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EXCLUSIVE: आम आदमी पार्टी से दूरी पर गुल पनाग ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, सच्चे प्रेमी की बताई परिभाषा

Sat, 07 Mar 2020 07:40 AM IST
Mishra Mishra रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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gul panag - फोटो : Social Media
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1999 में मिस इंडिया बनीं मशहूर अदाकारा गुल पनाग का नाम उन शख्सियतों में शामिल है जो जीवन अपनी शर्तों पर जीते हैं। 2003 में फिल्म धूप से अपना अभिनय करियर शुरू करने वाली गुल एक दमदार अभिनेत्री हैं। एक सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं। कुशल गृहणी हैं। एक जिम्मेदार बेटी, पत्नी और मां भी हैं। जिंदगी के हर किरदार में सामंजस्य बिठाती गुल पनाग से ये अमर उजाला ने की ये खास मुलाकात।
 

आपको अक्सर मोटरसाइकिल की सवारी करते देखा जाता है। ये शौक कैसे और कब लगा?
मैं उस वक्त कॉलेज में थी और मेरे घर में एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटर हुआ करता था। जब मैं चलाने लायक हुई तो मुझसे पूछा गया कि तुम्हें इन दोनों में से क्या चाहिए? मैं जवाब देने ही वाली थी कि अचानक पीछे से किसी ने कहा कि जाहिर है स्कूटर ही चलाएगी। यह बात मुझे लग गई। मैंने सोचा कि यह फैसला करने वाले वे कौन हैं कि मैं क्या चलाऊंगी और क्या नहीं? फिर मैंने उस वक्त मोटरसाइकिल को चुना। इसी तरह जब मैं अपने कॉलेज में बीए का फॉर्म भरने के लिए गई तो मुझसे किसी ने कहा कि क्या तुम आर्ट्स के लिए फॉर्म भर रही हो? इसी बात पर मैंने उस समय गणित को चुन लिया। मुझे सुकून सिर्फ अपने मन का करने में मिलता है।

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gul panag - फोटो : Social Media

आपके पति ऋषि एक पायलट हैं और आप अभिनेत्री, दोनों का मेल कैसे हुआ?
मेरे पास भी जहाज उड़ाने का लाइसेंस है। मैं ऋषि को बोर्डिंग स्कूल में मिली थी। मुझे वह याद रहे लेकिन उन्हें मैं याद नहीं थी। मैं 15 साल की थी जब मैंने उन्हें देखा और तभी  फैसला कर लिया कि मैं इसी तरह के किसी इंसान से शादी करूंगी। उसके बाद फिर हम करीब छह साल बाद मिले। मैंने याद दिलाया तो उन्हें भी याद आ गया। तब से फिर हम साथ हैं। वह मेरे बहुत बड़े सहयोगी हैं। उन्होंने मुझे मेरी हर कामयाबी में मदद की है। जो इंसान आपके सपनों को अपना सपना समझकर जिए वही सच्चा प्रेमी है।

आपके हिसाब से प्रेम की परिभाषा क्या है?
प्यार उम्र के अलग-अलग पड़ावों से गुजरता है तो उस हिसाब से उसकी परिभाषा बदलती रहती है। जब प्यार शुरुआत के पड़ाव में अपने चरम पर होता है तो उसको महसूस करना कुछ अलग है। लेकिन वही प्यार जब मध्य उम्र में पहुंच जाता है तो उसकी परिभाषा बदल जाती है। फिर उसके पर्यायवाची समझ में आते हैं जिसे हम एक दूसरे की देखभाल करना या एक दूसरे का आदर करना कह सकते हैं। मेरे हिसाब से प्रेम की परिभाषा बहुत कठिन है लेकिन समय-समय पर उसके पर्यायवाची ढूंढना आसान है। अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो आपको इसे हर रोज जाहिर करना चाहिए।

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gul panag - फोटो : Social Media

फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2' में आपका किरदार आपकी शख्सियत के हिसाब से बहुत छोटा रहा, इसके लिए हां करने की कोई खास वजह?
जब ये किरदार मुझे सुनाया गया तो कुछ और था और जब उसको फिल्माने की बारी आई तो ये कुछ और हो गया। फिल्म के निर्देशक पुनीत मल्होत्रा ने कहा था कि ये किरदार उन्होंने मुझे ध्यान में रखकर लिखा है। लेकिन जब शूटिंग की बारी आई तो किरदार काफी छोटा हो चुका था। हालांकि, उस वक्त मुझसे पूछा गया था कि क्या अब भी आप इस किरदार को निभाना चाहेंगी? मैंने सोचा कि बैनर इतना बड़ा है तो कर ही लेते हैं। मुझे उस फिल्म का हिस्सा बनकर बहुत मजा आया।

आपकी एक बेव सीरीज 'पवन एंड पूजा' इन दिनों प्रसारित हो रही है और क्या क्या कर रही हैं इन दिनों?
हाल ही में मैंने दो-तीन पटकथाओं को पढ़ा है। मेरा पिछला साल बहुत ही व्यस्त रहा। मैं अपनी एक्टिंग में, अपने बच्चों को संभालने में, अपनी प्रोडक्शन कंपनी को संभालने में और राजनीति में इतना व्यस्त हो गई कि एक वक्त तो मुझे लगा कि ये मुझसे हो ही नहीं पाएगा। मगर मेरा पिछला साल मेरे करियर का सबसे बेहतरीन साल रहा है। हाल ही में हमने अपनी पहली शार्ट फिल्म बनाई है। एक फिल्म की कहानी भी लिख रही हूं और एक वेब शो में मैंने हाल ही किया है लेकिन उसके बारे में बात करने की मुझे अनुमति नहीं है।

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Gul Panag The Family Man - फोटो : instagram

राजनीति में आप कितनी सक्रिय हैं?
मेरा मानना है कि देश के प्रत्येक नागरिक को राजनीति में सक्रिय होना चाहिए। अगर सोचते हैं कि कोई और आएगा और आपकी समस्याओं का समाधान करेगा तो यह बहुत मुश्किल है। राजनीति में सक्रिय होने के लिए लोग सिर्फ एक दिन निकालते हैं जिस दिन वोट करते हैं। उसके बाद अगले पांच साल तक पूरा देश एक ही आदमी के कंधे पर छोड़ देते हैं, क्यों? जब तक हम पूरी तरह से हर दिन राजनीति में सक्रिय नहीं होंगे तब तक हमें वह देश नहीं मिलेगा जिसकी हमें चाहत है।

'आम आदमी पार्टी' से आपने दिल्ली विधानसभा चुनाव में दूरी क्यों बनाए रखी?
मेरी शूटिंग की तारीखें पहले से तय हो चुकी थीं। अब इसके बीच में चाहे आम आदमी पार्टी जीते या हारे मैं उसके साथ में नहीं जा सकती था। मैं अपना समय इधर दे चुकी हूं। इसी काम से मेरी रोजी-रोटी चलती है तो मैं इसे छोड़ कर कैसे जा सकती हूं। फिर मेरा बेटा भी सिर्फ दो साल का है। उसकी देखभाल करना मेरा कर्तव्य भी है और प्राथमिकता भी।

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gul panag
एक अखबार आपके जीवन में क्या अहमियत रखता है?
मेरा तो करियर ही अखबारों ने बनाया है। 20 साल की थी तो मिस इंडिया होने के नाते इंटरव्यू दे रही थी। उसके बाद हर मोड़ पर मैं अपने सपने साझा करती रही। बाद में पत्रकारों ने ही मुझे याद दिलाना शुरू किया कि फलां इंटरव्यू में आपने फलां बात कही थी। तो अखबारों ने हमेशा मुझे मेरे सपनों को याद दिलाने का काम किया है।

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