इंदर कुमार, विनोद खन्ना, ओम पुरी और रीमा लागू के बाद फिल्म इंडस्ट्री की एक और दिग्गज शख्सियत हमे छोड़कर जा चुकी है। अपनी पहली ही फिल्म से नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके दिग्गज फिल्मकार कुंदन शाह का शनिवार को मुंबई में निधन हो गया।
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Kundan Shah
लेखक-निर्देशक कुंदन शाह क्लासिक कॉमेडी 'जाने भी दो यारो' और टीवी सीरीज 'नुक्कड़' के लिए सबसे ज्यादा जाने गए।
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Kundan Shah
पुणे की एफटीआईआई से निर्देशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। उन्होंने 1983 में ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, रवि वासवानी, पंकज कपूर और सतीश शाह के साथ एक यादगार फिल्म 'जाने भी दो यारो' बनाई। फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा लें कि आज भी फेसबुक पर इस फिल्म के लिए स्पेशल इवेंट पेज बनाए जाते हैं। इस फिल्म के लिए कुंदन शाह को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
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फिल्म के बाद कुंदन शाह ने टीवी में भी वहीं धमाल किया। उनकी बनाई पहली टीवी सीरीज 'ये जो है जिंदगी' (1984) शुक्रवार रात 9 बजे आया करती थी। इसकी लोकप्रियता इतनी थी कि लंदन के स्टोर्स को भी सीरीज के वीडियोज की कॉपी का इंतजार होता था।
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साल 1985 से लेकर 1986 तक कुंदन शाह ने सईद अख्तर मिर्जा के साथ मिलकर टीवी सीरीज 'नुक्कड़' का निर्देशन किया। 1988 में उन्होंने सिटकॉम (सिटुएश्नल कॉमेडी) 'वाघले की दुनिया' का निर्देशन किया जो मशहूर कार्टूनिस्ट आरके लक्षमण के किरदार 'कॉमन मैन' पर आधारित थी।
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करीब 10 साल बाद कुंदन शाह ने फिल्मों में वापसी की। उन्होंने साल 1993 में शाहरुख खान को लेकर फिल्म 'कभी हां कभी ना' बनाई। उन्होंने फिल्म की स्क्रीनप्ले भी लिखी थी। इस फिल्म के लिए शाह को फिल्मफेयर की ओर से क्रिटिक्स अवॉर्ड दिया गया। इस अवॉर्ड को जीतने वाले वह पहले फिल्मकार थे।
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कुंदन शाह की बनाई फिल्म 'क्या कहना' ने भी बड़े पर्दे पर कमाल किया। उनकी आखिरी फिल्म 'पी से पीएम तक' रही जो साल 2015 में रिलीज हुई थी।
कुंदन शाह कला जगत की उन शख्सियतों में से भी एक थे जिन्होंने साल 2015 में देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के छात्रों के समर्थन में अपना राष्ट्रीय पुरस्कार वापस कर दिया था। उन्होंने कहा था, 'देश का माहौल आज ऐसा हो चुका है कि उनकी फिल्म 'जाने भी दो यारो' रिलीज करना गलत होगा।'