फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नितिन बोस: एक ऐसे निर्देशक जिनकी वजह से हुई फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत, जानिए उनके बारे में कुछ रोचक बातें

Tue, 26 Apr 2022 10:13 AM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
नितिन बोस - फोटो : सोशल मीडिया
बॉलीवुड की फिल्मों और गानों के बीच बहुत गहरा रिश्ता है। ऐसी शायद ही कोई हिंदी फिल्म बनी होगी, जिसमें कोई गाने नहीं हो। लेकिन क्या आपको पता है कि एक ऐसा समय भी था, जब सिनेमा में गानों का इस्तेमाल नहीं हुआ करता था। आज हम आपको उस मशहूर शख्सियत के बारे में बताएंगे, जिनकी वजह से पहली बार फिल्मों में गाने का प्रयोग किया गया। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारतीय सिनेमा के मशहूर निर्देशक नितिन बोस की। 26 अप्रैल 1897 को जन्मे नितिन ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत न्यू थिएटर से की थी। इसमें हिंदी और बंगाली दोनों ही भाषाओं में फिल्मों का निर्माण होता था।
विज्ञापन

2 of 4
नितिन बोस - फोटो : सोशल मीडिया
पिता से सीखे फोटोग्राफी के गुर
नितिन बोस के पिता को फोटोग्राफी में महारत हासिल थी। नितिन को भी तस्वीरें खींचने का बहुत शौक था। जब यह बात उनके पिता को पता चली तो उन्होंने अपने बेटे को भी फोटोग्राफी की बारीकियां सिखाना शुरू किया।
विज्ञापन

3 of 4
नितिन बोस - फोटो : सोशल मीडिया
इस फिल्म से हुई प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत
साल 1931 आई फिल्म आलमआरा भारतीय सिनेमा की पहली बोलती हुई फिल्म थी। उस समय फिल्मों में गाने नहीं हुआ करते थे। कलाकार तब गाने को सेट पर ही लाइव गाते थे। इसके अलावा गाने को डायलॉग की तरह ही गाया जाता था। फिल्मों में प्लेबैक का श्रेय नितिन बोस को जाता है। साल 1935 में रिलीज हुई उनकी बंगाली फिल्म भाग्य चक्र में सबसे पहले प्लेबैक सिंगिंग का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद हिंदी में बनी इसकी रीमेक धूप छांव में भी ऐसा ही किया गया। इस फिल्म के लिए संगीत तैयार करने की जिम्मेदारी उनके भाई मुकुल बोस और संगीतकार रायचंद बोराल को दी गई थी। 
विज्ञापन

4 of 4
नितिन बोस - फोटो : सोशल मीडिया
गानों की वजह से हिट हुई फिल्म
नितिन बोस का यह प्रयोग इतना सफल रहा कि इसके बाद फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग का रिवाज शुरू हो गया। आज भारतीय सिनेमा में हर साल सैकड़ों फिल्में बनती हैं जिनमें गाने जरूर होते हैं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में तो कई फिल्में सिर्फ गानों की वजह से भी हिट हो चुकी हैं। अपने फिल्मी करियर में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में बनाईं। उन्होंने फिल्म दुश्मन, मिलन, दीदार, गंगा-जमुना और कठपुतली जैसी फिल्में बनाईं। फिल्म में उनके शानदार योगदान के लिए 1977 में दादा साहेब फाल्के सम्मान से नवाजा गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें