दीपिका चिखलिया
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आप मर्यादा की बात कर रही हैं, लेकिन जिन्होंने अपनी मर्यादाएं त्याग दी हैं, पुरस्कृत तो वैसे ही लोग हो रहे हैं?
आपका इशारा अगर पद्म पुरस्कारों की तरफ है तो मैं इसका फैसला भगवान पर छोड़ चुकी हूं। ये सही बात है कि पद्म सम्मान समय रहते मिले तो उसका आनंद अलग होता है। लेकिन मेरे अंदर धैर्य बहुत है। मेरा भगवान मेरे प्रशंसक हैं। जिस तरह से नई पीढ़ी के लोगों ने ‘रामायण’ दोबारा शुरू होने के बाद मुझे पसंद किया, मुझे लगता है यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। कभी न कभी सरकार को भी ये बात समझ में आएगी ही। मैं भी यही हूं, सरकार भी यही है, कभी न कभी तो मिल ही जाएगा। मैं जीवन में हमेशा अच्छा ही सोचने वाली इंसान हूं।