पंकज त्रिपाठी
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पंकज त्रिपाठी को ओटीटी पर जबसे कामयाबी मिली है, न सिर्फ उनके दाम बल्कि उनका काम भी काफी बढ़ गया है। वह ना, ना करते रहते हैं, उनके मैनेजर उनके पास हां, हां करके काम लाते रहते हैं। वह अपना रेट बढ़ाते हैं, उनके मैनेजर प्रोड्यूसर, डायरेक्टर का कद बढ़ा देते हैं। दर्जनों के हिसाब से पुरस्कार बंटोरने वाले और हिंदी को गलती से भी राष्ट्रभाषा कह देने पर बिदक जाने वाले बांग्ला फिल्म निर्देशक श्रीजित मुखर्जी की फिल्म ‘शेरदिल’ ने पंकज त्रिपाठी की ब्रांडिंग की जो धुलाई की है, उसे लेकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में खूब चुटकुले बन रहे हैं।