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सड़कों पर सोते थे जावेद अख्तर, इस फिल्म के लिए अमिताभ से भी ज्यादा वसूली फीस

Fri, 17 Jan 2020 06:30 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Javed Akhtar - फोटो : Social Media
शब्दों के जादूगर हिंदी सिनेमा के बेहतरीन लेखक और गीतकार जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता जां निसार अख्तर प्रसिद्ध शायर और माता सफिया अख्तर लेखिका थीं। जावेद साहब ने बॉलीवुड में करियर की शुरुआत बतौर डायलॉग राइटर की, बाद में वह स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार भी बने। जावेद अख्तर को 8 बार लिरिक्स के लिय फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला है। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए 5 बार नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। भारत सरकार द्वारा वो पद्मश्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किए जा चुके हैं।

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जावेद अख्तर - फोटो : अमर उजाला
जावेद अख्तर का असली नाम जादू है। उनके इस नाम की पीछे भी एक खूबसूरत कहानी है। जावेद की पिता की कविता थी 'लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा' से होगा उनका यह नाम पड़ा था। जावेद नाम जादू से काफी मिलता- जुलता था, इसलिए उनका नाम जावेद रख दिया गया। जावेद अख्तर हमेशा से ही कुछ अलग करना चाहते थे, इसलिए वह 4 अक्टूबर 1964 को मुंबई आ गए। उस वक्त उनके पास न खाने के पैसे थे न कहीं रहने को घर। कई रातें सड़क पर सोने के बाद उनको कमाल अमरोही के स्टूडियो में ठिकाना मिला।
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javed akhtar
जावेद अख्तर के लिए बॉलीवुड में करियर बनाना आसान नहीं था। उनको अपने शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा था। एक बार जावेद साहब अपनी स्क्रिप्ट लेकर किसी प्रोड्यूसर के पास गए। प्रोड्यूसर को स्क्रिप्ट इतनी बुरी लगी कि उसने पन्ने जावदे साहब के मुंह पर मार दिए और कहा कि तुम जिंदगी में कभी लेखक नहीं बन सकते। 

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Javed Akhtar - फोटो : Social Media
बॉलीवुड को जावेद अख्तर ने बेहतरीन फिल्में दीं। सलीम खान के साथ उन्होंने काम कर नई ऊंचाईयों को छुआ। उनकी दोस्ती भी हिट रही। सलीम खान और जावेद को सलीम- जावेद डायरेक्टर एसएम सागर ने बनाया। दरअसल एसएम सागर कोई राइटर नहीं मिल रहा था तो उन्होंने दोनों को मौका दिया।
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javed akhtar - फोटो : Social Media
सलीम खान और जावेद अख्तर की पहली मुलाकात सरहदी लुटेरा फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थीं। इस फिल्म में सलीम खान हीरो थे। दोनों ने मिलकर बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दीं। इनमें जंजीर, त्रिशूल, दोस्ताना, सागर, काला पत्थर, मशाल, मेरी जंग और मि. इंडिया, दीवार, शोले जैसी फिल्में शामिल हैं। वहीं इन दोनों की जोड़ी ने राइटर्स को कम फीस देने के ट्रेंड को भी बदला। उस दौर में जब लेखक को हीरो से बहुत कम पैसे मिलते थे, इन दोनों ने फिल्म दोस्ताना में अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस ली थी।

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