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Fathers Day 2023: पिता से मिली सीख ने इन सितारों को बनाया सुपरस्टार, फादर्स डे पर सुनाए संस्कारों के पहले पाठ

Sun, 18 Jun 2023 10:03 AM IST
प्रियंका नेगी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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स्टार्स - फोटो : अमर उजाला
पूरी सृष्टि में पिता का स्थान कोई नहीं ले सकता है। बच्चों का सामाजिक अस्तित्व पिता पर ही टिका होता है। बचपन में पिता की बातें भले ही कड़वी लगे, लेकिन उन बातों का अहसास तब होता है जब हम बड़े होते हैं। पिता मित्र भी हैं और गुरु भी हैं जो भटके हुए अपने बच्चों को सही राह दिखाते हैं। अपने जीवन के अनुभवों को साझा करके अपने बच्चों को जीवन में सही राह पर चलने की सीख देते हैं। आज फादर्स डे के अवसर पर हिंदी सिनेमा 10 मशहूर सितारे बता रहे हैं अपने जीवन पर पड़े अपने अपने पिता के प्रभाव के बारे में...
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यश जौहर और पिता करण जौहर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पिता बहुत ही आगे की सोच रखते थे: करण जौहर 
निर्माता-निर्देशक करण जौहर के पिता यश जौहर बहुत ही खुले विचारो के थे। उन्होंने हमेशा बड़े सितारों के साथ ही फिल्में बनाईं। करण जौहर कहते हैं, 'मेरे पिता ने मुझे कभी भी इस बात का अहसास नहीं दिलाया कि मैं किसी और से अलग था। जब मैंने आठ साल की उम्र में जयाप्रदा की फिल्म 'सरगम' देखी, तो यह फिल्म मुझे बहुत  पसंद आई थी। पिताजी कहने पर मैंने जयाप्रदा जैसा डांस किया था, मेरा डांस देखकर वह बहुत खुश थे।'  

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मनोज बाजपेयी और पिता राधाकांत बाजपेयी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पिताजी के फिल्में देखने के शौक से मिला मेरा नाम: मनोज बाजपेयी 
अभिनेता मनोज बाजपेयी के पिता राधाकांत बाजपेयी को सिनेमा देखने का बहुत शौक था। मनोज बाजपेयी कहते हैं, 'मेरे पिता बहुत ही बहुत ही सहज और सरल व्यक्तित्व के थे। मां के हाथ से कभी -कभार पिटाई भी हो जाती थी, लेकिन पिता जी ने कभी भी मुझ पर हाथ नहीं उठाया। उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था। वह मनोज कुमार की फिल्में बहुत पसंद करते थे। मनोज कुमार की एक्टिंग उनको इतनी पसंद थी कि उन्होंने उनके नाम पर ही मेरा नाम मनोज रख दिया। पिता जी अब नहीं रहे, लेकिन उनके साथ बिताए एक -एक पल मुझे हमेशा याद रहते हैं।'

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रणबीर कपूर और पिता ऋषि कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

डैडी की वजह से आध्यात्म की तरफ झुकाव हुआ: रणबीर कपूर 
अभिनेता ऋषि कपूर भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपनी  कला के जरिए वह सदियों तक याद किए जाते रहेंगे।  रणबीर कपूर कहते हैं, 'डैडी बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे, सुबह और शाम दोनों वक्त पूजा करते थे।  यहां तक कि कार से सफर के दौरान भी रास्ते में  छोटा या बड़ा मंदिर देखते थे तो जय कहते थे। उनकी इन बातों का असर मुझपर भी बहुत पड़ा है। इस तरह के संस्कार बच्चों को अपने पिता से ही मिलते हैं। जब आप अपने पिता से मिले संस्कार को अपने जीवन में उतारते हैं, तो अंदर से बहुत खुशी मिलती है। डैडी की  उस आदत को मैंने अपने जीवन में आत्मसात कर लिया। मुझे बहुत ही आत्मिक संतोष मिलता है।'  

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आयुष्मान खुराना और पिता पी खुराना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पिताजी से सीखा अनुशासन में रहना: आयुष्मान खुराना 
अभिनेता आयुष्मान खुराना के पिता पी खुराना ज्योतिष विद्या में ज्यादा रुचि रखते थे। आयुष्मान खुराना कहते हैं, 'मेरे पिता जी को संगीत, कविता, फिल्म और कला से बहुत ही लगाव था। उन्होंने भले ही कानून की पढाई की, लेकिन वह ज्योतिष में ज्यादा रूचि रखते थे। वही एकमात्र कारण है कि मेरे नाम में दो बार एन और आर आता है। पिताजी पूरा जीवन अनुशासन में ही रहे। समय के वह बहुत पाबंद थे, बचपन में उनकी पाबंदिया तोड़ने में बहुत मजा आता था। लेकिन अब समझ में आता है कि वह पाबंदियां कितनी जरूरी थी। अब बड़े होकर खुद पर लगाई पाबंदियां तोड़ी नहीं जाती। अगर मैं खुद को अनुशासन में रख पाता हूं तो वह पिता जी ही देन है।' 

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रूप कुमार राठौड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

डैडी ही मेरे पहले गुरु थे: रूप कुमार राठौड़  
गायक रूप कुमार राठौड़ के पिता पंडित चतुर्भुज राठौड़ अपने जमाने के मशहूर ध्रुपद गायक थे। रूप कुमार राठौड़  कहते हैं, 'डैडी ने पहली बार तबला पर हाथ रखवाया और तबलावादक के रूप में मेरी शुरुआत हुई। हम तीन भाई संगीत के क्षेत्र से है, लेकिन कोई भी डैडी के गायन को आगे बढ़ाने वाला नहीं था। मुझे ऐसा लगा कि डैडी की संगीत विरासत को आगे बढ़ना चाहिए और तबला बजाना छोड़कर मैं गायन सीखने लगा। आज मैं जो कुछ भी हूं अपने पिता गुरु के आशीर्वाद से ही हूं।'

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प्रीतम चक्रवर्ती और पिता प्रबोध चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

म्यूजिक से पहली पहचान डैडी की वजह से हुई : प्रीतम चक्रवर्ती 
संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती के पिता प्रबोध चक्रवर्ती वैसे तो रेलवे में नौकरी करते हैं, लेकिन उन्हें गिटार बजाने का बहुत शौक था। प्रीतम कहते हैं, 'म्यूजिक से मेरी जो पहचान हुई वह डैडी के वजह से ही हुई, डैडी को म्यूजिक से बहुत प्यार था और वह बच्चों को गिटार बजाना सिखाते थे। मैंने भी गिटार बजाना डैडी से ही सीखा। डैडी नहीं चाहते थे कि मैं म्यूजिक के क्षेत्र में अपना करियर बनाऊं। वह चाहते थे कि पढ़ाई करके कोई जॉब कर लूं। मैंने भी म्यूजिक में करियर बनाने के बारे में कभी नहीं सोचा था।'

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प्रोसेनजीत चटर्जी और पिता बिश्वजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

डैडी के साथ काम करने की  ख्वाहिश: प्रोसेनजीत  चटर्जी
अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी सीरीज वेब सीरीज 'जुबली' के बाद 'स्कूप' में भी एक अहम किरदार में नजर आए हैं। करीब तीन सौ फिल्मों में काम कर चुके प्रोसेनजीत की इच्छा है अपने पिता बिश्वजीत के साथ परदे पर दिखें। प्रोसेनजीत  चटर्जी कहते हैं, 'जब मैं पांच साल का साथ तब डैडी के साथ फिल्म 'छोटो जिज्ञासा' में काम किया था। इस फिल्म के निर्माता डैडी ही थे। इसके बाद डैडी ने कई फिल्में प्रोड्यूस की, लेकिन उनके साथ 'छोटो फिर कभी स्क्रीन शेयर करने का मौका नहीं मिला। अभी भी मेरी इच्छा है कि डैडी के साथ स्क्रीन शेयर करूं, अभी भी वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं, मेरी दिली ख्वाहिश है कि उनके साथ काम करूं।'

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समीर और पिता अनजान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पिताजी ने गीत लिखने की तकनीक सिखाई : समीर 
हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार समीर के नाम अनगिनत रिकॉर्ड दर्ज हैं, लेकिन उनके पिता अनजान नहीं चाहते थे कि समीर गीतकार बने।  समीर कहते हैं, 'डैडी नहीं चाहते थे कि मैं गीतकार बनू। जब मुंबई आया तो उनसे नहीं मिला। काफी समय के बाद जब उनको पता चला तब किसी रिश्तेदार के माध्यम से घर पर बुलाया और बोले जब आ ही गए तो यहां की तकनीक सीखनी बहुत जरूरी है। उन्होंने गीत लिखने की प्रॉपर ट्रेनिंग दी और समझाया कि कवि और गीतकार में बहुत अंतर होता है, जब पिताजी को लगा कि मुझे गीत लिखना आ गया तब मुझे आजाद कर दिया और बोले, अब अपने हिसाब से संघर्ष करो।'

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रजा मुराद और पिता मुराद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

वक्त की पाबंदी वालिद साहब से सीखी: रजा मुराद 
अभिनेता रजा मुराद के पिता मुराद अपने जमाने के दिग्गज अभिनेता रहे हैं। रजा मुराद कहते हैं, 'मेरे वालिद साहब ने मुझे संस्कार दिए कि महिलाओं और बुजुर्गों की इज्जत करनी चाहिए। वक्त की पाबंदी क्या होती है, वह मैंने वालिद साहब से सीखी। जब सुबह सात बजे की मेरी कोई शूटिंग होती थी, तो  सुबह मुझे छह बजे चाय के साथ उठाते थे और साढ़े छह बजे कहते थे कि अब तुम्हारा काम पर जाने का समय हो गया है, जाओ और वक्त पर पहुंच जाना। जब पूना में भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान की शुरुआत हुई तो वालिद साहब ने कहा कि  अब तुम्हारे जमाने में इंस्टीट्यूट खुला  है तो इसका लाभ तुम्हें  लेना चाहिए। उनके सुझाव पर ही मैंने 1969 में फिल्म इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया।'

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महेंद्र कपूर और रोहन कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

डैडी से मिली सीख का जिंदगी भर पालन किया : रोहन कपूर 
पद्मश्री से सम्मानित गायक महेंद्र कपूर के गाने आज भी कहीं सुनाई देते हैं, तो रोम -रोम प्रफुल्लित हो उठता है। महेंद्र कपूर के बेटे रोहन कपूर कहते हैं, 'रफी साहब अक्सर पिता जी से कहा करते थे कि चरित्र, रियाज और जमीन से हमेशा जुड़े रहना, अगर इन तीन चीजों पर अमल करोगे तो तुम्हें जिंदगी में कभी कोई छू भी नहीं सकेगा। यही बात डैडी  मुझसे हमेशा कहा करते थे और मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इन तीन चीजों का बहुत ख्याल रखा। आप कितने भी कामयाब क्यों ना हो जाए, अगर आप का चरित्र अच्छा नहीं है तो कामयाबी बदनामी में बदलने में समय नहीं लगेगा। गायक के लिए हर दिन रियाज बहुत जरूरी है, आप कितने भी कामयाब क्यों ना हो जाए अगर आप जमीन से जुड़े रहेंगे तो आपकी इज्जत हमेशा रहेगी।' 

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