आर्टिकल '370' के हटते ही पूरे देश में एक अजब सी लहर उठ चुकी है। हर तरफ बस इसी का बोलबाला है। यहां तक कि फिल्म इंडस्ट्री में भी इस नई पहल का दबदबा कायम हो चुका है। फिल्म उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक के हिट होने के बाद से ही कई फिल्मकार सरकार द्वारा की गई और भारत में हुई ऐसी ही ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर फिल्में बनाने का विचार कर रहे हैं।
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Article 15
- फोटो : social media
इसी के चलते अब आर्टिकल 370 के हटने के बाद फिल्मकारों के बीच इसी नाम की रजिस्ट्री करने के पीछे होड़ मच चुकी है। आयुष्मान खुराना की फिल्म आर्टिकल 15 की सफलता के बाद से ही हर फिल्मकार ऐसी ही कहानियों को तलाश रहे हैं। ऐसे में कई फिल्मकार अब आर्टिकल 370 के नाम के पीछे हाथ धो कर पड़ गए हैं।
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आर्टिकल 370
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शीर्षकों की मांग में आर्टिकल 370, आर्टिकल 370 स्क्रैप्ड, आर्टिकल 35 ए स्क्रैप्ड, आर्टिकल 370 एबोलिश्ड, आर्टिकल 35 ए स्क्रैप्ड, कश्मीर में तिरंगा, कश्मीर हमारा है और 370 आर्टिकल, जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब फिल्मकार ऐसी कहानियों के जरिए पैसा कमाने की सोच रहे हैं।
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gadar raazi uri
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कुछ ही वक्त पहले पुलवामा में हुए हमलों के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ था। लेकिन किसी भी फिल्मकार ने पुलवामा की कहानी पर फिल्म बनाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की। बीते कुछ वक्त में ऐसी राष्ट्रवादी कहानियां फिल्मकारों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुई हैं।
पिछले साल आई फिल्म राजी ने 122.39 करोड़ रुपये का व्यापार किया, इसके बाद फिल्म केसरी ने 151.87 करोड़ का व्यापार किया। वहीं साल की शुरूआत करने वाली फिल्म उरी ने 244 करोड़ रुपये कमाकर ऐसी राष्ट्रवादी कहानियां को फिल्मी दुनिया में एक नया जन्म दिया।