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इन 10 फिल्मों ने इरफान को बना दिया सिनेमा का महारथी, 'पान सिंह तोमर' से लेकर बन चुके 'मदारी' भी

Wed, 29 Apr 2020 01:24 PM IST
शिप्रा सक्सेना एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Irrfan Khan - फोटो : file photo
सिनेमाजगत ने आज एक ऐसा सितारा खो दिया जिसकी क्षति से बॉलीवुड हिल गया है। इस अभिनेता का नाम इरफान खान हैं। इरफान आखिरी बार बड़े पर्दे पर 'अंग्रेजी मीडियम' फिल्म में नजर आए थे जो कि इस साल मार्च में ही रिलीज हुई। 32 साल के करियर में इरफान ने कुछ ऐसी फिल्में की हैं जो मील का पत्थर साबित हुईं। खास बात है कि इरफान को 'पान सिंह तोमर' फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। अभिनय की कला के महारथी कहे जाने वाले इरफान खान की आज हम आपको 10 उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में बताएंगे जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

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Maqbool - फोटो : social media
मकबूल (2003)
विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इरफान ने मकबूल का मुख्य किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी में मकबूल एक अंडरवर्ल्ड डॉन अब्बा जी (पंकज कपूर) का भरोसेमंद आदमी है। वह अब्बा जी के यहां काम करने वाली एक नौकरानी निम्मी (तब्बू) से चुपचाप प्यार करता है। वह मकबूल को अब्बा जी खिलाफ भड़काती है और मकबूल अब्बा जी का कत्ल कर देता है। इरफान के किरदार में अकस्मात बदलाव फिल्म की गति के हिसाब से अद्वितीय लगता है। 
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paan singh tomar - फोटो : file photo
पान सिंह तोमर (2012)
भारतीय राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाला पान सिंह तोमर चम्बल का मशहूर डाकू कैसे बन जाता है? यह फिल्म उस डाकू की आदि से अंत तक की पूरी सच्चाई को बयां करती है। तिग्मांशु धूलिया ने पान सिंह तोमर के किरदार में पर्दे पर इरफान को पेश किया। मध्य प्रदेश की भाषा और बोली को फिल्म में जब इरफान बोलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे इरफान उसी परिवेश में पले बढ़े हैं। इस फिल्म के लिए इरफान को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। 

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Life of Pi - फोटो : amar ujala mumbai
लाइफ ऑफ पाई (2012)
इरफान ने जितनी पहचान हिंदी सिनेमा में बनाई है, उससे ज्यादा इज्जत उन्होंने हॉलीवुड में कमाई है। ताईवान के निर्देशक आंग ली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इरफान एक लेखक को अपनी जीवनी सुनाते हुए नजर आते हैं। इरफान अपनी कहानी बचपन से शुरू करते हैं, और किशोरावस्था की उस घटना का विस्तार से वर्णन करते हैं, जिसमें उन्होंने एक नाव पर लंबा समय एक शेर के साथ बिताया। खुद भूखे पेट रहकर एक भूखे शेर के साथ एक नाव पर रहना स्थितिक तौर पर आत्महत्या जैसा आभास कराता है।
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Saheb Biwi Aur Gangster Returns - फोटो : amar ujala mumbai
साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स (2013)
तिग्मांशु की बेहतरीन फिल्मों में से एक इस फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। इरफान ने इस फिल्म में उजड़ी हुई रियासत के लुटे हुए सुल्तान इंद्रजीत सिंह का किरदार निभाया है। वह अपनी खोई हुई विरासत को वापस पाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है, जिसको आदित्य प्रताप (जिमी शेरगिल) के पुरखों ने बर्बाद कर दिया है। यह फिल्म नफरत, प्यार, धोखा, वासना आदि का भरपूर डोज देती है। 
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the lunchbox - फोटो : social media
लंच बॉक्स (2013)
लंच बॉक्स यानी दोपहर के खाने का डब्बा। एक डब्बे की अदला बदली से प्यार पनपने की कहानी सुनने में अजीब लगेगी, लेकिन विस्तार से देखने पर आप भी भावनाओं में बह जाएंगे। इरफान की फिल्में कमाई कम करती हैं, तारीफें ज्यादा पाती हैं। जब तक हिंदी मीडियम नहीं रिलीज हुई थी, तब तक यही फिल्म उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी।
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talvar - फोटो : file photo
तलवार (2015)
देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में हुए आरुषि तलवार और उनके नौकर हेमराज के मर्डर केस की चर्चाएं तो अभी तक होती हैं। इस केस को पर्दे पर 'राजी' और 'छपाक' जैसी चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर फिल्में बनाने वाली निर्देशक मेघना गुलजार ने उतारा। इरफान ने इस फिल्म में केस की छानबीन करने वाले सीबीआई अफसर अश्विन कुमार का किरदार निभाया है। 

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Madaari - फोटो : amar ujala mumbai
मदारी (2016)
निशिकांत कामत के निर्देशन में बनी इस फिल्म के मदारी कोई और नहीं बल्कि खुद इरफान खान हैं। वह भारतीय सेना और सीबीआई को अपने डमरू की धुन पर ऐसा नचाते हैं कि उनका छोटा सा संदेश पूरे भारत में खुद ब खुद फैल जाता है। एक पुल के ढह जाने पर निर्मल कुमार (इरफान खान) के बेटे अपू की जान चली जाती है। अपने बेटे की मौत पर निर्मल अपना आप खो देता है। सिस्टम को सबक सिखाने के लिए वह गृहमंत्री के बेटे का अपहरण करता है।

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पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर के साथ इरफान खान - फोटो : file photo
हिंदी मीडियम (2017)
इरफान की अब तक की सबसे सफल फिल्म यही है। साकेत चौधरी के निर्देशन में बनी यह फिल्म कॉमेडी से भरपूर है, लेकिन एक बहुत बड़ा सामाजिक संदेश देती है। एक पैसे वाला इंसान अपने पैसे के दम पर अनजाने में न जाने कितने गरीबों का हक छीन लेता है। यह इस फिल्म में बहुत सादगी से बताया गया है। फिल्म के सारे सीन आपको अपने जैसे ही लगेंगे। 

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Qarib Qarib Singlle - फोटो : file photo
करीब करीब सिंगल (2017)
हिंदी मीडियम में स्कूलों की खराब व्यवस्था के साथ एक कहानी और समानांतर चलती दिखती है, जिसमें पति-पत्नी की एक प्रेम कहानी होती है। इस कहानी को विस्तार से देखने के लिए ये फिल्म आपको जरूर देखनी चाहिए। तनुजा चंद्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म की प्रेम कहानी किसी भी बेहतरीन प्रेम कहानी वाली फिल्म को बौना साबित करने की ताकत रखती है। 
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Karwaan - फोटो : file photo
कारवां (2018)
दो लाशों की अदला बदली से शुरू हुई इस फिल्म की कहानी कब नए रिश्ते जोड़ देती है, किसी को कुछ पता ही नहीं चलता। शौकत के किरदार में एक ड्राइवर बनकर इरफान बहुत हंसाते और ज्ञान देते हैं। वैसे तो हर फिल्म में उनका एक नया ही रूप दिखाई देता है। उनका ये रूप एकदम अलग ही था। पूरी फिल्म रोड पर एक तेज गाड़ी के जैसे ही दौड़ती है। 

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