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बावरा गीतकार जिसने लिखा, वो क्या समझे प्यार को जिनका सब कुछ चांदी सोना है और बसा दिया गीतों का गुलशन

Sun, 12 Apr 2020 03:22 PM IST
अपूर्वा राय पंकज शुक्ल, मुंबई
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गुलशन बावरा - फोटो : सोशल मीडिया
अगर आपने अमिताभ बच्चन और प्राण की दमदार अदाकारी वाली फिल्म ज़ंजीर देखी है तो उसका गाना दीवाने हैं दीवानों को न घर चाहिए आपको जरूर याद होगा। मशहूर गीतकार गुलशन बावरा का लिखा ये गाना परदे पर भी उन्हीं पर फिल्माया गया है। उनका असली नाम है, गुलशन कुमार मेहता। लेकिन दुनिया उन्हें गुलशन बावरा के नाम से ज्यादा जानती है। 42 साल लंबे करियर में सिर्फ 240 गाने लिखने वाले गुलशन बावरा ने ये बताया कि मात्रा और गुणवत्ता का फर्क क्या होता है। अपने समय के बेहतरीन संगीतकारों कल्याणजी आनंदजी, शंकर जयकिशन और आर डी बर्मन के लिए लिखने वाले गुलशन बावरा आज होते तो 83 साल के होते। उनके जन्मदिन पर चलिए आपको बताते हैं उनके 10 सदाबहार, यादगार गाने, कुछ दिलचस्प किस्सों के साथ।
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सट्टा बाजार - फोटो : सोशल मीडिया
गीत: तुम्हें याद होगा
फिल्म: सट्टा बाजार (1959)

गुलशन बावरा को फिल्मों में काम करने का शौक था और वह किसी तरह बंबई आना चाहते थे। उन्होंने रेलवे में नौकरी के लिए अप्लाई किया तो उनको पोस्टिंग मिली कोटा, राजस्थान में। जब वह वहां पहुंचे तो वह नौकरी भर चुकी थी, अगले नंबर उनको मिला बंबई और बस वह अपनी पेटी संभाले पहुंच गए सन 55 में यहां। कल्याणजी आनंदजी वाले कल्याण जी तब अकेले ही संगीत देते थे कल्याण वीरजी शाह के नाम से। उन्होंने ही गुलशन बावरा को पहला ब्रेक दिया फिल्म चंद्रसेना में। और, जब कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी बनी तो भी उनको अपना वादा याद रहा जिसकी बदौलत गुलशन बावरा को मिला अपने करियर का पहला हिट गाना, तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे।

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उपकार - फोटो : सोशल मीडिया
गीत : मेरे देश की धरती
फिल्म : उपकार (1967)

लाहौर के करीब गांव शेखूपुरा में जन्मे गुलशन ने अपनी आंखों के सामने अपने पिता और अपने चाचा का कत्ल होते देखा। बहन तब जयपुर में थीं, वह उन्हें अपने पास ले आईं। बाद में गुलशन मेहता दिल्ली पहुंचे और यहां पढ़ाई के दौरान ही शायर बन गए। भारत कुमार के नाम से पहचाने जाने वाले अभिनेता मनोज कुमार ने फिल्म उपकार तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की फरमाइश पर बनाई थी। इसकी कहानी उन्होंने दिल्ली से मुंबई लौटते समय ट्रेन में लिख डाली थी। इस सुपरहिट फिल्म में गुलशन बावरा का लिखा ये गीत आज भी राष्ट्रीय पर्वों पर खूब सुना जाता है। इस गाने के लिए गुलशन को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।

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विश्वास - फोटो : सोशल मीडिया
गीत : चांदी की दीवार न तोड़ी
फिल्म : विश्वास (1969)

फिल्म उपकार के अलावा इस फिल्म में भी गुलशन बावरा ने एक्टिंग की। पैसे के पीछे भागने वाली मां से दूर भागने वाले बेटे को अपने साथ रखने की साजिशों की कहानी कहती फिल्म विश्वास अपने समय से आगे की फिल्म है। निर्देशक केवल कश्यप की इस फिल्म की पटकथा ब्रिज कात्याल ने लिखी। मुकेश की शानदार आवाज में गाया ये गीत फिल्म में जितेंद्र और अपर्णा सेन पर फिल्माया गया है। इस गीत में भी गुलशन बावरा को कल्याणजी आनंदजी का साथ मिला।

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जंजीर - फोटो : file photo
गीत : यारी है ईमान मेरा
फिल्म : जंजीर (1973)

कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म जंजीर वितरकों को प्राण की फिल्म कहकर बेची गई थी। कोलकाता में फिल्म के प्रीमियर पर फिल्म शुरू होने से पहले लोग प्राण की ही जय जयकार कर रहे थे, ये देखकर अमिताभ बच्चन की आखों में आंसू भर आए। इस पर फिल्म के निर्देशक प्रकाश मेहरा ने उनका कंधा दबाकर कहा, चिंता मत करो, फिल्म खत्म होने के बाद यही लोग तुम्हारी जय जयकार करेंगे। हुआ भी यही। प्रकाश मेहरा की इस फिल्म ने ही अमिताभ बच्चन को एंग्री यंगमैन का तमगा दिलाया। ये अलग बात है कि आखिरी दिनों में दोनों की खटपट हो गई और किसी ने भी इन गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश नहीं की। इन दोनों की पुरानी दोस्ती जैसा ही ये गाना। इसने गुलशन बावरा को एक और फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिलाया।

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हाथ की सफाई - फोटो : सोशल मीडिया
गीत : वादा करले साजना
फिल्म : हाथ की सफाई (1974)

फिल्म जंजीर के हिट होने से पहले ही निर्देशक प्रकाश मेहरा हसीना मान जाएगी, मेला और समाधि जैसी फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर सिक्का जमा चुके थे। जंजीर में अमिताभ बच्चन को लेने की वजह यही थी कि ये रोल देव आनंद से लेकर राजकुमार तक ठुकरा चुके थे। जंजीर के अगले साल प्रकाश मेहरा ने रणधीर कपूर को स्टार बनाया फिल्म हाथ की सफाई में। फिल्म में एक जगह देवदास और चंद्रमुखी के किरदारों में रणधीर कपूर और हेमा मालिनी दिखते हैं। यहां देवदास गाता है, पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए। लेकिन फिल्म का जो गीत सबसे ज्यादा हिट हुआ वो है, वादा कर ले साजना। तो क्लिक करिए नीचे के लिंक पर और अभी सुनिए लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी का गाया ये बेहतरीन गाना।


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खेल खेल में - फोटो : सोशल मीडिया
गीत : एक मैं और एक तू
फिल्म : खेल खेल में (1975)

इस फिल्म को संगीत की तमाम सियासतों के लिए भी याद किया जाता है। ये तो सबको पता है कि फिल्म बॉबी में जब ऋषि कपूर ने बतौर हीरो डेब्यू किया तो उनक पिता और फिल्म के निर्माता निर्देशक राज कपूर ने उनकी आवाज नए गायक शैलेंद्र सिंह को बनाया। पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग की ट्रेनिंग लेकर निकले शैलेंद्र सिंह की आवाज ऋषि कपूर पर वैसी ही फिट बैठती थी जैसे किशोर कुमार की राजेश खन्ना पर। लेकिन, संगीतकार आर डी बर्मन और किशोर कुमार की दोस्ती ऐसी थी कि जो फिल्म आर डी बर्मन को मिलती, उसके गाने फिर किशोर ही गाते। ऋषि कपूर के लिए भी किशोर की आवाज की पैरवी आर डी बर्मन ने ही की। फिल्म में शैलेंद्र सिंह ने बस एक गाना गाया, हमने तुमको देखा। इसके अलावा सारे गाने किशोर कुमार ने ही गाए।

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कसमे वादे - फोटो : सोशल मीडिया
गीत : कसमे वादे निभाएंगे हम
फिल्म : कसमे वादे (1978)

जी5 के लिए रिजेक्ट्स नाम की वेब सीरीज बनाने वाले गोल्डी बहल और नेटफ्लिक्स में भारतीय मनोरंजन सामग्री को स्वीकृत करने वाली टीम की मुखिया सृष्टि बहल के पिता रमेश बहल ने बतौर निर्देशक अपने पूरे करियर में जो चार फिल्में बनाई, उनमें से पहली फिल्म थी कसमे वादे। अमिताभ बच्चन और रणधीर कपूर की इस फिल्म की कहानी बहुत रोचक है। अमिताभ बच्चन डबल रोल में हैं और उनके साथ हीरोइन हैं राखी। दोनों पर फिल्माया गया ये बेहद रोमांटिक गाना भी गुलशन बावरा का लिखा हुआ है, संगीत आर डी बर्मन का है।

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ये वादा रहा - फोटो : सोशल मीडिया
गीत : तू तू है वही
फिल्म : ये वादा रहा (1982)  

गुलशन बावरा के कुछ और दिलचस्प किस्से आगे की स्लाइड्स में, अभी आप सुनिए/देखिए फिल्म ये वादा रहा के लिए लिखा गुलशन बावरा का लिखा ये गाना जिसमें भी बात किसी वादे की ही गई है।


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सत्ते पे सत्ता - फोटो : फाइल फोटो
गीत : प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया
फिल्म : सत्ते पे सत्ता (1982)

जैसे अपनी फिल्मों में गाने लिखने के लिए राजेश खन्ना की जिद आनंद बक्षी के नाम की होती थी, अमिताभ बच्चन भी अक्सर अपनी फिल्मों के गीत लिखने के लिए गुलशन बावरा का ही नाम आगे कर दिया करते थे। गुलशन बावरा का लिखा ये गीत किशोर कुमार, राहुल देव बर्मन, भूपिंदर सिंह, सपना चक्रवर्ती के साथ मिलकर खुद गुलशन बावरा ने गाया है। फिल्म में सात भाइयों पर फिल्माए गए इस गीत ने अलग ही कमाल किया।  


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Agar Tum Na Hote
गीत: हमें और जीने की चाहत न होती
फिल्म: अगर तुम न होते (1983)

छठे दशक में बलराज साहनी से शुरू करके बीसवीं सदी के आखिरी सालों तक लिखते रहे गुलशन बावरा ने कमल हासन की दूसरी हिंदी फिल्म सनम तेरी कसम के भी सारे गाने लिखे। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म रही साल 1999 की फिल्म जुल्मी और उनका आखिरी हिट गाना अजय देवगन व तब्बू की फिल्म हकीकत का रहा। इसकी पिछली पीढ़ी के सितारों में वैसे तो राजेश खन्ना को हमेशा आनंद बक्षी के लिखे गानों पर ही होठ हिलाने में आनंद आता था, लेकिन फिल्म अगर तुम न होते का ये गाना राजेश खन्ना पर फिल्माए गए कालजयी गानों में से एक है, संगीत यहां भी आर डी बर्मन का है। जितने गाने गुलशन बावरा ने अपने करियर में लिखे, उनमें से आधे से ज्यादा आर डी बर्मन के लिए ही उन्होंने लिखे।

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