फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

EXCLUSIVE: ‘डीडीएलजे’ के मराठा मंदिर में फिर से रिलीज होने की ये है सच्चाई, पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट

Sun, 08 Nov 2020 05:28 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
डीडीएलजे, मराठा मंदिर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘कौआ कान ले गया’ ये कहावत कई बार लगता है कि हिंदी सिनेमा के लिए ही बनी है। यहां की पूरी गणित प्रेस रिलीज के बहाने ‘लीक’ होने वाली खबरों से बनती है। सारे समीकरण नई फिल्मों का एलान होने, पुराने पर परदा डालने से ही बनते बिगड़ते रहते हैं। दो दिन पहले खबर फैली कि कोरोना संक्रमण काल के बाद सिनेमाहालों के खुलते ही यशराज फिल्म की बहुचर्चित फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिर से मराठा मंदिर में लौट आई है। कॉपी पेस्ट वालों ने इसे भी अपने अपने पोर्टल पर छाप लिया, बिना ये जांचे कि आखिर मराठा मंदिर कोई पहुंचा भी कि नहीं। चलिए, हम आपको ले चलते हैं मराठा मंदिर और मुंबई के कुछ दूसरे सिनेमाघरों तक और बताते हैं वहां का आंखों देखी हाल।
विज्ञापन

2 of 7
मराठा मंदिर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
देश में चारों तरफ हल्ला है कि अभिनेता शाहरुख खान की प्रतिष्ठित फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमाघर में फिर से रिलीज हो गई है। लेकिन,  मौके पर सन्नाटा पसरा पड़ा है। मराठा मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मी संतोष इस सवाल से ही नाराज हो गए कि फिल्म देखने कोई आया कि नहीं। उनका डॉयलॉग था, 'कहां घुसे चले आ रहे हो आप? दिखाई नहीं देता, थिएटर बंद है।' संतोष अपनी जगह सही भी थे।
विज्ञापन

3 of 7
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मामला थोड़ा शांत होने के बाद संतोष कहते हैं, 'सरकार ने तो ऐलान कर दिया कि खोल लो सिनेमाघर लेकिन शुरू करने से पहले सौ काम होते हैं। और फिल्म भी तो होनी चाहिए चलाने के लिए। 'डीडीएलजे' दिन भर थोड़े ही चलेगी। कोई नई फिल्म आएगी तो वह भी चलाएंगे।’ व्यापार की दृष्टि से संतोष की बात भी सही है लेकिन फिर 'डीडीएलजे' के मराठा मंदिर में दोबारा रिलीज होने की खबर फैलाने का क्या मतलब? अब इसका जवाब तो संतोष के हिसाब से मराठा मंदिर के मालिक ही देंगे।

4 of 7
स्टर्लिंग सिनेमा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हमारी जमीनी छानबीन का अगला पड़ाव मुंबई का संपन्न इलाका फोर्ट रहा। यहां स्थित स्टर्लिंग सिनेमा के बाहर ही कुर्सी डाले बैठे सुरक्षाकर्मी से जब पूछा गया कि 5 नवंबर से सिनेमाघरों को खोलने की अनुमति मिल गई है फिर भी सिनेमाघर बंद क्यों है? इस पर उस सुरक्षाकर्मी ने कहा कि सरकार ने बोल दिया है लेकिन सिनेमाघर को भी तो अपनी व्यवस्था देखनी पड़ेगी। 50 फीसदी लोगों को ही सिनेमा हॉल में फिल्म देखने की इजाजत है तो बाकी सीट तो ब्लॉक करनी पड़ेंगी न? यहां गार्ड का कहना था कि दीवाली से एक या दो दिन पहले ही ये थिएटर खुलने की संभावना है।
विज्ञापन

5 of 7
आइनॉक्स मेगाप्लेक्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सिनेमाघरों में चलने वाली फिल्मों के ऊपर एक विस्तारित अर्थव्यवस्था निर्भर होती है। ऑटो टैक्सी वालों को भाड़ा मिलता है। आसपास की दुकानों की बिक्री बढ़ती है। जैसे कि स्टर्लिंग सिनेमा के ही सामने वाली सैंडविच की दुकान। दुकानदार से पूछ ही लिया कि अगर ये सामने वाला सिनेमाघर खुल जाएगा तो कितना उत्साह है फिल्म देखने का? दुकानदार ने बड़े ही सर्द लहजे में उत्तर दिया, 'ऐसे में कौन देख रहा है फिल्म? फिल्म भी ढंग की है नहीं और पब्लिक के पास पैसा किधर है? यहां सैंडविच में ही घाटा आ रहा है। बंधे हुए ग्राहक भी नहीं आ पा रहे।' यही व्यथा सिनेमाघरों के आसपास खोमचे लगाने वाले तमाम दूसरे लोगों की भी है।
विज्ञापन

6 of 7
मुक्ता ए2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
यहां से हम पहुंचे फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई के स्वामित्व वाले मुक्ता ए2 सिनेमाघर। यहां के गार्ड का मिजाज भी थोड़ा बिगड़ा हुआ दिखा। सिनेमाघर खुलने के बारे में पूछा तो गुस्से में भरकर सीधे बोला, 'अगले साल'। वहां से आगे टाउन में टहलने का मतलब नहीं था तो ये हुआ कि सबअर्बन इलाकों का हाल देखा जाए। अंधेरी स्थित इनफिनिटी मॉल में पीवीआर आइकन सिनेमा के शौकीनों का सबसे मशहूर अड्डा है लेकिन यहां पहुंचने पर पता चला कि यहां तो राजमिस्त्रियों ने टाइल्स लगाने का काम शुरू कर रखा है। हालांकि, कहा उन्हें भी गया है कि दीवाली से पहले सिनेमाघर खोला जाना है इसलिए काम फटाफट खत्म करो।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
पीवीआर इनफिनिटी मॉल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इनफिनिटी मॉल, अंधेरी के बाहर निकल कर जब मेन रोड से ऑटो लिया तो उसे चलाने वाले चालक उत्तर प्रदेश के शहर वाराणसी के ही निकले। जब उन्हें पता चला कि मराठा मंदिर में 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' फिर से रिलीज हुई है तो उनकी प्रतिक्रिया रही, 'अगर पुरानी पिक्चर चलानी ही थी तो ऐसी चलाते जिसे लोग देखते। जब हम बनारस में थे तो आनंद मंदिर सिनेमा में 'अमर अकबर एंथनी' लगी थी। लंबी लाइन लगाकर हमने टिकट खरीदी। तब जाकर फिल्म देखी। ऐसा मजा आया कि वह फिल्म मैंने चार दिन में तीन बार देख ली। अब ऐसा ही कुछ चलाते हैं तो ज्यादा मजा आता।'

पढ़ें: फिल्म निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के घर NCB की छापेमार कार्रवाई, कुछ मात्रा में ड्रग्स बरामद
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें