हिंदी फिल्म संगीत में एक नई उम्मीद बनकर चमकीं गायिका ध्वनि भानुशाली दो साल के अपने अब तक के करियर में दिलबर, लेजा रे, मैं तेरी हूं और लैला जैसे सुपरहिट गाने देकर एकदम से पहली कतार में आ गई हैं। उनका अगला सिंगल वास्ते रिलीज को तैयार है। अपनी पढ़ाई और गायिकी के बीच समय संतुलन बिठा रहीं ध्वनि के आज 22वें जन्मदिन पर पढ़िए उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां।
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dhvani bhanushali
- फोटो : amar ujala
सजना है मुझे..
ध्वनि भानुशाली की मां रिंकू बताती हैं, ‘बचपन से ही ध्वनि को सजने संवरने का बहुत शौर रहा है। मेरी ड्रेसिंग टेबल से वह अक्सर क्रीम और मेक अप का सामान बिना किसी को बताए निकाल लेती थी और फिर पूरा मेकअप खुद से ही करके पूरे घर में घूमा करती थी। छोटे पर तो उसे इस तरह देखकर सब खूब हंसा करते थे, लेकिन बड़ी होकर भी वह अपना मेकअप खुद करती है तो किसी परी से कम नहीं लगती। उसको नजर ना लगे, इसके लिए मैं लगातार उसकी नजर भी उतारती रहती हूं। अब तो वह अपने गानों में अपने लुक्स भी खुद ही डिजाइन करती है और बाहर जाती है तो भी अपनी साज संभाल खुद ही करती है।’
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पापा की परी
अपने हर म्यूजिक वीडियो और फिल्मी गाने के लिए करोड़ों व्यूज पाने वाली ध्वनि भानुशाली संगीत इंडस्ट्री में बिलिनेयर बेबी के नाम से मशहूर हो चली हैं। इन बिलियिन्स व्यूज का क्रेडिट वह अपनी गायिकी के अलावा पूरी टीम को देती है।
आमतौर पर बच्चों को मिठाइयों और तले हुए खाने से दूर रखने वाली उनकी मां तब मजबूर हो जाती हैं जब उनके पापा विनोद भानुशाली अपनी बिटिया के लिए चिप्स और चॉकलेट्स पर कोई रोक नहीं लगाते। ध्वनि का अपने पिता से रिश्ता काफी समझदारी भरा है और अपने गानों से लेकर पढ़ाई औऱ छुट्टी तक वह हर बार उनसे साझा जरूर करती हैं।
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रोमांच की रानी
ध्वनि भानुशाली के बारे में एक छुपा हुआ राज ये भी है कि वह अपने पिता की तरह की घूमने फिरने की शौकीन हैं। नए नए शहर जाना, वहां के लोगों से घुलना मिलना और उनकी संस्कृति को करीब से समझने में वह काफी वक्त बिताती हैं। इसके अलावा एडवेंचर स्पोर्ट्स भी ध्वनि का बचपन स ही शौक रहा है। घुड़सवारी, निशानेबाजी के अलावा वह वाटर स्पोर्ट्स में भी अव्वल रही हैं।
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बाबा की लाडली
भानुशाली परिवार में संगीत विरासत में रहा है। ध्वनि का अपने बाबा प्रधान भानुशाली से बहुत करीब का रिश्ता रहा है। जो बातें वह अपने पिता व मां से साझा नहीं कर पातीं, उन पर अपने बाबा से चर्चा करती हैं। बचपन में अपने बाबा की मूंछों से खेलने वाली ध्वनि ने पहली बार अपने बाबा के लिए ही एक घरेलू कार्यक्रम में गाया जोकि एक आरती थी। ध्वनि के बाबा संगीत के पुजारी रहे हैं और गायिका का ये वरदान उन्हें अपने बाबा से ही मिला है।
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मैं और मेरा लियो
ध्वनि भानुशाली को जानवरों से बहुत प्यार है। कहीं भी कोई जानवर उन्हें तकलीफ में दिखे तो वह आगे बढ़कर उसके लिए कुछ न कुछ करने का प्रयास करती हैं। घर पर उनका पालतू कुत्ता लियो उनके लिए सबकुछ है। घर आते ही थकान मिटाने के लिए जो काम ध्वनि सबसे पहले करती हैं वह है अपने प्यारे से डॉगी लियो के साथ खेलना। लियो के बिना ध्वनि एक दिन भी नहीं रह पातीं और उनकी कोशिश ये भी रहती है कि बाहर जाएं तो उसे अपने साथ ही ले जाएं।
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Dhvani Bhanushali
- फोटो : social media
समोसा सबसे बड़ा भरोसा
वैसे तो ध्वनि भानुशाली को अपनी गायिकी और अपनी स्टेज परफॉरमेंस को लेकर फिट रहना पड़ता है और उनकी खुराक भी उसी के हिसाब से तय होती है लेकिन समोसा ध्वनि की सबसे बड़ी कमजोरी है। मुंबई में परवरिश के बाद भी ध्वनि उत्तर भारतीय समोसे बहुत चाव से खाती हैं औऱ कई बार तो इसके लिए चीटिंग भी कर लेती हैं। ध्वनि बताती हैं, ‘अलग अलग क्षेत्रों के भोजन में ही वहां का राग छिपा होता है। अगर आप किसी इलाके के खान पान के बारे में समझते हैं तो वहां के लोगों को समझना आसान हो जाता है।’
दीदी नंबर वन
ध्वनि भानुशाली हालांकि खुद अभी 21 की ही हैं लेकिन घर पर वह किसी काबिल संरक्षक की भूमिका भी निभाती दिखती हैं। और, यह होता है अपनी छोटी बहन दिव्या के लिए। दिव्या के लिए ध्वनि हर मुसीबत का हल हैं। पढ़ाई से लेकर पार्टी तक दिव्या के लिए हर बात में पहली और आखिरी सलाह ध्वनि की ही मायने रखती हैं। और, ध्वनि भी अपनी बहन को खुश रखने के लिए सब कुछ करती हैं यहां तक कि सब दिव्या का मूड ठीक नहीं होता तो वह उसके लिए डांस भी करती हैं।