फरहान अख्तर
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म में कुछ इस तरह से थी कविता
दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम, नज़र में ख्वाबो की बिजलियां लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम, हवा के झोंकों के जैसे आजाद रहना सीखो, तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो, हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें, हर एक पल इक नया समां देखें यह निगाहें, जो अपनी आंखों में हैरानियां लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम, दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम।'