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Film Review: छोटी स्टार कास्ट के दम पर बड़ा संदेश देती है '2016 द एंड'

Fri, 06 Oct 2017 11:14 AM IST
रवि बुले
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2016 The End
निर्माता-निर्देशकः जयदीप चोपड़ा
सितारेः दिव्येंदु शर्मा, कीकू शारदा, हर्षद चोपड़ा, प्रिया बनर्जी, राहुल रॉय
रेटिंग:  **1/2

टाइटल से पता लगता है कि फिल्म पिछले साल रिलीज होनी थी मगर किन्हीं कारणों से देर हो गई। तसल्ली की बात यह है कि आप इसे 2017 में भी देख सकते हैं क्योंकि न दुनिया खत्म हुई और न बदली।

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2016 The End
दुनिया खत्म होने में एक हफ्ता बचा है तो आप क्या करेंगे? सबके पास करने को बहुत कुछ है मगर मर्जी से जीने का इरादा कितनों के पास है? युवा निर्देशक जयदीप चोपड़ा ने अपनी दूसरी फिल्म में कॉमिक अंदाज में इस विषय को छुआ है। झूठी खबरों की बाढ़ वाले सोशल मीडिया के दौर में नश्वर संसार के ‘द एंड’ की खबरें अक्सर एक से दूसरे मोबाइल में उड़ कर पहुंचती हैं। यह सनी (दिव्येंदु शर्मा), अस्सी (कीकू शारदा), राहुल (हर्षद चोपड़ा) और शीतल (पिया बनर्जी) की कहानी है, जो समाज के अलग-अलग वर्गों से हैं। 
 
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2016 The End
इन दोस्तों की अपनी-अपनी मुश्किलें हैं लेकिन यह जानने से बड़ी समस्या क्या हो सकती है कि दुनिया सात दिनों में नष्ट होने वाली है? आप खत्म होने वाले हैं। चारों युवा जमकर मौज-मस्ती करने की ठानते हैं। किस्मत साथ देती है और उन्हें एक करोड़ रुपये के बैग से भरी कार मिल जाती है! वे गोवा निकल लेते हैं। हंसते-गाते-मस्ती करते दिनों में संकट डॉन डिकोस्टा (राहुल रॉय) के रूप में आता है क्योंकि कार और नोट उसी के हैं!!
 

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2016 The End
जयदीप चोपड़ा ने फिल्म को एक टोन में साधे रखा है। अच्छा यह है कि उन्होंने कॉमेडी को चुटकुलों से नहीं भरा और कहानी में पैदा होने वाली परिस्थितियों से हंसाने की कोशिश की। कीकू शारदा फर्जी बाबा के बेटे बने हैं और एक दृश्य में वह आकर्षक ढंग से लोगों की भीड़ में पांच सौ के 1300 रुपये बनाते नजर आते हैं! कीकू और दिव्येंदु शर्मा की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। हर्षद-पिया के रोल कुछ गंभीर हैं। वे जमे हैं। खास तौर पर हर्षद।
 
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2016 The End
फिल्म को निर्देशक ने साइंस और मनोविज्ञान से भी जोड़ा है और एक साथ बहुत कुछ पेश करने की कोशिश की है। असल में, जयदीप ने 2013 में रीयलिस्टिक अंदाज वाली फिल्म 'माजी' (अतीत) बनाई थी, जिसे समीक्षकों ने बहुत सराहा मगर दर्शक नहीं मिले। इस बार उन्होंने विशुद्ध दर्शकों/बॉक्स ऑफिस को ध्यान में रख कर फिल्म बनाई। सवांद चुटीले हैं और हर दृश्य का प्रयास दर्शकों को हंसाना है। स्क्रिप्ट में कसावट और बारीक संपादन इसे ज्यादा बेहतर बना सकते थे।
 
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