बालवीर, देवों के देव-महादेव, उतरन, कुमकुम भाग्य, एक वीर की अरदास-वीरा और पीटरसन हिल जैसे सुपरहिट धारावाहिकों की मशहूर अभिनेत्री देहरादून की समीक्षा भटनागर ने अभिनेता से निर्देशक बने श्रेयस तलपड़े की फिल्म पोस्टर बॉयज से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस समय समीक्षा एक साथ तीन फिल्मों में काम कर रही हैं, उनसे एक खास मुलाकात।
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Samiksha Bhatnagar
- फोटो : amar ujala
आपको क्या लगता है बाहर से आकर इंडस्ट्री में काम पाने की शुरुआत कहां से करनी चाहिए?
मैंने जब फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का फैसला किया तो मैं सीधे मुंबई का टिकट कटाकर यहीं नहीं चली आई। पहले मैंने बाकायदा कथक सीखा। इसका रियाज किया और कुछ महीनों तक मैंने डांसिंग क्लासेस भी चलाईं। फिल्म इंडस्ट्री में आते ही पैसा नहीं मिलता है। यहां नाम बनाने से पहले का दौर बहुत मुश्किल भरा होता है। अगर आपके पास कोई ऐसा हुनर है जिससे आपको पैसे की तंगी न हो तो यहां काम तलाशना आसान रहता है। सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के भरोसे यहां आ जाना ठीक नहीं है।
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Samiksha Bhatnagar
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आपने टेलीविजन में बहुत नाम कमाया और फिर फिल्मों में भी बॉबी देओल की हीरोइन बनकर सुर्खियां बटोरीं, क्या टिप्स देना चाहेंगी इस इंडस्ट्री में काम की तलाश में आने वालों को?
यहां काम की कमी नहीं है। लेकिन, मौका मिलने पर आप उस मौके के काबिल हैं या नहीं, इसी पर सारी बात निर्भर करती है। जिंदगी हर इंसान को कामयाब बनने का एक मौका जरूर देती है। उस मौके के वक्त आपने खुद को कितना तैयार रखा, इसी पर आगे का करियर निर्भर करता है। मेरी सलाह यही है कि यहां आने से पहले खुद को परखें और तैयार करें। यहां किसी के पास आपको सिखाने का समय नहीं है।
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Samiksha Bhatnagar
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पोस्टर बॉयज के बाद आप एक क्राइम थ्रिलर जाको राखे साइंयां कर रही हैं? क्या रोल है इसमें आपका?
यह राजपाल यादव की कमबैक फिल्म साबित होगी। फिल्म के हीरो जिमी शेरगिल हैं, लेकिन मेरी जोड़ी राजपाल यादव के साथ बनी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक सत्य घटना पर आधारित ये फिल्म एक रात की कहानी है। पुलिस और समाज के रिश्तों पर बन रही इस फिल्म की कहानी ही इसकी जान है। इसके अलावा दो फिल्में और हैं, लेकिन उन पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी।
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टेलीविजन छोड़े हुए आपको तीन साल हो गए, ऐसा क्यों?
भारतीय टेलीविजन में हाल के बरसों में काफी बदलाव आया है। अब हर सीरियल की हीरोइन 15 साल की लड़की होती है। सीरियल में नए विचारों की कमी है। घूम फिरकर हर सीरियल एक ही मोड़ पर पहुंच जाता है। फिर इस बीच मुझे फिल्मों में अच्छा काम मिलने लगा तो मुझे लगा कि जब मुझे फिल्मों में लीड रोल मिल रहे हैं तो सीरियल में कोई भी किरदार क्यों करूं। ऐसा नहीं कि मैं सीरियल करना नहीं चाहती। जब भी मुझे अपनी उम्र के हिसाब से लीड किरदार मिलेगा, मैं जरूर करूंगी।
वेबसीरीज तो इन दिनों मुंबई में खूब बन रही हैं, उनकी तरफ जाने के बारे में क्या ख्याल है?
हां, वेबसीरीज का चलन पिछले दो साल से बढ़ा है। मेरे पास भी तमाम प्रस्ताव आ चुके हैं लेकिन जैसा कि मैंने पहले ही कहा मैं बैनर की बजाय कहानी पर ध्यान देती हूं। अपने करियर में मैं उस स्थिति में हूं जहां अपनी पसंद के किरदार चुन सकूं। मुझे वेबसीरीज करने की जल्दी नहीं है, बस सही किरदार का इंतजार है।