़ जाता है, जहां कम से कम डेढ़ साल लगेंगे। परिवार अचानक बिखर-सा जाता है। इस बीच सहाना को नई नौकरी मिलती है और वक्त का पहिया तेजी से घूमता है।
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Kalki Koechlin
रिबन एक लंबी कहानी है, जिसे काट-छांट कर जल्दी-जल्दी समेटा गया है। पौने दो घंटे में पांच-छह साल का वक्त गुजरता है। लिहाजा बहुत कुछ स्क्रिप्ट राइटरों तथा डायरेक्टर के हाथों से फिसल गया है। नतीजा, फिल्म कमजोर पड़ गई। कुछ दृश्य अनावश्यक हैं। बेहतर संपादन की कमी महसूस होती है। इसमें संदेह नहीं कि उच्च मध्यमवर्गीय अति-मॉडर्न दांपत्य के जीवन के कुछ पल यहां खूबसूरती से दिखाए गए हैं लेकिन कुल जमा कहानी असर नहीं छोड़ती।

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Kalki Koechlin
ढीली होकर बिखर जाती है। फिल्म दांपत्य के उतार-चढ़ाव, महत्वाकांक्षाओं, समझौतों से शुरू होती हुई अचानक बच्ची के यौन शोषण की तरफ मुड़ जाती है और अंत में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती। मुंबई की बेबस-निरीह-नीरस जिंदगी में इस दांपत्य कथा का अंत अंधे मोड़ पर ठहर जाता है। रिबन आज के दौर के महत्वाकांक्षी महानगरीय दांपत्य की कुछ निराश तस्वीरें पेश करती है।
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Kalki Koechlin
स्क्रिप्ट में गहराई नहीं है और इसका असर सुमित और कल्कि जैसे अभिनेताओं के परफॉरमेंस पर भी पड़ा है। खास तौर पर मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ जैसी फिल्म कर चुकीं कल्कि यहां कई दृश्यों में प्रतिभा से न्याय करती नजर नहीं आतीं। आप उनसे और बेहतर की उम्मीद करते हैं। निर्देशक राखी शांडिल्य की यह पहली फिल्म है और वह इसके नतीजे से बहुत कुछ सीख सकती हैं।
 
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