राज कपूर जैसी होली अब कोई नहीं मनाता और न ही आज कोई नहीं मना सकता। सुभाष घई होली में भांग घोलते थे और अमिताभ हर आदमी को गले लगाते थे। रंगों से भरे टैंक में हर किसी को फेंक दिया जाता था। उस होली में कोई भी बचकर नहीं निकल पाता था।
विज्ञापन
2 of 5
रजा मुराद
- फोटो : अमर उजाला
अब होली तो वही है, लेकिन उसको मनाने के तरीके जरूर बदल गए हैं। कुछ इस तरह की भूली बिसरी यादें पांच सौ से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले रजा मुराद अमर उजाला के साथ राजकपूर की होली पर अपना अनुभव साझा कर चुके हैं। मीडिया से रूबरू होने के बाद फिल्म स्टार ने बॉलीवुड की होली की यादों को ताजा किया। बताते हैं कि पहले आर.के स्टूडियो में होली उत्सव बहुत ही शानदार हुआ करता था।
विज्ञापन
3 of 5
r k studio Holi
- फोटो : amar ujala
बताया कि आर के स्टूडियो में होली उत्सव का मतलब भांग व फूड फेस्टिवल था। आर के स्टूडियो में अस्थायी रूप से कुंआ बनाया गया था। जिसमें हर किसी को डुबकी लगाने पर मजबूर कर दिया जाता था, जबरन इस कुएं में सबको डाला जाता था। मुझे पहली बार आर के स्टूडियो में जब होली में हिस्सा लेने का मौका मिला तो मैं तो खुशी से फूला नहीं समाया था। कई सालों तक आरके स्टूडियो में होली का जश्न मनाया गया।
4 of 5
r k studio Holi
- फोटो : amar ujala
राजकपूर की होली बॉलीवुड ही नहीं बल्कि हॉलीवुड तक पसंद की जाती रही। हर किसी कलाकार की तमन्ना होती थी कि आरके की होली जरूर खेली जाए। उन्हें यहां पर होली खेलने का कई दफा मौका मिला। बिग बी अमिताभ बच्चन जैसे कलाकार भी यहां अलग ही नजर आते थे। समय के साथ ही होली मनाने के तरीके भी बदल गए।
अब न तो आरके जैसी होली कहीं दिखती है। बॉलीवुड कलाकार होली जोश के साथ मनाते हैं लेकिन आरके जैसी होली शायद ही कभी मन पाए। अब तो सिर्फ यहां पर यादें ही बाकी रह गई हैं। होली उनके लिए काफी महत्वपूर्ण त्योहार है। इसको सभी को सौहार्द के साथ मिलकर मनाना चाहिए।