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'बॉर्डर' के डायरेक्टर की ये हैं अनसुनी कहानियां, पहली फिल्म ही हो गई थी डिब्बाबंद पर दे गई जीवनसंगिनी

Sat, 03 Oct 2020 04:26 PM IST
अपूर्वा राय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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जेपी दत्ता - फोटो : ट्विटर- @RealNidhiDutta
मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक जेपी दत्ता को ज्यादातर पुलिस और सेना पर आधारित फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। जब भी उनका जिक्र होता है तो लोगों के जेहन में सबसे पहले फिल्म आती है 'बॉर्डर'। लेकिन यही बात जेपी दत्ता को बहुत खटकती भी है। उनका मानना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कई बेहतरीन फिल्में की हैं लेकिन उनकी सिर्फ एक ही फिल्म की बातें होती हैं। एक फिल्म निर्माता और निर्देशक के रूप में यह उनके लिए सम्मान नहीं, बल्कि अपमान जैसा प्रतीत होता है। उनके जन्मदिन के मौके पर आज हम आपको उनकी फिल्मों के कुछ किस्से सुनाते हैं।
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जेपी दत्ता - फोटो : Twitter: @RealNidhiDutta
पहली फिल्म से जेपी को मिली पत्नी
जेपी दत्ता ने फिल्म निर्देशन में अपनी शुरुआत वर्ष 1985 में आई फिल्म 'गुलामी' से की है। इस फिल्म में धर्मेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा, रीना रॉय, स्मिता पाटिल, अनीता राज और रजा मुराद मुख्य भूमिकाओं में हैं। वैसे उनकी शुरुआत तो पहले ही हो जाती अगर उनकी फिल्म 'सरहद' पूरी होकर सिनेमाघरों तक पहुंचती। इस फिल्म को वह विनोद खन्ना, मिथुन चक्रवर्ती और बिंदिया गोस्वामी के साथ बना रहे थे। यह दो दोस्तों की कहानी थी जो बचपन में ही एक दूसरे से बिछड़ जाते हैं। उनकी मुलाकात अगली बार तब होती है जब वे युद्ध की दहलीज पर खड़े होते हैं और दोनों ही अलग-अलग सेनाओं में शामिल हैं। इस फिल्म को विनोद खन्ना ने बीच में छोड़ दिया था और वह अमेरिका चले गए थे। इस वजह से यह फिल्म पूरी नहीं हो पाई। हालांकि, यहां से जेपी की पहचान बिंदिया गोस्वामी से जरूर हो गई थी जो आगे जाकर उनकी पत्नी बनीं।
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गुलामी - फोटो : Twitter: @RealNidhiDutta
आर्थिक तंगी के बावजूद बनी पहली फिल्म
जेपी दत्ता मशहूर फिल्म निर्देशक और लेखक ओपी दत्ता के बेटे हैं। जेपी की पहली फिल्म 'गुलामी' को लिखने का काम ओपी ने ही किया। फिल्म के बनाने के दौरान का एक किस्सा बहुत मशहूर रहा। इस फिल्म का निर्माण एचए नाडियाडवाला ने किया है। जब यह फिल्म बन रही थी उसी दौरान नाडियाडवाला के पिता चल बसे। इस वजह से निर्माता पर आर्थिक विपदा आई और इसका सीधा असर जेपी की फिल्म पर पड़ा। नाडियाडवाला ने जेपी को राजस्थान में शूटिंग करने के लिए तीन लाख रुपये दिए और काम जारी रखने के लिए कहा। अब इतने कम पैसे में वह फिल्म कैसे बनाते हैं? हालांकि जेपी की इस परेशानी को फिल्म के अभिनेता धर्मेंद्र ने समझा और वह बिना पैसे के काम करने के लिए तैयार हो गए। जब यह बात दूसरे कलाकारों ने जानी तो उन्होंने भी जेपी का साथ दिया। तब जाकर यह पहली फिल्म बन सकी। यहां से ही धर्मेंद्र और जेपी बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे।

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घायल - फोटो : Mumbai, Amar Ujala
मुश्किल में आया सनी देओल का करियर
जेपी दत्ता ने अपनी दूसरी फिल्म 'यतीम' की घोषणा वर्ष 1985 में ही कर दी थी। लेकिन, धीरे-धीरे फिल्म कुछ कारणों की वजह से आगे सरकती गई और तीन साल बाद सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म फ्लॉप रही और इसका सबसे बड़ा असर सनी देओल के करियर पर पड़ा। इस फिल्म के साथ वह चार फिल्में फ्लॉप दे चुके थे। यह उनके करियर की शुरुआत तो नहीं थी लेकिन फिर भी शुरुआती दिनों में चार फिल्में असफल होना सोचनीय था। इसके लिए सनी के पिता धर्मेंद्र बहुत चिंतित हो गए। तब उन्होंने अपने बेटे के लिए एक बड़ी फिल्म की जुगाड़ लगाई। वह सीधे मिथुन चक्रवर्ती के पास पहुंचे और उनसे राजकुमार संतोषी की फिल्म 'घायल' को छोड़ने की बात की। मिथुन के पास उस समय फिल्मों की भरमार थी इसलिए उन्होंने कहा कि 20 फिल्मों में से अगर एक फिल्म हाथ से चली भी जाती है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। तब सनी को 'घायल' मिली और साथ ही मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार।
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जेपी दत्ता - फोटो : Twitter: @RealNidhiDutta
धर्मेंद्र और जेपी की दोस्ती में पड़ी गांठ
जेपी दत्ता और धर्मेंद्र के बीच दोस्ती तो पहली ही फिल्म से हो गई थी। लेकिन, जब धर्मेंद्र जेपी की फिल्म 'बंटवारा' में काम रहे थे और अक्सर शूटिंग पर देरी से आया करते थे और सेट पर मौजूद लोगों की मानें तो उस वक्त वह होश में भी कम ही होते थे। इस बात को लेकर धर्मेंद्र और जेपी के बीच कई बार बहस हुई। आलम यह था कि एक बार तो फिल्म के दूसरे मुख्य अभिनेता विनोद खन्ना के साथ धर्मेंद्र की असली धक्का-मुक्की भी हो गई। हालांकि, बाद में दोनों ने मीडिया में इन खबरों को अफवाह बताया। धर्मेंद्र के इस बर्ताव का नतीजा यह निकला कि फिल्म के निर्माता सलीम अख्तर ने पोस्टर में धर्मेंद्र की तस्वीर छोटी जबकि दूसरे कलाकार मोहसिन खान की तस्वीर को बड़ा दिखाया। मोहसिन अभिनेत्री रीना रॉय के पति थे। धर्मेंद्र की तस्वीर छोटी करने पर सलीम ने तर्क दिया था कि धर्मेंद्र तो पहले से ही एक बड़े अभिनेता हैं लेकिन मोहसिन को प्रचार की जरूरत है।
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क्षत्रिय - फोटो : Twitter: @RealNidhiDutta
सुनील दत्त ने ऑफर की फिल्म
अभिनेता संजय दत्त की तारीफें वर्ष 1986 में आई उनकी फिल्म 'नाम' के लिए बहुत हुईं। इसके बाद जेपी दत्ता की 1989 में आई फिल्म 'हथियार' में उनके काम को खूब सराहा गया। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा खासा बिजनेस किया और इसके कलाकारों को भी अच्छा नाम मिला। जेपी दत्ता के काम से खुश होकर संजय के पिता सुनील दत्त ने उन्हें अपने ही प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने वाली एक फिल्म 'और गंगा बहती है' के लिए साइन कर लिया। वह चाहते थे कि जेपी दत्ता इस फिल्म को भी संजय दत्त के साथ बनाएं और उनकी प्रतिभा को और ज्यादा निखारें। लेकिन किन्हीं कारणवश यह फिल्म कभी बनी ही नहीं। हालांकि, सुनील दत्त और संजय दत्त दोनों ही जेपी दत्ता की वर्ष 1993 में आई अगली फिल्म 'क्षत्रिय' में नजर आए।
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फिरोज खान - फोटो : file photo
फिरोज खान की हेकड़ी से नहीं डरे जेपी
जेपी के साथ एक घटना तब घटित हुई जब वह बीकानेर किले में अपनी फिल्म 'क्षत्रिय' की शूटिंग कर रहे थे। भारी भीड़ के बीच फिल्म के सभी मुख्य कलाकार इस शेड्यूल का हिस्सा थे। एक दिन एक प्राइवेट जहाज किले के पास आकर रुका और उसमें से चार लोग बाहर निकले। उन्होंने सीधे आकर जेपी से कहा कि वह संजय दत्त को अपने साथ लेने आए हैं। उन्हें फिरोज खान ने बेंगलुरु से भेजा है जो इस समय अपनी फिल्म 'यलगार' की शूटिंग कर रहे हैं। फिल्म 'यलगार' में भी संजय दत्त ने अहम भूमिका निभाई है। उन चार लोगों ने जेपी से कहा कि उन्हें फिरोज ने यह कह कर भेजा है कि वह संजय को किसी भी कीमत पर बेंगलुरु लेकर आएं। जेपी ने उन लोगों की एक न सुनी और उन्हें सीधे वहां से चले जाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि बाकी कलाकारों समेत संजय दत्त की भी उन्होंने तारीफों को इस समय आधिकारिक रूप से खरीद रखा है। उन लोगों ने जेपी को डराने की कोशिश की लेकिन जेपी डरे नहीं। अंत में हार कर उन लोगों को वहां से वापस खाली हाथ लौटना पड़ा।

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बॉर्डर - फोटो : Twitter: @RealNidhiDutta
मथुरादास के किरदार के लिए हुई फजीहत
वर्ष 1997 में आई फिल्म 'बॉर्डर' जेपी दत्ता के जीवन की सबसे बड़ी फिल्म है। उस साल की वह सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म रही और सबसे बड़ी हिट फिल्म भी वही साबित हुई। इस फिल्म को बनाना जेपी के लिए इतना आसान नहीं था। फिल्म की सारी कास्ट जेपी ने कर ली थी लेकिन उन्हें मथुरादास का किरदार निभाने के लिए एक कलाकार की तलाश थी। मथुरादास का किरदार जेपी ने आसिफ शेख को ऑफर किया लेकिन बात नहीं बनी। उस समय कुलभूषण खरबंदा ने मामिक सिंह का नाम जेपी को सुझाया। जेपी ने कुलभूषण की बात तो मान ली लेकिन वह मामिक को स्वीकार नहीं कर पाए। मामिक ने फिल्म की शूटिंग जोधपुर में आकर शुरू कर दी थी लेकिन जेपी के दोहरे बर्ताव से वह तंग आ चुके थे। फिल्म के बाकी कलाकार पांच सितारा होटलों में रुके हुए थे जबकि मामिक को बाकी कर्मचारियों के साथ किसी दूसरे होटल में ठहराया गया। मामिक और जेपी में सीधे बातचीत भी नहीं होती थी। अगर जेपी को कोई बात मामिक को बतानी होती थी तो वह अपने सहायक के जरिए पहुंचाया करते थे। इस बात को लेकर मामिक और जेपी के बीच में झगड़ा हुआ और वह फिल्म छोड़ कर चले गए। बाद में जेपी ने वह किरदार सुदेश बेरी को दिया।
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बॉर्डर - फोटो : Twitter: @RealNidhiDutta
'बॉर्डर' के बाद जेपी से नाराज हो गए सनी देओल
जेपी दत्ता और सनी देओल ने कई फिल्मों में साथ काम किया लेकिन 'बॉर्डर' उनकी आखिरी फिल्म रही। दरअसल, सनी के पिता धर्मेंद्र को जेपी से कुछ कानूनी कागजात की दरकार थी। वह कागजात जेपी और धर्मेंद्र के साथ काम करने की गवाही देते थे। साथ ही वह यह भी दिखाते थे कि जेपी ने अब तक धर्मेंद्र को उनकी फिल्मों के लिए कितना भुगतान किया। उन कागजातों से धर्मेंद्र को आयकर भरना था। जेपी ने धर्मेंद्र से उन कागजात को देने का वादा तो किया लेकिन कभी दिए नहीं। धर्मेंद्र भी उनसे कभी कोई जोर जबरदस्ती नहीं कर पाए। लेकिन, सनी देओल इस बात से बहुत नाराज हो गए। इसके बाद से सनी ने जेपी के साथ कभी कोई फिल्म नहीं की।
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