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Irrfan Khan: इरफान के अनसुने किस्सों से खुलीं शख्सियत की अनजानी परतें, तीसरी बरसी से पहले आखिरी फिल्म रिलीज

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अनुप सिंह के साथ इरफान खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपनी आंखों में जमाने भर का दर्द समेट कर मौका मिलते ही परदे पर अपने अभिनय के जरिए उसे उड़ेल देने वाले अभिनेता इरफान खान को अपने चाहने वालों से दूर गए तीन साल होने को हैं। उनकी तीसरी बरसी की पूर्व संध्या पर उनकी आखिरी फिल्म 'द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियन्स' भारत में रिलीज हो रही है। कोई छह साल पहले बनी ये फिल्म दुनिया के तमाम फिल्म समारोहों में वाहवाही लूट चुकी है। फिल्म के निर्देशक अनूप सिंह ‘अमर उजाला’ के पाठकों के साथ साझा कर रहे हैं इरफान खान की कुछ बेहतरीन यादें...

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अनुप सिंह के साथ इरफान खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

शॉट से पहले गुनगुनाने का किस्सा
फिल्म 'द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियन्स' 2019 में यूरोप में रिलीज हुई। हमने बहुत कोशिश की कि अब ये फिल्म भारत में भी रिलीज हो जाए लेकिन ये संयोग अब जाकर ही बन सका। इरफान की बरसी से ठीक एक दिन पहले ये फिल्म रिलीज हो रही है और इस वक्त वाकई मुझे फिल्म के हीरो इरफान की याद बहुत आ रही है। मेरी एक फिल्म 'किस्सा' में भी वह काम कर चुके हैं। मुझे याद है मैं 'किस्सा' के एक शॉट की तैयारी कर रहा था और इरफान खान मेकअप रूम में थे। तैयारी के दौरान मैं कुछ गुनगुना रहा था क्योंकि मुझे शॉट के समय एक लय चाहिए थी। तभी कोई और भी मेरी वही धुन गुनगुनाने लगा। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो इरफान गा रहे थे। हम जो गा रहे थे वह नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली थी 'जी करदा हैं तेनु वेखे जवां'। हमने इरफान की आवाज के साथ ही वह शॉट ले लिया। इरफान ने मुझसे कहा, अनूप अब से हर शॉट के पहले कुछ गुनगुना दिया करो, मामला अच्छा जम जाता है। यहीं से हमारी दोस्ती की शुरुआत हुई।

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इरफान खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

किस्सा से कर दिया था इन्कार
जब मैं 'किस्सा' लिख रहा था तब मेरे दिमाग में बलराज साहनी थे। बलराज साहनी जैसा ठहराव और शांति से बात करता इंसान जो दूसरा इंसान मेरे जेहन में आया वह इरफान खान थे। मैं इरफान के घर  गया और उनको फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई। पूरी कहानी सुनने के बाद इरफान कहते हैं कि ये तो बहुत ही दर्दनाक कहानी है और इस समय मैं ऐसी फिल्म नहीं करना चाहुंगा। ये सुनने का बाद मैं काफी निराश हो गया और जब मैं उनके घर से नीचे जा रहा था तब मैने सोचा कि शायद इस फिल्म को इरफान ने वैसे नहीं देखा, जैसे मैं देख रहा हूं।  मैने उनको फोन किया कि मुझे आप दस मिनट और दीजिए क्योंकि मुझे कुछ कहना है और फिर मैं ऊपर गया। मैंने उनसे कहा कि आपको कहानी तो दर्दनाक लग रही है मैं समझ सकता हूं लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि आपको नुसरत फतेह अली खान का गाना बहुत अच्छा लगता है। उनके करीबी जानते हैं कि जब भी वह गाते थे तो उनकी आवाज तो अच्छी लगती है लेकिन उनका चेहरा एकदम लाल हो जाता है। मेरी बात सुन कर इरफान एकदम हंस पड़े और बोले, चलो करते हैं फिल्म।

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इरफान खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिंदगी को लेकर अलग ही जिज्ञासा
जब मैं फिल्म 'द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियंस' की स्क्रिप्ट लेकर इरफान के पास गया तो वह फिर वह बोले, अनूप, तुम ऐसी कहानी लेकर आते हो मेरे पास, जो मुझे पता है कि नहीं करना चाहिए लेकिन मैं कहानी के सामने मजबूर हो जाता हूं। दोनों ही फिल्मों के दौरान मैंने देखा कि जिंदगी को लेकर उनकी एक अलग तरह की जिज्ञासा थी। फिल्म 'द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियंस' के दौरान हम जैसलमेर में शूटिंग कर रहे थे तो मैंने देखा फैले हुए रेगिस्तान का बहुत ही गहरा असर हुआ इरफान पर। शूटिंग शुरू होने से पहले ही वह हमारे साथ जैसलमेर आ गए थे। पूरा पूरा दिन अकेले उस रेगिस्तान में घूमते रहते थे और एक दो बार तो वहीं सो भी गए।

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इरफान खान - फोटो : social media

पतंग से बंधा जिंदगी का फलसफा
इरफान को पतंग उड़ाने का बहुत शौक था। जब भी  दस मिनट का ब्रेक हो तो वह पतंग उड़ाने चले जाते थे और हमको उन्हें ढूंढना पड़ता था। एक बार मैंने इरफान से पूछा कि आप आपका पतंग से क्या रिश्ता है? उन्होंने कहा कि यह एक नाजुक सा कागज है जो हवा में उड़ रहा है जिसके साथ एक पतली सी डोरी है मेरे हाथ में और मैं इसके साथ खेल रहा हूं। इसी तरह से जिंदगी भी है। पतंग की तरह नाजुक और उसकी डोर आपके ही हाथ में होती है। आप जीवन के साथ जितना सहज रहेंगे, जिंदगी उतनी ऊंचाइयों पर जाएगी।

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इरफान खान - फोटो : सोशल मीडिया

ऊंट से भी कायम किया दोस्ताना
फिल्म 'द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियंस' में इरफान ऊंट विक्रेता के किरदार में दिखते हैं लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि इरफान ऊंट से बहुत डरते थे। तब मैंने और मेरे लोगों ने उनके लिए एक ऊंट ढूढा जिसका नाम था पतंग। जब हम यह ऊंट उनके सामने लाए तो वह थोड़ा डर रहे थे लेकिन थोड़े ही समय में उनका इतना अच्छा रिश्ता बन गया उस ऊंट के साथ कि वह उसके साथ अकेले घंटों बैठे रहते थे। एक समय ऐसा आया जब इरफान उस ऊंट से बात करने लगे थे। और, वह ऊंट भी इरफान से इतना जुड़ गया था कि वह चाहे जहां चला जाए इरफान के 'बाबा' कह कर बुलाते ही फौरन चला आता था।

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इरफान खान - फोटो : Twitter
जब खुद पर गुस्सा हुए इरफान
आमतौर पर जब हम शॉट की तैयारी करते हैं तो अभिनेता की जगह ऐसे ही किसी को खड़ा कर लेते हैं। अभिनेता आता है और फिर वह उसी जगह खड़े होकर शूटिंग शुरू कर देता है। लेकिन मेरा और इरफान का एक अलग रिश्ता था। इरफान ने उस शॉट के दौरान वहां खुद खड़े होने का निर्णय किया। उस शॉट में उनके साथ एक ऊंट था और जैसे मैंने शॉट का कंपोजिशन बनाया था वह ऊंट उस कंपोजिशन के अंदर नहीं आ रहा था। उस ऊंट को सही जगह पर लाने के लिए कुछ आधा घंटा लग गया। उस पूरे आधे घंटे इरफान वहीं खड़े रहे। शॉट लेने के बाद इरफान मेरी तरफ आए लेकिन बिना कुछ बात किए वहां से निकल गए। ऐसा मैंने पहली बार देखा था। मैं उनके पास गया और पूछा कि क्या हुआ आप नाराज हो गए क्या? उन्होंने कहा 'ऐसी बात नहीं है अनूप, दरअसल मेरी पीठ में दर्द रहता है जिस वजह से मैं खड़ा नहीं हो पा रहा था तो मेरा गुस्सा तुम पर नहीं खुद पर है। एक अभिनेता के तौर पर मैं चाहता हूं कि मैं हर वक्त अपने निर्देशक के सामने रहूं और वह जो भी मुझसे चाहे वो सब करूं लेकिन जब मैं ऐसा नहीं कर पाता हूं तो खुद पर गुस्सा आता है।'
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इरफान खान - फोटो : Twitter
रूमी और उदय प्रकाश पसंदीदा लेखक
इरफान ऐसे व्यक्ति थे कि हर चीज ही देखना और पढ़ना पसंद करते थे। उनको कविताएं पढ़ना बहुत पसंद था। वह रूमी को पढ़ते थे। हिंदी में उन्हें उदय प्रकाश की कहानियां पढ़नी बहुत पसंद थी। वह दर्शन पढ़ते थे। इसके अलावा मैंने उनको भौतिक विज्ञान, इतिहास और गणित की किताबें पढ़ते देखा था। यह मेरे लिए काफी चौका देने वाला था।
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