कला से सम्पूर्ण इस बॉलीवुड हस्ती ने न सिर्फ दर्शकों को अपना कायल बनाया बल्कि लफ्जों के सौदागर जावेद अख्तर को भी अपने प्यार में पागल कर दिया था। हम बात कर रहे हैं शबाना आजमी की। शबाना आजमी ने मशहूर लेखक जावेद अख्तर से शादी की है। जावेद पहले से शादीशुदा थे लेकिन शबाना के प्यार में वो इतने खो चुके थे कि उन्होंने तलाक ले कर शबाना से शादी की थी। पति जावेद अख्तर के सक्रिय सहयोग ने शबाना आजमी के हौसले को बढ़ाया और वो फिल्मों में अभिनय के रंग भरने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक मंचों पर देश और समाज से जुड़ी अपनी चिंताएं अभिव्यक्त करने लगीं।
आज शबाना आजमी का जन्मदिन है। आइए इस अवसर पर शबाना की जिंदगी से जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं।
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ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि शादी से पहले शबाना का नाम फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के साथ भी जुड़ा था। शबाना ने जब जावेद संग शादी की बात माता-पिता को बताई तो वो पहले राजी नहीं हुए थे। उनका कहना था कि जावेद पहले से शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। हालांकि बाद में जावेद ने अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी को तलाक दे दिया और शबाना की शादी उनसे हो गई।
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शबाना आजमी का जन्म 18 सितंबर 1950 को मशहूर लेखक और कवि कैफी आजमी के घर हुआ था। उनके एक भाई भी हैं, बाबा आजमी जो एक सिनेमाटोग्राफर हैं।
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शबाना आजमी का बचपन कलात्मक माहौल में बीता है। पिता मशहूर शायर कैफी आजमी और मां रंगमंच अदाकारा शौकत आजमी के साथ शबाना आजमी का सुहाना बचपन बीता। मां से विरासत में मिली अभिनय प्रतिभा को सकारात्मक मोड़ देकर शबाना ने हिन्दी फिल्मों में अपने सफर की शुरुआत की थी।
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शबाना आजमी ने मनोविज्ञान विषय में ग्रेजुएशन की है। उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से ली है। शबाना आजमी ने एक्टिंग का कोर्स फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया यानी एफटीआईआई पुणे से किया है। एक्टिंग क्लास लेने के लिए उन्होंने जया भादुड़ी से प्रेरणा ली।
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शबाना आजमी को पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जो एक रिकॉर्ड है। उन्हें पहली बार 1975 में फिल्म 'अंकुर', फिर 1983 में 'अर्थ', 1984 में 'खंडहर', 1985 में 'पार' और 1999 में फिल्म 'गॉडमदर' के लिए यह सम्मान दिया गया था।
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शबाना आजमी को चार बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया है। 1978 में 'स्वामी', 1983 में 'अर्थ', 1985 में 'भावना' और 1999 में फिल्म 'गॉडमदर' के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। साल 1988 में शबाना आजमी को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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शबाना ने ग्लैमरस अभिनेत्रियों की भीड़ में स्वयं को अलग साबित किया। स्मिता पाटिल और शबाना आजमी उस दौर की समानांतर फिल्मों की जरूरत बन गईं थीं। 'अर्थ', 'निशांत', 'अंकुर', 'स्पर्श', 'मंडी', 'मासूम', 'पेस्टॅन जी' में शबाना आजमी ने अपने अभिनय की बेहतरीन छाप दर्शकों पर छोड़ी।
इन गंभीर फिल्मों के साथ-साथ शबाना ने मुख्य धारा की कॉमर्शियल फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाए रखी। 'अमर अकबर एंथनी', 'परवरिश', 'मैं आजाद हूं' जैसी व्यावसायिक फिल्मों में अपने अभिनय के रंग भरकर शबाना आजमी ने सुधी दर्शकों के साथ-साथ आम दर्शकों के बीच भी अपनी पहुंच बनाए रखी।