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ये हैं बॉलीवुड के पांच सदाबहार गीत, जानें इनके पीछे के किस्से

Wed, 21 Oct 2020 06:53 PM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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बॉलीवुड के सदाबहार गाने - फोटो : फाइल फोटो
भारतीय सिनेमा संगीत के बिना अधूरा है। दरअसल हमारी अधिकतर फिल्मों में गानों का एक अहम योगदान रहा है। कभी ये किरदारों के बीच रोमांस दिखाने में मदद करते हैं तो कई दफा गानों में ही फिल्म के राज और किस्से छिपे होते हैं। हर गाने की अपनी कहानी है और हर गीत के पीछे एक किस्सा। कुछ समय पहले एक किताब आई थी 'गाता रहे मेरा दिल- 50 क्लासिक हिंदी फिल्म गीत'। इस किताब में 50 गानों की एक लिस्ट थी जिसमें हिंदी सिनेमा के पहले गाने 'बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए' से लेकर 1992 में आई फिल्म रोजा के गाने 'दिल है छोटा सा' तक के फिल्म संगीत के सफर को बखूबी पिरोया गया है। इस किताब से ही पांच क्लासिक और सदाबहार गानों के बारे में आपको बताएंगे, साथ ही इससे जुड़े दिलचस्प किस्सों के बारे में भी...
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आवारा - फोटो : फाइल फोटो
गीत: तेरे बिना आग ये चांदनी
फिल्म: आवारा

1951 में आई फिल्म आवारा का यह गाना इस लिस्ट में टाइटल गीत 'आवारा हूं' को पछाड़ कर इसलिए आ गया क्योंकि यह बॉलीवुड का दूसरा ऐसा गाना था जो किसी सपने पर फिल्माया गया था और इस गाने के लिए पहली बार किसी फिल्म में इतना भव्य सेट बना था। आर के स्टूडियोज में बने इतने बड़े और भव्य सेट को बनाने में तीन महीने का समय लगा था और इस गाने को 72 घंटो में शूट किया गया था। बड़े पर्दे पर ये किसी थ्री डी फिल्म सा दिखता था।
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खामोशी - फोटो : फाइल फोटो
गीत: वो शाम कुछ अजीब थी
फिल्म: खामोशी

1970 में आई इस फिल्म के संगीतकार थे हेमंत कुमार और इस फिल्म के किसी एक गाने को चुनना खासा मुश्किल काम है क्योंकि इसी फिल्म में 'तुम पुकार लो' जैसा गाना मौजूद है लेकिन 'वो शाम' इस क्लासिक लिस्ट में है क्योंकि यही वो गाना था जिससे किशोर दा ने कुछ ठहरे हुए गीत गाने शुरू किए थे। इससे पहले किशोर दा को इंडस्ट्री में हल्के और एनर्जी वाले गीत गाने वाला गायक माना जाता था लेकिन हेमंत कुमार की जिद पर उन्होनें ये गीत गाया और फिर इतिहास रच दिया। इस गाने को कोलकाता में हुगली नदी पर खुले में फिल्माया गया था और हजारों लोग शूटिंग के दौरान मौजूद थे।

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शोर - फोटो : फाइल फोटो
गीत: एक प्यार का नगमा है
फिल्म: शोर

1972 में आई इस फिल्म का यह गाना इतना लोकप्रिय हुआ था कि इस गाने में मौजूद अभिनेत्री नंदा को इस फिल्म की लीड अभिनेत्री समझा जाने लगा था जबकि मुख्य अभिनेत्री जया भादुड़ी थी। इस गाने में संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल में से लक्ष्मीकांत ने भी आवाज दी है और लता मंगेशकर ने भी एक बच्चे की आवाज में गाना गाया है। इस फिल्म से जुड़ा अनूठा किस्सा ये था कि इस फिल्म में नंदा के किरदार के लिए मनोज कुमार, शर्मिला टैगोर और स्मिता पाटिल के पास गए थे लेकिन उनके इनकार के बाद ही यह रोल नंदा को मिला और वो हिट हो गईं।
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उपकार - फोटो : फाइल फोटो
गीत: कसमे वादे प्यार वफा सब
फिल्म: उपकार

1967 में आई यह फिल्म सुपरहिट थी लेकिन इसके एक और गाने 'मेरे देश की धरती' को लेकर लेखक दुविधा में थे, लेकिन कसमे वादे ने जंग जीती। लेखकों के अनुसार यह गाना पहले किशोर जी को ऑफर हुआ था लेकिन इस गाने को सुनने समझने और गुनगुनाने के बाद किशोर दा ने मन्ना डे को यह गाना दिए जाने की सलाह दी और सलाह काम कर गई क्योंकि मन्ना डे ने इस गीत में वो भाव ला दिए जो कल्याण जी-आनंद जी ढूंढ रहे थे। वैसे उपकार फिल्म से जुड़ी एक खास बात ये भी थी की इसी फिल्म से प्राण को अपनी दो दशक पुरानी विलेन की इमेज तोड़ने का मौका मिला और उन्हें कुछ सकारात्मक रोल मिलने शुरू हुए।
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आंधी - फोटो : फाइल फोटो
गीत: तुम आ गए हो
फिल्म: आंधी

इस फिल्म के इस गाने को लिस्ट में लाने का कारण बड़ा टेक्निकल है लेकिन इसी फिल्म के दो दूसरे गाने 'इस मोड़ से जाते हैं' और 'तेरे बिना जिंदगी से कोई' भी कुछ कम नहीं है। इस मोड़ से जाते हैं का संगीत बनाते वक्त गुलजार से आर डी बर्मन ने पूछा था, "नशेमन जगह कहां पर है ?" वहीं 'तेरे बिना जिंदगी से कोई' यूट्यूब पर सबसे ज्यादा बार देखे गए रेट्रो गानों की लिस्ट में शुमार है। इसी फिल्म से गुलजार और आर डी बर्मन की दोस्ती बहुत गहरी हो गई थी।

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