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'शोमैन' के इस सबसे छोटे बेटे ने खूब बटोरीं सुर्खियां, ये हैं चिंपू कपूर की सात अनसुनी कहानियां

Tue, 25 Aug 2020 08:49 AM IST
अपूर्वा राय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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राजीव कपूर - फोटो : ट्विटर
हिंदी सिनेमा में 'शोमैन' के नाम से मशहूर राज कपूर के सबसे छोटे बेटे अभिनेता राजीव कपूर उर्फ चिंपू ने फिल्मों में रहकर इतना नाम नहीं कमाया है जितना उन्होंने विवादों में रहकर अपनी पहचान बनाई है। अपने पूरे अभिनय करियर में उन्होंने कोई 10 से 12 फिल्मों में ही काम किया है लेकिन उनकी सिर्फ एक फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' ही सुपरहिट हो पाई। हालांकि, इसका भी श्रेय राजीव कपूर नहीं बल्कि इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री मंदाकिनी ले उड़ीं। इस वजह से राजीव का मनोबल भी टूटा और उनमें चिड़चिड़ापन भी बढ़ गया। आइए, आज उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से सुनाते हैं।
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प्रेम रोग - फोटो : सोशल मीडिया
सहायक बनकर पद्मिनी से लड़ाया इश्क
राजीव ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक सहायक निर्देशक बनकर की थी। सबसे पहले वह आरके बैनर के तले बनी फिल्म 'बीवी ओ बीवी' के निर्देशक राहुल रवैल के सहायक निर्देशक रहे। इसके बाद खुद राज कपूर ने ही उन्हें अपने साथ एक सहायक निर्देशक के तौर पर रखा। राज कपूर ने जब ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरी की फिल्म 'प्रेम रोग' को निर्देशित किया, उस समय राजीव उनके सहायक रहे। एक सहायक निर्देशक का काम करते हुए राजीव इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी से प्रेम करने लगे।
प्यार का यह सिलसिला शूटिंग के दौरान ही शुरू हुआ था। शूटिंग के दौरान ब्रेक मिलने पर राजीव और पद्मिनी में खूब बातचीत होती थीं। राज कपूर जब राजीव को बुलाते तो वह अक्सर पद्मिनी के मेकअप रूम से ही निकलते हुए पाए जाते थे। यह सब बातें मीडिया में फैल गईं और कई मैगजीनों ने इन घटनाओं के बारे में लिखा। यह सभी चीजें राज कपूर को अच्छी नहीं लगीं। उन्होंने पद्मिनी को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि अगर वह इस फिल्म में काम करना चाहती हैं तो उन्हें राजीव का साथ छोड़ना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करती हैं तो उन्हें यह फिल्म छोड़नी होगी। पद्मिनी ने फिल्म का ही चुनाव किया।
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राजीव कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
राज कपूर के बेटे होने का मिला फायदा
राजीव कपूर को अपनी पहली फिल्म 'एक जान हैं हम' एफसी मेहरा प्रोडक्शंस के बैनर तले मिली। इस फिल्म का निर्देशन राजीव मेहरा ने किया। जब फिल्म की शूटिंग पोर्ट ब्लेयर में चल रही थी तब वहां के लोगों ने राजीव कपूर को खूब अनदेखा किया। दरअसल, वह सोचते थे कि राजीव, कपूर खानदान से कहीं दूर से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, वह शम्मी कपूर जैसे दिखते थे इसलिए उन्हें शक था कि इनका रिश्ता शम्मी कपूर से कुछ हो सकता है। लेकिन जब राजीव ने खुद बताया कि वह राज कपूर के बेटे हैं तो एक ही क्षण में सभी लोगों का बर्ताव उनके प्रति बदल गया। फिर वे सभी लोग राजीव को मुफ्त में खाना, मुफ्त में फोन पर बात करना आदि देने लगे। राजीव भले ही राज कपूर के बेटे थे लेकिन उन्होंने राजीव को अपनी फिल्म में लॉन्च नहीं किया था। एक बार जब खुद राज कपूर से यह पूछा गया कि उन्होंने अपने बेटे राजीव को अपने निर्देशन में बनी फिल्म में लॉन्च क्यों नहीं किया तो उन्होंने बताया कि वह अपने बच्चों के लिए फिल्म नहीं बनाते हैं। हर कहानी अपना कलाकार खुद चुनती है।

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वो सात दिन - फोटो : सोशल मीडिया
अनिल कपूर ने लूट ली महफिल
जब राजीव की पहली फिल्म का प्रीमियर रखा गया तो उन्होंने थिएटर में घुसते ही देखा कि लोग चिल्ला रहे हैं। सीटियां बजा रहे हैं। यह दृश्य देखकर राजीव को बड़ी खुशी हुई और खुद पर गर्व भी महसूस हुआ। राजीव ने भीड़ को संबोधित करते हुए अपना हाथ हवा में हिलाया। हालांकि उन्हें जल्द ही समझ में आ गया था कि भीड़ उनकी वजह से पागल नहीं हुई पड़ी है, बल्कि वह तो अनिल कपूर के लिए सीटियां मार रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर भी इस फिल्म के प्रीमियर पर आए थे। जब वह सिनेमाघर में घुसे तो लोग उनके लिए हल्ला मचाने लगे। राजीव की फिल्म से पहले अनिल की फिल्म 'वो सात दिन' रिलीज हो चुकी थी जो कि एक बड़ी हिट फिल्म थी। लोग तभी से अनिल को पसंद करने लगे थे।
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राजीव कपूर - फोटो : ट्विटर
अपनी ही फिल्म के प्रचार से दूर रहे राजीव
यह किस्सा राजीव की 1985 में आई फिल्म 'जबरदस्त' का है जिसमें उन्होंने दोहरा किरदार निभाया है। भले ही राजीव इस फिल्म में दोहरे किरदार में नजर आए हैं लेकिन पूरा श्रेय तो जयाप्रदा और सनी देओल ही ले उड़े। एक इंटरव्यू में खुद राजीव ने बताया था कि उन्होंने यह फिल्म सिर्फ इस फिल्म के निर्देशक नासिर हुसैन की वजह से साइन की थी। फिल्म साइन करने से पहले कई लोगों ने राजीव से कहा था कि वह इस फिल्म में अच्छे नहीं लगेंगे लेकिन राजीव उनसे सहमत नहीं हुए। उन्होंने अपने आप को वीडियो में भी देखा तो वह बहुत खुश हुए। हालांकि फिल्म के दूसरे अभिनेता सनी देओल अपने किरदार से खुश नहीं थे। उनका कहना था कि उन्होंने तो फिल्म में कुछ किया ही नहीं।

जब इस फिल्म के प्रचार की बारी आई तो निर्माताओं ने सनी देओल के बड़े-बड़े पोस्टर छपवा दिए जबकि राजीव को थोड़ी सी जगह मिली। इस बात से खफा होकर जब राजीव ने फिल्म के निर्माताओं से बात की तो उन्होंने बहाना लगाया कि यह उनकी नहीं, बल्कि प्रिंटर की गलती है। जबकि, हकीकत में इसका कारण यह था कि इससे पहले राजीव की सभी फिल्में लगभग फ्लॉप ही रही थीं और सनी देओल की हाल ही में फिल्म 'अर्जुन' रिलीज हुई थी जो कि सुपरहिट रही। लोग सनी देओल को पसंद करने लगे थे और राजीव अपनी पहचान नहीं बना पा रहे थे। इस वजह से राजीव फिल्म के प्रचार में भी शामिल नहीं हुए।
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राम तेरी गंगा मैली - फोटो : सोशल मीडिया
पिता से ही हो गया मनमुटाव
लगातार फ्लॉप होती फिल्मों के बाद जब राजीव को उनके पिता राज कपूर ने अपनी फिल्म में लेने की बात कही तो वह फूले नहीं समाए। दरअसल राज कपूर ने राजीव को 'राम तेरी गंगा मैली' में मुख्य भूमिका निभाने के लिए कहा था। राजीव ने हंसी खुशी पूरी फिल्म की। फिल्म रिलीज हुई और फिल्म सुपरहिट भी रही। लेकिन, इसका फायदा राजीव को कतई नहीं मिल पाया। दरअसल, फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री मंदाकिनी ने सारी सुर्खियां बटोर लीं।
राजीव की ये पहली फिल्म सुपरहिट रही, इस बात की उन्हें खुशी जरूर थी। लेकिन, उस फिल्म का फायदा उन्हें बिल्कुल नहीं मिल पाया, इस बात से उनके अंदर नाराजगी पैदा हो गई। वह अपने पिता से लगे रहते थे कि उस दिन का फायदा उन्हें बिल्कुल नहीं मिला है इसलिए उन्हें अपनी किसी दूसरी फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने का मौका दें। हालांकि, राज कपूर उनकी इस बात पर कभी ध्यान नहीं देते थे। इस चक्कर में राजीव के अंदर अपने पिता के प्रति मनमुटाव पैदा हो गया और दोनों के बीच में दूरियां भी बन गई थीं। इसके बाद राज कपूर ने अपनी किसी भी फिल्म में राजीव को नहीं लिया।
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राजीव कपूर, सलमान खान - फोटो : ट्विटर

सलमान खान से हुई लड़ाई
अपनी इकलौती हिट फिल्म के बाद राजीव दूसरे निर्माताओं और निर्देशकों के साथ लवर बॉय, प्रीती, अंगारे, शुक्रिया, जलजला, नाग नागिन जैसी फिल्में करते रहे लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। अंत में उन्होंने अभिनय का रास्ता छोड़ दिया और फिल्म निर्माण के रास्ते पर निकल पड़े। उन्होंने सबसे पहले कार्यकारी निर्देशक के रूप में 1991 में आई फिल्म 'हिना' में काम किया। यह एक रोमांटिक ड्रामा कर रही है जिसमें ऋषि कपूर, जेबा बख्तियार और अश्विनी भावे मुख्य भूमिकाओं में नजर आईं। इस फिल्म का निर्देशन राजीव के बड़े भाई रणधीर कपूर ने किया है। फिल्म को बनाने की शुरुआत तो राज कपूर ने ही की थी लेकिन वह इसे पूरी नहीं कर पाए।
जब फिल्म की शूटिंग कश्मीर में चल रही थी, उसी समय अभिनेता सलमान खान भी अपनी फिल्म 'सनम बेवफा' की शूटिंग उसी लोकेशन पर कर रहे थे। खास बात यह रही कि इन दोनों फिल्मों के कलाकार एक ही होटल में रुके थे। उस समय सलमान की मुलाकात पहली बार जेबा बख्तियार से हुई थी। सलमान को जेबा पसंद आईं और वह उन्हें अक्सर फूल वगैरह भेजा करते थे। एक दिन उन्होंने जेबा से डिनर पर चलने के लिए पूछ ही लिया। जेबा ने हां कर दी और जेबा की मां भी उनके साथ आईं।
जब इस घटना का पता राजीव कपूर को लगा तो वह भड़क गए। राजीव नहीं चाहते थे कि आरके बैनर के तले बन रही फिल्म की हीरोइन सलमान के साथ रहे। वह वहीं पहुंच गए जहां ये लोग डिनर करने वाले थे। राजीव भी उसी मेज पर जा कर बैठे और सलमान से लड़ाई करने के मूड में नजर आए। खबरें तो तरह-तरह की सामने आईं जिसमें एक खबर यह भी बताती है कि वहां सलमान और राजीव के बीच में हाथापाई हुई। हालांकि, राजीव ने कहा कि सलमान में इतनी हिम्मत नहीं कि वह उन्हें हाथ भी लगा सकें। और, सलमान ने भी कहा कि राजीव ने यह पूरी कहानी सस्ती पब्लिसिटी पाने के लिए रची है।

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राजीव कपूर - फोटो : Social Media
राजीव कपूर की मोहब्बत के किस्से
राजीव जब फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हुए ही थे, तभी से उनके अभिनेत्रियों के साथ रिश्ते होने की चर्चाएं होने लगी थीं। सबसे पहली खबर तो तब सामने आई जब वह फिल्म 'प्रेम रोग' में अपने पिता राज कपूर के सहायक निर्देशक थे। उस वक्त  उस फिल्म की हीरोइन पद्मिनी कोल्हापुरी के साथ राजीव रिश्ते में थे।  इसके अलावा राजीव का नाम फिल्म 'बॉर्डर' में नजर आ चुकी अभिनेत्री सपना बेदी से भी जुड़ चुका है। अमेरिका से निकिता नाम की एक प्रवासी भारतीय के साथ भी राजीव का नाम जोड़ा गया। दरअसल, निकिता को लगा था कि उन्हें 1991 में आई फिल्म 'हिना' में मुख्य भूमिका निभाने को मिलेगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।
राजीव का रिश्ता अपनी सह अभिनेत्री दिव्या राणा के साथ भी गहरा रहा है। तब इन दोनों की सगाई की खबरें खूब उड़ी थीं।निर्माता  सोहनलाल कंवर की बेटी मीना कंवर (तृष्णा)  के साथ भी राजीव का नाम जुड़ा। राजीव ने वर्ष 2001 में एक आर्किटेक्ट आरती सब्बरवाल से शादी की। शादी सिर्फ दो साल ही चली। बाद में दोनों का तलाक हो गया।
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