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वेब सीरीज में न्यूड सीन्स और गालियों की जरूरत क्यों? सोनाली के पति ने इंटरव्यू में किए बड़े खुलासे

Fri, 02 Aug 2019 12:08 PM IST
Avinash Pal मुंबई टीम, अमर उजाला
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सोनाली बेंद्रे और गोल्डी बहल - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी सिनेमा को पहली बार अपनी फिल्म द्रोण में स्पेशल इफेक्ट्स से परिचित कराने वाले गोल्डी बहल अब ओटीटी की तरफ बढ़ चले हैं। उनके निर्देशन में बनी नई वेब सीरीज रिजेक्स की इन दिनों हर तरफ चर्चा हो रही है। ऐसे में अमर उजाला ने की गोल्डी बहल से खास बातचीत...
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वेब सीरीज 'रिजेक्स' - फोटो : सोशल मीडिया
रिजेक्स की कहानी को दर्शाने के लिए न्यूड सीन्स और गालियों की जरूरत क्यों पड़ी? 
इस वेब सीरीज के  न्यूड सीन्स और गालियां कहानी के हिसाब से बिल्कुल सटीक हैं। कामुकता इस मायने में शो का इसलिए प्रमुख हिस्सा है क्योंकि आज के युवा इस बारे में बातें करने में हिचकते नहीं है। ये आज के जमाने के दर्शक हैं और मैने इस तरह के दृश्यों से इनकी दुनिया दिखाने की कोशिश की है। आज के युवा जैसी भाषा का प्रयोग आपसी बातचीत में करते हैं, मैंने सीरीज में उसी का इस्तेमाल किया है। मैं असलियत को तो नहीं बदल सकता और न ही बदलना चाहूंगा। 
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वेब सीरीज 'रिजेक्स' - फोटो : सोशल मीडिया
आपका बेटा 14 साल का है। क्या उसे ये शो घऱ में देखने की छूट रहेगी?
मेरे हिसाब से यह शो किसी भी 15 साल से उपर की उम्र के बच्चे या इंसान के लिए पूर्ण रूप से सही है। बात रही मेरे बेटे की तो जिस बच्चे को इस तरह का कुछ भी देखना होता है,  तो वह कई बार रोकने के बाद भी उसे देख ही लेता है। किसी भी तरह की बाधा लेकर आना अपने आप में ही गलत है। बल्कि, मैं तो अपने बेटे को खुद ही यह दिखाना चाहूंगा। अब वह बड़ा हो रहा है उसे इन सब चीज़ों के बारे में पता होना चाहिए। 

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द्रोणा - फोटो : सोशल मीडिया
आपने फिल्म द्रोण से पहली बार हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में वीएफएक्स की शुरूआत की, लेकिन फिल्म चली नहीं, क्या लगता है कि कहां गलती हुई आपसे?
किसी भी फिल्म का चलना और ना चलना उसकी कहानी पर निर्भर करता है। मैं द्रोण के न चलने जिम्मेदारी पूर्ण रूप से अपने ऊपर लेता हूं। किसी भी फिल्म में हर विभाग को अपना सबसे बेहतर काम पेश करना होता है। अगर उसका निर्देशक अपना बेहतरीन न भी दे पाए तो भी कई बार फिल्म चल जाती है। टीम वर्क न हो तो कोई भी फिल्म या उसका निर्देशक चुटकुला बन सकता है।
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Goldie Behl - फोटो : twitter
वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी का हर कदम पर साथ कितना जरूरी है, अपनी सोनाली की बीमारी के दौरान आपने कैसे खुद को संभाला?
कोई भी विवाहित जोड़ा एक-दूसरे की देखभाल जरूर करता है। हमने जो किया वही हर कोई करेगा। यानी अगर सोनाली और मैं एक-दूसरे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, वैसे ही हर जोड़ा करने के लिए तैयार रहेगा। इस तरह देखा जाए तो मैने जो किया उसमें कोई बड़ी बात नहीं है। बात की जाए सोनाली का तो वह बेहद मजबूत और व्यस्त शख्सियत हैं। वह इससे अकेले पार पा सकती थीं लेकिन तब वह बिलकुल अकेली पड़ जातीं। मुझे खुशी है कि उनका परिवार, उनके दोस्त और उनका जीवन साथी उनके साथ रहे। और खुशी ये भी है कि वह हमारे साथ हैं।
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