राजनीति का महारथी वही बनता है जो यहां अवसरों का खेल समझ सके। अवसरों की इसी तलाश में जया प्रदा बीजेपी में शामिल हो गईं। पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। रामपुर सीट जया प्रदा के लिए नई नहीं है, वो साल 2004 से लेकर 2014 तक रामपुर की सांसद रही हैं। इस दौरान सीट पर उनकी दावेदारी बतौर सपा उम्मीदवार रही थी लेकिन इस बार उनकी दावेदारी सपा के उम्मीदवार आजम खान के खिलाफ है।
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
एक वक्त वो भी था जब आजम खान उनके लिए रामपुर की जनता से वोट मांगा करते थे, लेकिन अब वो उन्हें वोट ना देने की अपील करते हुए नजर आएंगे। जया प्रदा के राजनीतिक सफर का जब भी जिक्र होगा तो उसके साथ अमर सिंह का नाम जुड़ा होगा। अमर सिंह जब भी जिस राजनीतिक पार्टी में रहे जया प्रदा भी उनके साथ रहीं। बीजेपी से पहले जया प्रदा समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और तेलगू देशम पार्टी का हिस्सा रही थीं।
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
तेलुगू सिनेमा में जया प्रदा ने अपने करियर की शुरुआत 1975-76 के आसपास की। साल 1979 में के. विश्वनाथ के निर्देशन में बनी फिल्म सरगम से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली। ये फिल्म काफी हिट रही लेकिन इसने उनके करियर को कोई फायदा नहीं दिया। उनके बॉलीवुड करियर के लिए सबसे बड़ा साल रहा 1984। इस साल जितेंद्र और श्रीदेवी के साथ उनकी फ़िल्म 'तोहफा' आई। इस फिल्म में उनकी को-स्टार रहीं श्रीदेवी आगे चल कर उनकी बड़ी प्रतिद्वंदी बनीं। वरिष्ठ पत्रकार यासिर उस्मान बताते हैं कि देश के महान फिल्म निर्माताओं में से एक सत्यजीत रे ने जया प्रदा को "बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री" बताया था।
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
यासिर उस्मान कहते हैं, ''जया प्रदा का बॉलीवुड करियर चार साल का ही रहा। साल 1984 से लेकर 1988 तक वे बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार रहीं। 1984 में उनकी अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म आई 'शराबी'। शराबी ने जया प्रदा के बॉलीवुड के करियर को ऊपर उठाने का काम किया।
वो बड़े स्टार्स के साथ काम करती थीं। उन्होंने अमिताभ बच्चन, जितेंद्र जैसे उस वक्त के स्टार्स के साथ काम किया लेकिन साल 1988 से उनके फिल्मी करियर का ढलान शुरू हुआ। 1990 में आज का अर्जुन फिल्म उनके करियर की आखिरी मुख्य भूमिका वाली फिल्म रही"
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
शायद अपने फिल्मी करियर की परिस्थिति भांपते हुए ही जया प्रदा ने राजनीति में संभावनाएं तलाशनी शुरू की। 1994 में वो एनटी रामा राव (एनटीआर) के बुलावे पर आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी में शामिल हुईं। एनटीआर और जया प्रदा ने कई तेलुगू फिल्मों में एक साथ काम किया था और यही वजह रही कि उन्होंने ये प्रस्ताव स्वीकार भी किया लेकिन राजनीतिक महत्वकांक्षाओं ने जया प्रदा को दक्षिण की राजनीति से उत्तर भारत की राजनीति का रास्ता दिखाया। आंध्र प्रदेश के पत्रकार कृष्णा राव कहते हैं, ''1996 में टीडीपी ने जया प्रदा को राज्यसभा सांसद बनाया लेकिन जब उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया तो वो नाराज हो गईं। टीडीपी में रहते हुए रेणुका चौधरी और जया प्रदा के बीच मुकाबला रहा। जया प्रदा की हमेशा शिकायत रही कि रेणुका चौधरी को पार्टी ज्यादा तरजीह देती है।''
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
जया प्रदा कई इंटरव्यू में यह कह चुकी है कि टीडीपी में चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें साइड लाइन किया। हालांकि ये भी सच है कि जब टीडीपी की कमान के लिए चंद्रबाबू नायडू ने विद्रोह किया था तो जया प्रदा उनके साथ खड़ी रहीं। साल 2004 में जया प्रदा सपा में शामिल हो गईं और रामपुर से उन्होंने सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उनके आज के प्रतिद्वंदी और सपा के दिग्गज नेता आजम खान ने साथ दिया। जया प्रदा साल 2004 से लेकर 2014 तक सपा के टिकट पर रामपुर से सांसद रहीं।
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 1986 में जया प्रदा ने फिल्म निर्माता श्रीकांत नहाटा से शादी की। शादी से पहले जया प्रदा और श्रीकांत नहाटा के रिश्तों की मीडिया में खूब चर्चा होती थी। उस वक्त की कई मैगजीन में इन दोनों के अफेयर की खबरें छपती थीं। जयाप्रदा इस तरह की खबरों का खंडन ये कहकर करती थीं कि श्रीकांत और वे अच्छे दोस्त थे हालांकि उनकी शादी की तस्वीरें सामने आईं और उन्होंने शादी की बात मानी। यासिर उस्मान कहते हैं, ''स्टारडस्ट मैगजीन ने खुलासा किया कि जया प्रदा और श्रीकांत नहाटा ने शादी कर ली है। सबसे बड़ा विवाद ये रहा कि श्रीकांत शादी-शुदा थे और उनके तीन बच्चे थे और जया प्रदा से शादी उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना की थी।
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जया प्रदा
- फोटो : सोशल मीडिया
इस घटना के बाद कई रिपोर्ट ऐसी छपीं जिसमें जया प्रदा को ''होम ब्रेकर'' बताया गया। ' लेकिन कुछ वक्त बाद खबरें आईं कि उनके और श्रीकांत के बीच में सब कुछ ठीक नहीं है। इसके बाद कई इंटरव्यूज में उन्होंने कहा कि वो बच्चा चाहती हैं लेकिन उनके पति ऐसा नहीं चाहते। ''
एक बार फिर जया के राजनीतिक सफर पर लौटते हैं। जया प्रदा ने उत्तर भारत में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही अमर सिंह का साथ बनाए रखा। अमर सिंह जहां जिस दल के साथ जुड़े जया प्रदा भी वहीं गईं। सपा में जया प्रदा को लाने का श्रेय भी अमर सिंह को ही दिया जाता है।
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अमर सिंह और जयाप्रदा पूजन करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
यासिर उस्मान कहते हैं, ''जया प्रदा अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं और अमर सिंह और बच्चन परिवार के संबंध उस वक्त काफी अच्छे हुआ करते थे। जया प्रदा इस तरह ही अमर सिंह के संपर्क में आईं।'' साल 2010 में जब समाजवादी पार्टी ने अमर सिंह और जया प्रदा को पार्टी से निकाला तो अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोक मंच बनाया। जया प्रदा इसका अहम हिस्सा रहीं। जब अमर सिंह आरएलडी पार्टी में शामिल हुए तो जया प्रदा ने भी आरएलडी जॉइन कर लिया और 2014 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर से उम्मीदवारी पेश की। हालांकि वो इस सीट से जीत नहीं पाईं।
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jaya prada, amar singh
एक इंटरव्यू में अपने और अमर सिंह के रिश्ते को लेकर उन्होंने कहा था, ''अमर सिंह मेरे गॉडफादर हैं। उन्होंने मेरा ऐसे वक्त में साथ दिया जब कोई भी मेरे साथ नहीं खड़ा था। लोग बातें करते हैं। अगर मैं उन्हें राखी बांध दूं तो क्या तब लोग बातें करना बंद कर देंगे।
मई, 2009 में जयाप्रदा ने सपा नेता और विधायक आजम खान पर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप लगाया था। उस वक्त उन्होंने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा था, ''वो मेरे बड़े भाई जैसे हैं लेकिन वह मेरे खिलाफ सस्ते प्रचार अभियान में शामिल होकर मेरी छवि खराब कर रहे हैं वो मेरी मार्फ़्ड तस्वीरें वायरल कर रहे हैं।' जया प्रदा ने ये भी कहा था कि आजम खान और उनके समर्थकों ने मेरे कुछ पोस्टर और एक सीडी जारी की है।
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जया प्रदा-आजम खान
- फोटो : Amar Ujala
उन्होंने उस वक्त मीडिया से बात करते हुए कहा था, ''मैंने सीडी में क्या है ये नहीं देखा है लेकिन पोस्टर देखा है। ये लोग मेरी छवि खराब करने के इरादे से ऐसा कर रहे हैं।'' साल 2018 में एक चैनल से बात करते हुए अमर सिंह ने कहा था, '' जया प्रदा आजम खान की उम्मीदवार थीं और उन्होंने कहा था कि मैं नूर बानो (कांग्रेस उम्मीदवार) को अपनी हूर बानो (जयाप्रदा) से हरवाउंगा। आजम खान के पास एक गाड़ी है जिसपर पूरी तरह पर्दे लगे हुए हैं।
उस गाड़ी में जया प्रदा को आजम खान ने बैठाया था। उस गाड़ी में क्या हुआ ये जया प्रदा जी को ही पता है ये उनका अधिकार है कि वो बोलना चाहें या नहीं। अगर वो बोल देंगी तो आजम जी कहेंगे- जुर्म-ए-उल्फत पे हमें लोग सजा देते हैं, कैसे नादान हैं शोलों को हवा देते हैं।''
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Jaya Prada
- फोटो : file photo
जया प्रदा हमेशा ये कहती रहीं कि इस विवाद में उन्हें कभी नेता जी (मुलायम सिंह) ने फोन तक नहीं किया। अब तक जया प्रदा सपा के टिकट पर रामपुर सीट पर चुनाव लड़ा करती थीं लेकिन अब वो बीजेपी से चुनाव लड़ेंगी और उनके सामने होंगे कभी उनके लिए वोट मांगने वाले आजम खान। ऐसे में ये चुनाव दोनों ही उम्मीदवारों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई साबित होगा।
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Jaya Prada
- फोटो : file photo
वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन कहती हैं, ''जया प्रदा और आजम खान के बीच संबंध 2009 में ही बिगड़ चुके थे। 2009 के चुनाव में आजम खान के समर्थन के बिना ही उन्होंने जीत हासिल की थी लेकिन इस दौरान वे अमर सिंह की करीबी थीं और अमर सिंह के रिश्ते मुलायम सिंह यादव से अच्छे थे। तो ऐसा कहना कि आजम खान के बिना चुनाव नहीं जीत सकती थीं ये गलत होगा, लेकिन ये सच है कि अब आजम खान पहली बार यहां से लोकसभा की दावेदारी पेश कर रहे हैं तो ये राह जया प्रदा के लिए आसान नहीं होगी।''
रामपुर सीट को सपा का गढ़ माना जाता है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर सपा की अच्छी पकड़ है। सुनीता एरॉन कहती हैं, ''जया प्रदा रामपुर के लिए नया नाम नहीं है। बीजेपी में शामिल होने के पीछे उनकी कोई और मंशा है। उन्हें वोट मोदी के नाम पर मिलेगा ना कि खुद के नाम पर।
ऐसा कई बीजेपी उम्मीदवारों के साथ इस चुनाव में होगा। ये चुनाव जाहिर तौर पर दोनों ही उम्मीदवारों को लिए एक दूसरे को हराने की होड़ जैसा होगा।'' चुनावी मैदान में जीत किसको मिलेगी ये 23 मई को पता चलेगा, लेकिन जाहिर तौर पर रामपुर सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।