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अमर उजाला से खास बातचीत में बोले लाल सिंह चड्ढा के लेखक, मेरी दिनचर्या पर कोरोना का कोई असर नहीं

Tue, 14 Apr 2020 07:02 PM IST
अपूर्वा राय पंकज शुक्ल, मुंबई
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लाल सिंह चड्ढा के लेखक - फोटो : ट्विटर
इस साल की बहुतप्रतीक्षित फिल्म लाल सिंह चड्ढा लिखने वाले मशहूर अभिनेता अतुल कुलकर्णी को लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के फैसले ने बिल्कुल परेशान नहीं किया है। वह कहते हैं, “मेरी दिनचर्या पर कोरोना को लेकर चल रहे लॉकडाउन का कोई खास फर्क नहीं पड़ा है।” फिल्म लाल सिंह चड्ढा के बारे में तो वह ज्यादा कुछ बात नहीं करते लेकिन अमर उजाला से इस खास बातचीत में उन्होंने अपने जिंदगी जीने के फलसफे और किरदार चुनने के अपने तरीके को लेकर खूब बातें कीं।
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अतुल कुलकर्णी
अतुल कुलकर्णी को करियर के शुरुआती दौर में ही पहले फिल्म हे राम और फिर फिल्म चांदनी बार के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। ये वो दौर था जब सोशल मीडिया का इतना हो हल्ला नहीं था। तो कही कामयाबी का सार्वजनिक उत्सव न मना पाने की कोई कसक तो नहीं रही है उनके मन में? “नहीं, इन सब बातों के बारे में ज्यादा सोचता नहीं हूं।” अतुल जवाब देते हुए कहते हैं, “मैं अतीत में जीने में यकीन नहीं रखता। मैं इस समय के क्षण में जीता हूं। मुझे अभी जो मेरे आस पास हो रहा है उसे जीने में आनंद आता है।”
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अतुल कुलकर्णी
इन दिनों वूट सेलेक्ट पर वेब सीरीज द राईकर केस में दिखाई दे रहे अतुल कुलकर्णी यह भी कहते हैं कि एक इंसान को अपने पेशे को ही अपनी जिंदगी नहीं मान लेना चाहिए, “मैं पहले भी ये बात कह चुका हूं कि मैंने अभिनय में कदम रखने के समय ही इस बारे में फैसला ले लिया था। अब भी मेरा यही मानना है कि पेशा और जीवन दो अलग अलग चीजें हैं और हमें दोनों को एक दूसरे से अलग रखते हुए जीना चाहिए। मैं हर रोज़ शूटिंग ही करूं, ऐसी ख्वाहिश मेरी कभी नही रही। बल्कि मेरा ये सोचा समझा फैसला रहा है कि मैं रोज़ शूटिंग नहीं करूंगा।”

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अतुल कुलकर्णी
किसी किरदार के चयन के मानदंड के बारे में पूछे जाने पर अतुल कहते हैं, “मेरा नजरिया एक किरदार की बजाय पूरी कहानी पर रहता है। मैं ये समझने की कोशिश करता हूं कि जो कहानी निर्माता या निर्देशक मुझे सुना रहा है, वह दर्शकों को पसंद आएगी या नहीं। मैं कहानी को दर्शक के नजरिए से सुनता हूं और फिर उसी अनुसार फैसला लेता हूं।”
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Laal Singh Chaddha song Jugnu - फोटो : amar ujala
साल 2006 में रिलीज हुई फिल्म रंग दे बसंती से आमिर खान और अपनी दोस्ती की शुरूआत मानने वाले अतुल कुलकर्णी ये भी कहते हैं कि मित्रता की परिभाषाएं किसी पेशे के हिसाब से तय नहीं की जा सकतीं। फिल्म इंडस्ट्री में भी वैसी ही मित्रताएं और अनबनें होती हैं जैसी कि किसी दूसरे पेशे में होती हैं। ये इंसानी रिश्ते हैं और किसी भी दूसरे पेशों की तह ही फिल्म इंडस्ट्री में भी होते हैं। 
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