जॉनी लीवर
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हिंदी मनोरंजन उद्योग में हास्य का नया दौर है, कितना बदला है लोगों को हंसाने का ये अंदाज?
कॉमेडी में बदवाल आया है, आ रहा है और आता रहेगा। दर्शकों के हिसाब से फिल्में बनाने का तरीका बदलता रहेगा। समय के साथ खुद को बदलना हर कलाकार के लिए जरूरी है। अगर वह बदलेगा नहीं तो लोगों को नया कुछ समझेगा नहीं। मैंने जॉनी वाकर, किशोर कुमार और महमूद जैसे कलाकारों को देखकर कॉमेडी सीखी। डबल मीनिंग वाले संवादों को मैंने कभी जीवन में तवज्जो नहीं दी, ये आप भी जानते हैं।
आपके हास्य में अक्सर सामाजिक विसंगतियों पर एक व्यंग्य भी दिखता है। व्यंग्य से नए दौर के सृजनकर्ता दूर क्यों होते जा रहे हैं?
मेरा ये मानना है कि किसी भी हास्य कलाकार को अंदर से मजबूत होना बहुत जरूरी है। अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो कुछ नया लिख नहीं पाएगा। मेरे पास जब लोग द्विअर्थी संवादों वाली फिल्म या कोई दूसरी चीज लेकर आते हैं, तो मैं उनसे बात करता हूं कि आपको कॉमेडी चाहिने ना, आप जो लेकर आए हैं, मैं उससे बेहतर देता हूं।