गुरु दत्त
फिर अगली सुबह गुरु दत्त ने आंखें नहीं खोली। फिल्मों के लेखक अबरार अल्वी ने अपनी किताब 'टेन ईयर्स विद गुरु दत्त' में बताते हैं कि घटना की जानकारी पर जब वो आर्क रॉयल पहुंचे तो उन्होंने देखा, 'गुरु दत्त अपने कुर्ते पायजामे में शालीनाता से लेटे हुए थे। बिस्तर के बगल में एक छोटी सी शीशी में गुलाबी रंग का तरल पदार्थ था।' यह देखते ही अबरार के मुंह से निकला, 'आह! मृत्यु नहीं आत्महत्या! इन्होंने अपने आपको मार डाला।' गुरु दत्त ने हिन्दी सिनेमा को 'कागज के फूल', 'प्यासा', 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'बाज', 'जाल', 'बाजी', 'आर पार', 'चौंदवीं का चांद', 'साहिब बीबी और गुलाम' जैसी फिल्में दी थीं।