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Bhojpuri Cinema: भोजपुरी सिनेमा की खराब स्थिति पर भड़के अंजन श्रीवास्तव, सरकार को घेरते हुए बोले- शर्म आनी चाहिए

Thu, 02 Jun 2022 12:35 PM IST
कविता गोसाईंवाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Aanjjan Srivastav - फोटो : सोशल मीडिया
आज बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अंजन श्रीवास्तव का जन्मदिन है। 2 जून 1948 को कोलकाता में जन्मे अंजन श्रीवास्तव 74 साल के हो गए हैं। अभिनेता के पिता उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के गहमर गांव के रहने वाले थे, जिस वजह से ही अभिनेता की जड़े भी इसी गांव से जुड़ी हुई थी। गहमर एशिया का सबसे बड़ा गांव है। गंगा तट पर बसा यह गांव अपनी खूबसूरती के लिए खूब जाना जाता है। हाल ही में, अंजन श्रीवास्तव ने एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने अपने गांव से लेकर अपने करियर और भोजपुरी सिनेमा तक के बारे में बात की है।

अपने गांव को याद करते हुए अंजन श्रीवास्तव कहते हैं, 'यह गांव इतना बड़ा है कि इसमें चार गांव बन सकते हैं। यहां पर पोस्ट ऑफिस स्कूल सब-कुछ है। एक एक जाति का एक मोहल्ला है। मुसलमान मोहल्ला, कायस्थ मोहल्ला, ब्राह्मण मोहल्ला, ठाकुर मोहल्ला, बनिया मोहल्ला सब अलग अलग है। अंजन श्रीवास्तव के पिता आजादी से पहले 1944 में कोलकाता नौकरी के लिए गए थे। अंजन श्रीवास्तव कहते हैं, 'बाबू जी कहा करते थे कि अगर हम खेत में काम नहीं कर सकते हैं तो उस पर हमारा अधिकार जताने का कोई हक नहीं। इसलिए गाजीपुर की सारी जमीन जायदाद चाचा जी के पास छोड़ गए और चाचा जी ने सारी जमीन जायदाद बर्बाद कर दी। जब हम 2018 में गाजीपुर घर देखने गए थे तब तक सब कुछ टूटा पड़ा था। मैंने कहा घर बनवा दो पैसे मैं भेज दूंगा तो चाचा जी ने कहा हमसे नहीं होगा।'
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anjjan srivastav - फोटो : social media
इसके आगे अंजन श्रीवास्तव कहते हैं, 'उत्तर प्रदेश भले ही मेरी जन्मभूमि नहीं रही है, लेकिन मेरे पूर्वज वहीं के हैं। उत्तर प्रदेश से मुझे शुरू से ही बहुत लगाव रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश ने मुझे भुला किया है। इस बात का मुझे बहुत दुख है। वहां पर किसी ने मेरे काम को सम्मान नहीं दिया। मेरे बड़े भाई भोला नाथ गहमरी भोजपुरी के कवि थे। गाजीपुर का साहित्य समाज उनके नाम से अवार्ड का आयोजन करता है, लखनऊ में मुझे बुलाकर उनके नाम से सम्मानित किया गया था। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक ऐसा कुछ नहीं किया। उत्तर प्रदेश के कलाकार को सम्मान करने की सरकार के पास भी कोई योजना नहीं है। सहारा इंडिया का कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के सरकार के नाम पर होता था वहां पर लोग श्री देवी बोनी कपूर जैसे बाहर के कलाकारों को बुलाते थे। लेकिन कभी भी हम जैसे उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले कलाकारों को सम्मानित नहीं किया गया। 
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anjjan srivastav - फोटो : social media
अंजन श्रीवास्तव कहते है, 'अखिलेश सरकार में कोई वर्मा जी थे, उन्होंने मुझसे कहा कि फिल्म चेंबर का चेयरमैन बन जाइए बहुत फायदा होगा। मैंने कहा कि हम फायदा करने वाले नहीं है। हम सिनेमा के उत्थान के लिए काम करेंगे, क्योंकि मुझे मालूम है कि सिनेमा के उत्थान के लिए कैसे काम किया जाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में जो भोजपुरी फिल्में बन रही हैं उसमें क्या कमी है हमें दिखाई पड़ता है। हम साउथ, बंगाली, मराठी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से तुलनात्मक रूप से अच्छी फिल्में क्यों नहीं बना सकते हैं? एक बार नासिर हुसैन ने भोजपुरी में 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाई' बना के एक उदाहरण दे दिया था कि भोजपुरी में कैसे अच्छी फिल्में बन सकती हैं। उन्होंने किसान की तकलीफें दिखाई थीं। उन्होंने भोजपुरी सिनेमा का एक माहौल दिया था। उसके बाद कुछ अच्छी फिल्में बनी। हिंदी फिल्मों की कॉपी भोजपुरी फिल्मों में होनी लगी। अश्लीलता और डांस नंबर का दौर शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश में ऐसी बहुत सारी कहानियां हैं जिन पर अच्छी फिल्में बन सकती हैं। जब तक आप किसान की पीड़ा नहीं दिखाएंगे तब तक 'मदर इंडिया' जैसी फिल्में नहीं बन सकती हैं। बाहर के लोग अगर भोजपुरी फिल्म बनाने की हिम्मत भी करते हैं तो इसका मार्किट देखकर डर जाते हैं। मैंने भी भोजपुरी में चार फिल्में की हैं जिनमें मनोज तिवारी से साथ 'दामाद जी, रवि किशन के साथ एक फिल्म की थी जिसमें वो डबल हीरो थे, उसके बाद माई के आंचरवा में चारो धाम, बेटी भइल परदेशी जैसी फिल्में अच्छी चलीं।'

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aanjjan srivastav - फोटो : सोशल मीडिया
अंजन श्रीवास्तव ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, 'आज भोजपुरी फिल्में किसी फेस्टिवल में क्यों नहीं जाती हैं? आज इंटरनेशनल फेस्टिवल में मराठी फिल्में जाती हैं, लेकिन भोजपुरी फिल्में क्यों नहीं जातीं। इस बात पर लोगों को शर्म नहीं आती। हम बात करते हैं उत्तर प्रदेश की। उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकार को शर्म नहीं आती। मैं किसी पार्टी को टारगेट करके नहीं बोल रहा हूं। इतने सालों से वहां की सरकार ने भोजपुरी सिनेमा के उत्थान के लिए क्या किया। वहां पर आर्ट और कल्चर के नाम पर कुछ भी काम नहीं हुआ है। मुंबई और कोलकाता में एक से बढ़कर एक टेक्नीशियन पड़े हैं, जिनको बुलाकर अच्छा सिनेमा बनाया जा सकता है। वहां की जो तकलीफें हैं उन पर आप फिल्म नहीं बना सकते हैं, इस पर कोई पहल नहीं करता। आज ओटीटी पर पंचायत जैसे शो बनते हैं और हिट होते हैं। इसका मतलब तो यही हैं न कि दर्शकों को ऐसे कंटेंट पसंद आ रहे हैं।
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Aanjjan Srivastav - फोटो : सोशल मीडिया
अंजन श्रीवास्तव कहते है, 'आज भोजपुरी सिनेमा की सबसे बड़ी समस्या डिस्ट्रीब्यूशन की है। लोग फिल्में तो बनाए जा रहे हैं लेकिन उसे सिनेमा हॉल तक पहुंचाया जाए, इसके लिए किसी के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है। जब एक बार फिर से भोजपुरी सिनेमा एक दौर शुरू हुआ तो हिंदी सिनेमा जगत के कई निर्माताओं ने फिल्में बनाईं, लेकिन फिल्म का सही तरीके से डिस्ट्रीब्यूशन न हो पाने के कारण ही उन लोगों ने फिर से फिल्म नहीं बनाई।'
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